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मेक इन इंडिया-आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देने के लिए जीईएम सामान पर निर्माता देश के बारे में जानकारी देना अनिवार्य

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने मेक इन इंडिया-आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देने के लिए गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) सामान पर निर्माता देश के बारे में जानकारी देना अनिवार्य कर दिया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार इससे देश में उत्पादित वस्तुओं की पहचान करने में मदद मिलेगी। 

इसके अतिरिक्त, जिन विक्रेताओं ने जीईएम पर इस नए फीचर के लागू होने से पहले ही अपने उत्पादों को अपलोड कर लिया है, उन्हें भी इसका पालन करना होगा।

जीईएम ने उत्पादों में स्थानीय कंटेंट की प्रतिशतता का संकेत देने के लिए भी एक प्रावधान किया है। इस नए फीचर के साथ, अब निर्माता देश और स्थानीय कंटेंट की प्रतिशतता सभी मदों के लिए मार्केटप्लेस में जगह हैं। अब पोर्टल पर ‘मेक इंन इंडिया‘ फिल्टर सक्षम बना दिया गया है। खरीदार केवल उन्हीं उत्पादों की खरीद कर सकता है जो कम से कम 50 प्रतिशत के स्थानीय कंटेंट के मानदंड को पूरी करते हैं।

जीईएम शुरुआत से ही मेक इंन इंडिया पहल को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहा है। मार्केटप्लेस ने मेक इंन इंडिया और सरकार की एमएसई खरीद में छोटे स्थानीय विक्रेताओं के प्रवेश को सुगम बनाया है। जीईएम कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ने के लिए तत्काल उत्पादों और सेवाओं की त्वरित, पारदर्शी और किफायती खरीद को सक्षम बना रहा है।

कोरोना संकट के दौर में मेक इन इंडिया का परचम
मेक इन इंडिया’ के बैनर तले पीपीई, मास्क और वेंटिलेटर के निर्माण में देश ने बड़ी छलांग लगाई है। पीपीई के निर्माण में फिलहाल भारत चीन के बाद दुनिया में दूसरे नंबर पर है। उम्मीद जतायी जा रही है कि चंद दिनों में देश पीपीई के निर्माण में दुनिया में पहले नंबर पर पहुंच जाएगा। मेक इन इंडिया के जरिए निर्माण को बढ़ावा देकर देश न सिर्फ अपनी जरूरतें पूरी कर रहा है, बल्कि कुछ समय बाद पीपीई के निर्यात में भी सक्षम हो जाएगा। फिलहाल नौ घरेलू निर्माताओं ने देश के भीतर 60,000 वेंटिलेटर की जरूरतों को पूरा किया है। पीपीई की बात करें तो 20 मिलियन पीपीई की जरूरत थी। इनमें 35 घरेलू निर्माताओं ने 13 मिलियन पीपीई की आपूर्ति कर दी।

कोरोना से लड़ने के लिए इनोवेशन और रिसर्च हब बना ‘मेक इन इंडिया’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ साल पहले देश को स्वावलंब बनाने के लिए मेक इन इंडिया का आइडिया दिया था। प्रधानमंत्री की सोच कितनी दूरदर्शी है इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि उनका ‘मेक इन इंडिया’ आज कोरोना वायरस के संक्रमण पर रोक लगाने के लिए दुनिया भर में अनुसंधान और इनोवेशन का हब बन गया है। कोरोना वायरस के इस दौर में भारत नए अनुसंधान का हब बन कर उभरा है, जिस पर पूरे विश्व की नजर है। कोविड19 से मुकाबले के लिए भारत अलग-अलग क्षेत्रों में कई अनुसंधान कर रहा है। जिसमें कम कीमत पर टेस्टिंग की नई तकनीक इजाद करने से लेकर सस्ते वेंटिलेटर तक शामिल हैं।

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