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फास्ट ट्रैक इनवेस्टमेंट को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भर भारत बनाने की ओर मोदी सरकार

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान की सोच को पूरी तरह जमीन पर उतारने के लिए मोदी सरकार आगे की ओर बढ़ चुकी है। उनकी सोच के अनुरूप देश को आगे बढ़ाने के लिए उनकी नीतियों को क्रियान्वित करने के लिए मोदी सरकार न केवल कमर कस चुकी है बल्कि 20 लाख करोड़ रुपये के दुनिया के सबसे बड़े आर्थिक पैकेजों में से एक की घोषणा कर उसे सफल बनाने की ओर कदम भी बढ़ा चुकी है। मोदी सरकार अपने इस अभियान को सफल बनाने के लिए फास्‍ट ट्रैक इंवेस्टमेंट को बढ़ावा देगी। इसके लिए अपनी पुरानी नीतियों में संशोधन करेगी। देश में सभी क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार के सचिवों का एक एम्‍पावर्ड ग्रुप बनाएगी। यही वह एम्पार्ड ग्रुप होगा जो देश में निवेश को गति देने के साथ विदेशी निवेश को आकर्षित करने का काम करेगा। मोदी सरकार अपने प्रत्येक विभाग में एक ऐसे विशेष सेल का निर्माण करेगी जो इस काम के प्रति समर्पित होगी।

सभी इंडस्ट्रियल पार्कों की होगी जीआईआईएस मैपिंग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज की घोषणा करने के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उसे क्षेत्रवार बंटवारे की घोषणा की। इसी कड़ी में अपने चौंथे प्रेस कॉनफ्रेंस के दौरान उन्होंने देश में निवेश को बढ़ावा देने के लिए फास्ट ट्रैक इनवेस्टमेंट की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पूरे देश में अभी 3376 इंडस्ट्रियल पार्क और एसईजेड हैं जो लगभग पांच लाख हेक्टेयर में फैले हुए हैं। उन्होंने कहा देश में फैले सभी इंडस्ट्रियल पार्कों और एसईजेड की जीआईआईएस मैपिंग कराई जाएगी। इसके साथ ही फास्ट ट्रैक इनवेस्टमेंट की रेस में जो राज्य बेहतर करेगा उसकी रैंकिंग भी निर्धारित की जाएगी। निवेश को आकर्षित करने वाले चैंपियन सेक्टर को बढ़ावा दिया जाएगा और उसे आर्थिक सहायता भी की जाएगी। सरकार ने तो निवेश को आकर्षित करन के लिए अपने सेक्टरों का सेलेक्शन भी कर लिया है।

कोयले की कॉमर्शियल माइनिंग के लिए हरी झंडी

केंद्र सरकार ने कोयले की कमर्शियल माइनिंग को हरी झंडी दी है। इससे ज्यादा से ज्यादा कंपनियां आगे आ सकेंगी। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कोयला उत्‍पादक है, तो भारत को बाहर से आयात करने की क्यों जरूरत पड़ती है। इसलिए सरकार के एकाधिकार को समाप्त किया जा रहा है। इसके लिए इंफ्रास्‍ट्रक्चर तैयार करने के लिए 50 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसमें पात्रता की शर्तें सरल की जाएंगी। ज्यादा कंपनियां आएंगी तो प्रतिस्‍पर्धा भी बढ़ेगी। गैसिफिकेशन के लिए नए अलॉटमेंट किए जाएंगे, ताकि पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचे।

खनन से जुड़े कड़े नियम भी आसान किए जाएंगे

पहले एक कंपनी खनन करती थी, दूसरी कंपनी खनिजों को अलग-अलग करने का काम और तीसरी कंपनी उत्‍पादन का काम। इस सिस्‍टम को सरल किया जाएगा। एल्‍युमिनियम का उदाहरण ले लीजिए। अगर किसी को एल्‍युमिनियम के उत्‍पादन के लिए बॉक्‍साइट चाहिए तो उसे बॉक्‍साइट के ऑक्‍शन में जाना पड़ता था। उसके बाद अगर जब विद्युत की कमी पड़ती तो कोयला जुटाने की जद्दोजहद करनी पड़ती थी। पर्याप्‍त पावर सप्‍लाई नहीं मिलने पर सारा रॉ मटीरियल धरा रह जाता था और एल्‍युमिनियम का उत्‍पादन नहीं हो पाता था। इस वजह से निवेशक बीच में ही साथ छोड़ देते थे। अब माइनिंग से जुड़े नियमों को आसान बनाया जाएगा। अगर किसी के पास खनिज बच जाते हैं, तो वो उसे भी बेच सकेगा।

रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने का लक्ष्य

आत्मनिर्भर भारत के लिए रक्षा उत्‍पादन बड़ी भूमिका निभा सकता है। लिहाज़ा ऐसे उत्‍पाद या हथ‍ियार जो भारत में बनाये जा सकते हैं, उनकी सूची तैयार की जाएगी और उनके आयात पर प्रतिबंध रहेगा। कई हथियार जो हम यहां बना सकते हैं, या बना रहे हैं, उनको भी दूसरे देशों से खरीदा जाता रहा है। अब भारतीय उत्पादकों को प्राथमिकता दी जाएगी। सेना के साथ मिलकर यह सूची तैयार की जाएगी। ऑर्डनेंस फैक्‍ट्र‍ियों को कॉर्पोरेट का दर्जा दिया जाएगा, और उनको शेयर बाज़ार में सूचीबद्ध किया जाएगा, ताकि लोग उनमें निवेश कर सकें। रक्षा उत्‍पादन के क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा को 49 प्रतिशत से बढ़ा कर 74 प्रतिशत किया जाएगा।

पीपीई के तहत विश्वस्तरीय एयरपोर्ट का होगा विकास

विश्‍वस्तरीय एयरपोर्ट तैयार करने के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीई) के तहत एयरपोर्ट का विकास किया जा रहा है। 12 हवाई अड्डों पर पहले व दूसरे चरण में करीब 13 हजार करोड़ रुपए का निवेश आयेगा। रेवेन्‍यू की बात करें तो एएआई को 2300 करोड़ का डाउन पेमेंट मिलेगा। इसी कार्य को आगे बढ़ाने के लिए 6 नए हवाईअड्डों की नीलामी जल्‍द की जाएगी। सुरक्षा मानकों के चलते अभी तक भारत का 60 प्रतिशत एयर-स्‍पेस यानी हवाई क्षेत्र उड़ानों के लिए उपलब्‍ध है, जिसकी वजह से एक शहर से दूसरे शहर तक जाने में कई बार लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। इसकी वजह से ईंधन ज्यादा लगता है और पायलट को अधिक देर तक विमान उड़ाने पड़ते हैं। समय के साथ-साथ पैसा भी ज्यादा खर्च होता है। अब लोगों को गंतव्य तक सबसे छोटे रूट से पहुंचाया जाएगा। मिलिट्री विभाग के साथ समन्वय करके कॉमर्शियल फ्लाइट्स के लिए इसे सुलझा लिया जाएगा।

परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में होगी निजी क्षेत्र की सहभागिता

अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत अग्रणी भूमिका निभा रहा है। निजि क्षेत्र इसमें अपनी सहभागिता दर्ज करा सके, इसके नियमों को सरल किया जाएगा। एक विशेष नीति के साथ प्राइवेट कंपनियों को अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़ी सेवाओं, जैसे अंतरिक्ष लॉन्चिंग, सेटेलाइट, आदि, से जोड़ा जाएगा। कोविड 19 के दौरान हमने दुनिया भर में दवाईयां भेजीं। निजि क्षेत्र के साथ मिलकर मेडिकल आईसोटोप्‍स का उत्पादन किया जाएगा। इससे कैंसर के ट्रीटमेंट में सहायता मिलेगी। यह मानवता की सेवा को बल देगा। पीपीपी मोड में खाद्य संरक्षण केंद्र स्थापित किए जाएगे। जिससें इररेडिएशन तकनीक का इस्‍तेमाल किया जाएगा। इसमें भारत के स्‍टार्टअप को बढ़ावा दिया जाएगा।

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