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तलोजा जेल भेजने के लिए रायगढ़ पुलिस ने बोला झूठ, कहा- अस्थायी जेल में सोशल मीडिया पर एक्टिव थे अर्नब

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रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी को परेशान करने और फंसाने के लिए महाराष्ट्र की उद्धव सरकार तरह-तरह की साजिशें कर रही हैं। रायगढ़ पुलिस ने अर्नब गोस्वामी को तलोजा जेल शिफ्ट करने के लिए आरोप लगाया कि वो अलीबाग के क्वारंटाइन सेंटर के अंदर बने अस्थायी जेल में मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए सोशल मीडिया पर एक्टिव थे, जबकि अर्नब का कोई भी सोशल मीडिया अकाउंट नहीं है। 

क्राइम ब्रांच के इंवेस्टिगेटिंग ऑफिसर जमील शेख ने कहा कि शुक्रवार देर शाम को हमें पता चला कि गोस्वामी किसी के मोबाइल फोन का उपयोग करते हुए सोशल मीडिया पर सक्रिय थे। जमील शेख का यह बयान पूरी तरह झूठा प्रतीत होता है, क्योंकि पुलिस ने गोस्वामी के फोन को उनके वर्ली निवास से गिरफ्तार करने के बाद जब्त कर लिया था, इसलिए उनके पास अपना फोन नहीं था।

पुलिस अधिकारी ने आगे कहा कि मामले के जाँच अधिकारी के रूप में, मैंने अलीबाग जेल अधीक्षक को लिखा था कि एक जाँच रिपोर्ट मांगी जाए कि गोस्वामी को मोबाइल कैसे मिला और किसने उन्हें क्वॉरन्टीन सेंटर में मोबाइल मुहैया कराया था। इसके बाद, हमने उन्हें तलोजा जेल में शिफ्ट कर दिया।

पुलिस अधिकारी का बयान हैरान करने वाला है, क्योंकि अर्नब गोस्वामी किसी भी सोशल मीडिया पर मौजूद नहीं हैं। किसी भी बड़े सोशल प्लेटफॉर्म पर उनका कोई सोशल मीडिया अकाउंट नहीं है। इसलिए सवाल उठता है कि पुलिस को कैसे पता चला कि गोस्वामी सोशल मीडिया पर सक्रिय थे। अगर वास्तव में उन्होंने सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट किया था, फिर वो तो अबतक वायरल हो जाना चाहिए, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है।

जब गोस्वामी के पास अपना फोन नहीं था और जेल में फोन रखने की अनुमति नहीं है तो फिर पुलिस पर ही गंभीर सवाल उठते हैं कि पुलिस की पूरी निगरानी के बावजूद अर्नब के पास एक्टिव डेटा के साथ मोबाइल कैसे पहुंचा? अगर किसी ने उनको मोबाइल फोन मुहैया कराया है तो मोबाइल का कनेक्शन किसके नाम पर है ? उसके नाम को पुलिस द्वारा सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया है? ऐसे तमाम सवाल है,जिनका जवाब उद्धव सरकार की पुलिस को देना है।

उधर तलोजा जेल में शिफ्ट किए जाने के बाद अर्नब गोस्वामी ने अपनी जान को खतरा बताया है, क्योंकि जेल में कई कुख्यात अपराधी और अंडरवर्ल्ड डॉन को रखा गया है। पुलिस वैन के भीतर से ही मीडिया से बात करते हुए बताया कि उन्हें उनके वकीलों से भी बात नहीं करने दी जा रही है। उन्होंने बताया कि उन्हें सुबह के 6 बजे जगा दिया गया और रविवार की सुबह उन्हें धक्का भी दिया गया, उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ। उन्होंने कहा, “मेरी ज़िंदगी खतरे में है। मैं भारत की जनता को, पूरे देश की जनता को बताना चाहता हूँ कि मेरी जान खतरे में है।”

गौरतलब है कि अर्नब की जमानत याचिका पर आज बॉम्बे हाईकोर्ट फैसला सुना सकता है। 7 नवंबर (शनिवार) को बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई हुई थी। 6 घंटे तक चली सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने जमानत के फैसले को सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट ने अर्नब को राहत देते हुए कहा कि वो चाहें तो लोअर कोर्ट में पिटिशन दाखिल कर सकते हैं। हाईकोर्ट ने लोअर कोर्ट से कहा कि अगर इनकी तरफ से याचिका दाखिल की जाती है, तो उस पर 4 दिन के अंदर फैसला दिया जाए। अर्नब को महाराष्ट्र पुलिस ने इंटीरियर डिजाइर अन्वय और उनकी मां को कथित तौर पर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किया था।

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