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दावोस में सवालों से भागे फाइजर के सीईओ, भारत में घटिया कोरोना वैक्सीन का समर्थन करने वाले कांग्रेसी और भाड़े के पत्रकारों के गठजोड़ की जमकर हो रही फजीहत

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स्विट्जरलैंड के दावोस में चल रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2023 में शामिल होने के लिए अमेरिकी दवा कंपनी फाइजर के सीईओ अल्बर्ट बोर्ला भी पहुंचे। इस दौरान पत्रकारों ने उन्हें घेर लिया और फाइजर की कोरोना वैक्सीन को लेकर सवालों की बौछार कर दी। पत्रकारों के सवाल से फाइजर के सीईओ काफी असहज महसूस कर रहे थे। वह सवालों का जवाब देने से बचते नजर आए। पत्रकारों ने भी उनका पीछा नहीं छोड़ा और लगातार सवाल पूछते रहे। फाइजर के सीईओ सिर्फ ‘बहुत बहुत धन्यवाद’ कहकर सवालों को टालते रहे। अब भारत में फाइजर की घटिया कोरोना वैक्सीन का समर्थन करने वाले कांग्रेस, आम आदमी पार्टी समेत तमाम सियासी दलों और उनसे जुड़े पत्रकारों की सोशल मीडिया पर जमकर फजीहत हो रही है। 

दरअसल, फाइजर के सीईओ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह दावोस में एक पत्रकार के सवालों से बचते नजर आ रहे हैं। वायरल वीडियो में साफ दिखा जा सकता है कि फाइजर के सीईओ से जब रिबेल न्यूज के एक पत्रकार ने वैक्सीन को लेकर सवाल पूछना चाहा तो उन्होंने पत्रकार के सवालों को टाल दिया। पत्रकार ने पूछा कि फाइजर की वैक्सीन संक्रमण नहीं रोक सकी। लेकिन आपने इस बात को क्यों छिपाए रखा। रिबेल न्यूज के पत्रकार ने पूछा कि फाइजर ने कहा था कि टीका यह 100 प्रतिशत प्रभावी था, फिर 90 प्रतिशत, फिर 80 प्रतिशत, फिर 70 प्रतिशत, लेकिन अब हम जानते हैं कि वैक्सीन कोरोना के प्रभाव को नहीं रोक सकती। आपने उस तथ्य को क्यों छुपाए रखा?’ पत्रकार ने सवाल किया कि क्या जिन देशों ने गैर प्रभावी टीके खरीदे उनको रिफंड देंगे ? क्या अब दुनिया से माफी मांगेंगे?

यह वीडियो वायरल होने के बाद फाइजर की करोना वैक्सीन का समर्थन करने वाले कांग्रेस और अन्य दलों के नेताओं पर जमकर निशाना साधा जा रहा है। सोशल मीडिया में बीजेपी और दूसरे लोगों ने उन्हें घेरना शुरू कर दिया है। समर्थन करने के पीछे के मकसद को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने इस वीडियो को शेयर किया। उन्होंने कहा कि सभी भारतीयों को याद दिला दूं कि इसी कंपनी ने क्षतिपूर्ति की शर्त न मानने के लिए भारत को धमकी दी थी। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राहुल, चिदंबरम और जयराम रमेश ने कोरोना के दौरान इस विदेशी वैक्सीन का सपोर्ट किया था। लेकिन वह पूरी तरह से फेल हो गई।

स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सीन और कोविशील्ड पर सवाल उठाकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित कई नेताओं ने अमेरिकी फार्मास्युटिकल कंपनी फाइजर की कोरोना वैक्सीन को भारत में जल्द से जल्द मंजूरी देने की वकालत की थी। इन्होंने भारत की स्वदेशी वैक्सीन के खिलाफ दुष्प्रचार भी किया था। बीजेपी के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने वीडियो शेयर करते हुए कहा कि फाइजर के सीईओ से दावोस में उनकी वैक्सीन के बारे में सवाल पूछे जा रहे हैं। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और कई तमाम दल है जो लगातार विदेश में बनी फाइजर की वैक्सीन की भारत में वकालत कर रहे थे। देश में एक ऐसा इकोसिस्टम था, जो स्वदेशी वैक्सीन के खिलाफ दुष्प्रचार कर रहा था। उन्होंने सवाल किया कि ऐसा क्यों किया जा रहा था ? क्या कांग्रेस – आम आदमी पार्टी का इकोसिस्टम अब माफ़ी मांगेगा ?

शहजाद पूनावाला ने ट्वीट कर लिखा कि याद कीजिए कि किस तरह राहुल गांधी, जयराम और पूरी पार्टी ने विदेश में बनी वैक्सीन के समर्थन में आवाज उठाई। वे भारत में निर्मित वैक्सीन को लेकर लोगों में संदेह पैदा कर रहे थे। कुछ ने इसे बीजेपी का टीका बताया था। क्या वे इसके लिए माफी मांगेंगे और हमें अपने डील के बारे में बताएंगे?

फाइजर की वैक्सीन का समर्थन करने और स्वदेशी वैक्सीन के खिलाफ प्रोपेगैंडा करने में विपक्षी दलों के अलावा उनके सरपरस्त पत्रकार भी शामिल थे। विपक्षी दलों के सुर में सुर मिलाने वाले तथाकथित दरबारी, सेक्युलर, लिबरल और वामपंथी पत्रकारों ने स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सीन और कोविशील्ड के खिलाफ जमकर अभियान चलाया। उन्होंने स्वदेशी वैक्सीन के खिलाफ लोगों में भ्रम पैदा करने की कोशिश की। अब ऐसे पत्रकारों के गठजोड़ पर सवाल उठाएं जा रहे हैं, जो पत्रकारिता की आड़ में एक एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं और देश की जनता को गुमराह कर रहे हैं। 

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