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मोदी सरकार में पिछले 5 वर्षों में धान के 2.4 गुना और गेहूं के एमएसपी में 1.7 गुना बढ़ोतरी, पीएम मोदी ने कहा-राजनीतिक पार्टियां कर रही हैं दुष्प्रचार

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लोकसभा में कृषि सुधार से संबंधित दो विधेयकों के पारित होने के बाद कुछ राजनीतिक दल किसानों में भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं कि मोदी सरकार किसानों को दिए जाने वाले न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था को खत्म करने जा रही है। हालांकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने स्पष्ट किया कि सरकार एमएसपी और सरकारी खरीद की व्यवस्था को जारी रखेगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने बाकायदा ट्वीट कर बताया कि लोग किसानों को भड़काने में लगे हुए हैं। उन्होंने किसानों को आश्वस्त करते हुए लिखा, ” किसानों को भ्रमित करने में बहुत सारी शक्तियां लगी हुई हैं। मैं अपने किसान भाइयों और बहनों को आश्वस्त करता हूं कि न्यूनतम समर्थन मूल्य और सरकारी खरीद की व्यवस्था बनी रहेगी। यह विधेयक वास्तव में किसानों को कई और विकल्प प्रदान कर उन्हें सही मायने में सशक्त करने वाले हैं।”

ये सरासर झूठ है, गलत है, किसानों को धोखा है…

प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि जिस APMC एक्ट को लेकर अब ये लोग राजनीति कर रहे हैं, एग्रीकल्चर मार्केट के प्रावधानों में बदलाव का विरोध कर रहे हैं, उसी बदलाव की बात इन लोगों ने अपने घोषणापत्र में भी लिखी थी। लेकिन अब जब एनडीए सरकार ने ये बदलाव कर दिया है, तो ये लोग इसका विरोध करने पर उतर आए हैं। ये भी मनगढ़ंत बातें कही जा रही हैं कि किसानों से धान-गेहूं इत्यादि की खरीद सरकार द्वारा नहीं की जाएगी। ये सरासर झूठ है, गलत है, किसानों को धोखा है। हमारी सरकार किसानों को एमएसपी के माध्यम से उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकारी खरीद भी पहले की तरह जारी रहेगी।

झूठे दावे और हकीकत

कृषि विधेयक के संबंध में झूठ फैलाया जा रहा है कि कृषि बिल किसानों को एमएसपी के सुरक्षा जाल से बाहर निकालने की साजिश है। जबकि असलियत है कि कृषि बिल एमएसपी को बिल्कुल प्रभावित नहीं करने वाला है। एमएसपी प्रणाली जारी रहेगी। किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने में मदद के लिए ये एपीएमसी मार्केट यार्ड के बाहर अतिरिक्त व्यापारिक अवसर पैदा कर रहा है।

फसलों की लागत पर न्यूनतम समर्थन मूल्य 1.5 गुना

प्रधानमंत्री मोदी ने एमएसपी को लेकर जो प्रतिबद्धता जतायी है, वह उनके  पिछले पांच सालों के रिकॉर्ड से पता चलता है। प्रधानमंत्री मोदी 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने 2018 में किसानों को फसलों की लागत पर न्यूनतम समर्थन मूल्य 1.5 गुना या उससे ज्यादा बढ़ाने का फैसला किया। सामान्य समय (अच्छे मानसून) में या कीमतों में उतार-चढ़ाव और बाजार की अनिश्चितताओं के दौरान भी किसानों को मिलने वाली कीमत में बढ़ोतरी हुई है। 

एमएसपी : यूपीए और एनडीए सरकार की तुलना

कांग्रेस की यूपीए सरकार और प्रधानमंत्री मोदी की नेतृत्व वाली एनडीए सरकारों के आंकड़ों को खंगलाने से एक दूसरी ही तस्वीर उभर कर समाने आती है। जहां कांग्रेस की सरकारों ने एमएसपी को लेकर ढुलमूल रवैया अपनाया, वहीं मोदी सरकार ने एमएसपी के माध्यम से किसानों को बड़ी राहत दी। आंकड़े इसकी गवाही खुद दे रहे हैं। आप भी देखिए-

आंकड़ों के मुताबिक 2009-10 से 2013-14 की तुलना में मोदी सरकार के पिछले पांच वर्षों के दौरान धान के एमएसपी में 2.4 गुना बढ़ोतरी हुई है। पिछले पांच वर्षों में 4.9 लाख करोड़ रुपये का एमएसपी भुगतान किया गया है। 2009-10 से 2013-14 की तुलना में मोदी सरकार के पिछले पांच वर्षों के दौरान गेहूं के एमएसपी में 1.7 गुना की वृद्धि हुई है। 2009-10 से 2013-14 के दौरान 1.7 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले पिछले पांच वर्षों में लगभग 2.3 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।

2009-10 से 2013-14 की तुलना में खाद्य तेलों के एमएसपी में पिछले पांच वर्षों के दौरान 10 गुना बढ़ोतरी हुई है। 2009-10 से 2013-14 के दौरान एमएसपी के रूप में 2,460 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था, वहीं पिछले पांच सालों में 25,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। 

खरीफ फसल

•जहाँ 2013-14 में धान (सामान्य) पर महज 4.8 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई, वहीं 2018-19 में यह बढ़ कर 12.9 प्रतिशत हो गया।
•2013-14 में धान (ग्रेड A) पर 5.1 प्रतिशत बढ़ोतरी की तुलना में 2018-19 में 11.3 प्रतिशत वृद्धि हुई।
•ज्वार (हाइब्रिड) पर जहां 2013-14 में कोई वृद्धि (0 प्रतिशत) नहीं हुई, वहीं 2018-19 में 42.9 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की कई।
•ज्वार (मालदांडी) के संदर्भ में भी 2013-14 में शून्य बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो 2018-19 में बढ़कर 42.3 प्रतिशत हो गई।
•बाजरा और मक्का को लेकर जहां 2013-14 में शून्य बढ़ोतरी दर्ज की गई, 2018-19 में इन दोनों फसलों पर क्रमशः 36.9 एवं 19.3 प्रतिशत की वृद्धि रिकॉर्ड की गई।
•जहां 2013-14 में मूंग दाल और उड़द दाल को लेकर क्रमशः 2.3 और 0 प्रतिशत की वृद्धि हुई, वहीं 2018-19 में इन दोनों फसलों के लिए क्रमशः 25.1 व 3.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
•2013-14 में कपास (मध्यम स्टेपल) और कपास (लंबा स्टेपल) पर जहाँ सिर्फ 2.8 और 2.6 प्रतिशत की क्रमशः वृद्धि हुई, वहीं 2018-19 में ये बढ़ कर क्रमशः 28.1 एवं 26.2 प्रतिशत हो गई।

2013-14 2018-19
धान सामान्य 4.8 12.9
धान (ग्रेड A) 5.1 11.3
ज्वार (हाइब्रिड) 0 42.9
ज्वार (मालदांडी) 0 42.3
बाजरा 0 36.9
मक्का  0 19.3
मूंग दाल 2.3 25.1
उड़द दाल 0 3.7
कपास (मध्यम स्टेपल)  2.8  28.1
कपास (लंबा स्टेपल) 2.6 26.2

आंकड़े प्रतिशत में

रबी फसल
•2013-14 में गेहूँ पर जहाँ 3.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई, वहीं 2018-19 में यह बढ़ कर 6.1 प्रतिशत हो गया।
•चना पर 2013-14 में 3.3 प्रतिशत की वृद्धि के मुकाबले 2018-19 में 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
•मसूर दाल पर 2013-14 में सिर्फ 1.7 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई, 2018-19 में यह बढ़कर 5.3 प्रतिशत हो गया।
•दलहन की बात करें तो सरसो पर 2013-14 में 1.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई जो 2018-19 में बढ़कर 5 प्रतिशत हो गई।
•सूरजमुखी बीज पर 2013-14 में महज 7.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, वहीं 2018-19 में 20.6 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई।

2013-14 2018-19
गेहूं 3.7 6.1
चना 3.3 5
मसूर दाल 1.7 5.3
सरसो 1.7 5
सूरजमुखी बीज 7.1 20.6

  आंकड़े प्रतिशत में

कोरोना संकट में भी एमएसपी के भुगतान में बढ़ोतरी

कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के मुताबिक 8 अगस्त, 2020 तक गेहूं, धान, दलहन एवं तिलहन की एमएसपी के रूप में कुल 1,13,290 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जबकि पिछले वर्ष 86,805 करोड़ रुपये एमएसपी का भुगतान किया गया था। इस प्रकार, इस वर्ष 31 प्रतिशत ज्यादा एमएसपी का भुगतान किया गया।

रबी-2020 के सीजन की 8 अगस्त 2020 तक 3.9 करोड़ एमटी गेहूं की खरीद की गई, जिसके लिए किसानों को 75,000 करोड़ रुपये एमएसपी का भुगतान किया गया जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान 3.4 करोड़ एमटी गेहूं की खरीद एमएसपी पर 63,000 करोड़ रुपये में की गई थी। इसके अलावा 1.32 करोड़ एमटी धान की खरीद 24,000 करोड़ रुपयये का भुगतान करके की गई, जबकि पिछले वर्ष 0.86 करोड़ एमटी धान की खरीद 14,800 करोड़ रुपये के एमएसपी मूल्‍य में की गई थी।

किसानों को दलहन एवं तिलहन की खरीद के लिए पिछले वर्ष में किए गए एमएसपी भुगतान 8,715 करोड़ रुपये की तुलना में इस वर्ष कुल 14,120 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जिसमें 62 प्रतिशत की वृद्धि हुई हैं। खरीदे गए दलहन की मात्रा में ढ़ाई गुना वृद्धि हुई, जिसमें पिछले वर्ष रबी सीजन के 8.7 एलएमटी की तुलना में इस वर्ष लॉकडाउन के होने के बाद भी 21.55 एलएमटी खरीद की गई।

उपरोक्त आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि जहां कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के कार्यकाल में किसानों को सिर्फ सपने दिखाए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ नहीं हुआ। वहीं नरेन्द्र मोदी सरकार ने किसानों की स्थिति में आमूल-चूल बदलाव लाने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। 

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