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SC-ST कर्मचारियों के EPFO खाते में मोदी सरकार करेगी अंशदान, EPF ब्याज दर में की बढ़ोतरी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार कर्मचारियों के हित में एक के बाद एक फैसले ले रही है। इसका मकसद देश के करोड़ों कर्मचारियों के जीवन में खुशहाली लाना है। मोदी सरकार ने दीपावली से पहले पीएफ पर मिलने वाले ब्याज दर को बढ़ाकर एक बड़ा तोहफा दिया है। वहीं सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में काम करने वाले एससी और एसटी कर्मचारियों के EPFO खाते में अंशदान करने का फैसला किया है।

EPF ब्याज दर बढ़कर हुई 8.65 प्रतिशत 

केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने मंगलवार को साल 2018-19 के लिए ईपीएफ ब्याज दर की अधिसूचना जारी कर दी। जिसके तहत इस साल कर्मचारियों को 8.65 प्रतिशत की दर से ब्याज मिलेगा। यह ब्याज दर पिछले साल की 8.55 की तुलना में अधिक है।

6 करोड़ कर्मचारियों को मिलेगा फायदा

केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने कहा कि यह ब्याज दर (8.65 प्रतिशत) 22 फरवरी, 2019 को ईपीएफओ के सर्वोच्च निर्णय लेने वाले निकाय केंद्रीय न्यासी बोर्ड द्वारा अनुमोदित की गई थी। जिसके बाद सितंबर, 2019 को इस पर वित्त मंत्रालय की सहमति भी मिल गई। जिसके बाद श्रम मंत्रालय ने पीएफ पर 8.65 प्रतिशत ब्याज दर देने के लिए एक अधिसूचना जारी की है। मंत्री ने यह भी कहा कि इस फैसले से 6 करोड़ से अधिक ईपीएफओ ग्राहकों के खाते में 2018-19 के लिए ब्याज के रूप में 54,000 करोड़ रुपए ब्याज के रूप में दिए जाएंगे।

सरकार ने SC-ST कर्मचारियों की मांगी जानकारी 

केंद्र सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने एक सर्वे शुरू किया है। इसमें इपीएफओ में अंशदान के करने वाली विभिन्न कंपनियों के अनुसूचित जाति और जनजाति से ताल्लुक रखने वाले कर्मचारियों की जानकारी मांगी गई है। निजी क्षेत्र की कंपनियों को भी इसमें शामिल किया गया है। यह सर्वे नीति आयोग द्वारा संचालित किया जा रहा है।

सार्वजनिक और निजी क्षेत्र कर्मचारी होंगे शामिल

शुरूआत में इसमें सिर्फ सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों यानी पीएसयू को शामिल किया गया था, लेकिन अब इसके दायरे में निजी कंपनियां भी आएंगी। क्षेत्रीय प्रॉविडेंट फंड कार्यालयों की ओर से कंपनियों से एक खास फॉर्मेट में एससी-एसटी कर्मचारियों से जुड़ी जानकारियां मांगी गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, पीएफ खाते में कंपनी की ओर से दिया जाने वाला अंशदान पहले की तरह जारी रहेगा, वहीं सरकार SC/ST कर्मचारियों की ओर से ईपीएफओ में अंशदान करेगी। बता दें कि इस महीने की शुरुआत में शुरू हुए इस सर्वे को पर नीति आयोग बीते कुछ साल से विचार करता रहा है।

SC-ST कर्मचारियों की वित्तीय हालत होगी बेहतर

मोदी सरकार के पास पब्लिक सेक्टर कंपनियों में काम करने वाले एससी-एसटी कर्मचारियों के आंकड़े पहले से हैं, एक बार प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों की जानकारी मिलने के बाद वह उन कर्मचारियों की ओर से ईपीएफओ अंशदान का भुगतान करने में सक्षम होगी। सरकार का मानना है कि इससे एससी-एसटी कर्मचारियों की वित्तीय हालत बेहतर करने में मदद मिलेगी।

एक नजर डालते हैं मोदी सरकार के पहले और दूसरे कार्यकाल में अबतक कर्मचारियों की बेहतरी के लिए उठाए गए कदमों पर-

ESIC बनेगी सरकारी कंपनी

सरकार ईएसआई मेडिकल स्कीम को बेहतर बनाने की कोशिश कर रही है। इसके तहत कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) को कंपनी में बदलने का फैसला किया गया है। वहीं ईएसआईसी ने 2022 तक देश के हर जिले में डिस्पेन्सरी कम ब्रांच कार्यालय खोलने की कवायद तेज कर दी है। इससे बीमित कर्मचारियों का बेहतर इलाज संभव होगा। 

ESIC के ढांचे में होगा बदलाव

सरकार ने कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) को कंपनी में बदलने के लिये 18 सितंबर, 2019 को एक मसौदा जारी किया। इसमें कर्मचारी राज्य बीमा निगम के ढांचे को बदलने की बात की गयी है। सरकार अब ईएसआईसी के लिए चेयरमैन और वाइस चेयरमैन नियुक्त करेगी। इसके साथ ही इनमें सीईओ भी बनाये जा सकेंगे जो संबंधित निकायों के कार्यकारी प्रमुख होंगे। मसौदे में कहा गया है कि ईएसआईसी को कंपनी का स्वरूप दिया जा सकता है। अभी ये एजेंसी न्यास या बोर्ड द्वारा चलायी जाती हैं और स्वायत्त निकाय के तौर पर काम करती है।

ईएसआई अंशदान 6.5 से घटाकर किया 4 प्रतिशत

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को बड़ी राहत दी, जब राज्य कर्मचारी बीमा (ईएसआई) स्कीम में अंशदान की दर 6.5 प्रतिशत से घटाकर 4 प्रतिशत कर दिया। इससे 3.6 करोड़ कर्मचारी और 12.85 लाख नियोक्ता लाभान्वित होंगे। अंशदान की घटी हुई दर से कामगारों को बहुत राहत मिलेगी। इससे और अधिक कामगारों को ईएसआई योजना के अंतर्गत नामांकित करना और ज्यादा से ज्यादा श्रमिक बल को औपचारिक क्षेत्र के अंतर्गत लाना सुगम हो सकेगा। अंशदान में नियोक्ता के हिस्से में कमी होने से प्रतिष्ठानों का वित्तीय उत्तरदायित्व घटेगा, जिससे इन प्रतिष्ठानों की व्यावहारिकता में सुधार होगा। इससे कारोबार करने की सुगमता में और भी ज्यादा बढ़ोत्तरी होगी। ऐसी भी संभावना है कि ईएसआई अंशदान की दर में कटौती से कानून के बेहतर अनुपालन का मार्ग प्रशस्त होगा। ईएसआई कानून के अंतर्गत नियोक्ता और कर्मचारी दोनों ही अपना-अपना योगदान देते हैं।

असंगठित क्षेत्र के कामगारों को 3,000 रुपये की मासिक पेंशन
प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरिम बजट-2019 में असंगठित क्षेत्र के कामगारों को प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन (PMSYM) योजना के रूप में एक बड़ा तोहफा दिया। 15 फरवरी, 2019 से इस योजना की शुरूआत हो चुकी है। इस योजना का लाभ लेने के लिए देशभर के 3.13 लाख कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) में रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है। इसके तहत 60 साल की उम्र के बाद हर कामगार को 3,000 रुपए महीने पेंशन दी जाएगी। इस योजना का लाभ असंगठित क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों को मिलेगा। जिनकी न्यूनतम मासिक आय 15 हजार रुपए या उससे कम तथा आयु सीमा 18-40 वर्ष के बीच है। 

अब मिलेगा समान काम के लिए समान वेतन

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार समाज के हर वर्ग, हर तबके के लोगों का ध्यान रख रही है। मोदी सरकार की हमेशा यही कोशिश रहती है कि समाज के हर वर्ग को उसके अधिकार मिलें और किसी भी स्तर पर उनका शोषण न हो सके। जनप्रिय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केंद्र सरकार के तहत आने वाले लगभग दस लाख कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दिया है। मोदी सरकार ने समान काम-समान वेतन के सिद्धांत को लागू करते हुए विभिन्न विभागों में काम करने वाले अनियमति केंद्रीय कर्मचारियों को नियमति कर्मचारियों के समान वेतन देने का आदेश दिया है। पीएमओ के अधीन कार्मिक और प्रशिक्षण विभान ने इस संदर्भ में शासनादेश जारी कर दिया है।

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