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चीन के पीछे हटने के बाद भी भारत सतर्क, कूटनीतिक घेरेबंदी के साथ ही ड्रैगन के हर कदम की व्यापक समीक्षा

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लेह दौरा, भारतीय सेना की तैयारी और कूटनीतिक घेरेबंदी ने चीन को अपने पैर पीछे खींचने पर मजबूर कर दिया। लेकिन चीन की धोखेबाजी वाली प्रवृति को देखते हुए भारत काफी सतर्कता बरत रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के नेतृत्व में चीन पर भारत के शीर्ष रणनीति ग्रुप ने बुधवार को समीक्षा बैठक की। इस बैठक के बाद सरकार के अगले कदमों के बारे में फैसला लिया गया। चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ अजीत डोभाल की दो घंटे की बातचीत के बाद चीनी सैनिकों द्वारा तीनों गतिरोध वाले जगहों से सैनिकों को वापस बुलाने के बाद यह उनकी पहली बैठक थी।

एलएसी पर चीनी सैनिकों की तैनाती का आकलन

इस बैठक में कैबिनेट सेक्रेटरी राजीव गौबा के साथ-साथ रक्षा, विदेश और गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे। इतना ही नहीं कुछ सीनियर मंत्री भी इस बैठक में शिरकत किए। इस दौरान वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के करीब पीएलए सैनिकों की तैनाती का भी आकलन किया गया। बैठक में इस बात पर कई बार चर्चा हुई कि चीनी सैनिकों को लद्दाख के 1597 किलोमीटर एलएसी के साथ-साथ अरुणाचल प्रदेश में 1126 किलोमीटर एलएसी के साथ सभी क्षेत्रों से वापस जाने की आवश्यकता है।

टकराव वाली जगहों से पीछे हटे चीनी सैनिक

सरकार और सैन्य अधिकारियों ने कहा कि चीनी सैनिक लद्दाख के गैलवान क्षेत्र में पैट्रोलिंग पॉइंट 14 (गलवान वैली), पैट्रोलिंग पॉइंट 15 (हॉट स्प्रिंग्स) और पैट्रोलिंग पॉइंट 17 (गोगरा) से वापस जा रहे हैं। गलवान घाटी या पैट्रोलिंग पॉइंट 14 पर ही 15 जून को हिंसक झड़प हुई थी। अब चीनी सैनिकों ने अपने टेंट को ध्वस्त कर दिया और लगभग 1.5 किमी पीछे हट गए।

जारी रहेगी चीन की कूटनीतिक घेरेबंदी 

भारत सीमा पर तनाव कम करने के लिए उठाए गए कदमों के साथ चीन की कूटनीतिक घेरेबंदी जारी रखेगा। व्यापार के मोर्चे पर चीन का दबदबा कम करने के लिए उठाए गए कदमों को भी आगे बढ़ाया जाएगा। रणनीतिक स्तर पर चीन के हर कदम की व्यापक समीक्षा के बाद जवाबी कदम उठाए जाएंगे।

कई देशों से भारत को मिला समर्थन

सूत्रों ने कहा कि कूटनीतिक स्तर पर बनाए गए दबाव के चलते ही चीन फिलहाल कदम पीछे खींचने को मजबूर हुआ है। अमेरिका, रूस, जापान, ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों से भारत को सीमा तनाव मुद्दे पर समर्थन मिला। इतना ही नहीं अमेरिका लगातार भारत से खुफिया सूचनाएं साझा कर रहा है।

चीन केंद्रित खुफिया सूचनाओं का नेटर्वक सक्रिय

चीन केंद्रित खुफिया सूचनाओं का नेटवर्क भी काम कर रहा है। इसके जरिये सीमा पर हर गतिविधि पर नजर बनाए रखने में देशों के बीच सहयोग भी बढ़ाया जाएगा। तनाव के बीच आसियान देशों की ओर से भी चीन की विस्तारवादी नीति के खिलाफ बयान सामने आया। कोविड पर पहले ही घिरे चीन के खिलाफ हांगकांग मुद्द पर कई देश मुखर हुए। भारत ने भी पहली बार हांगकांग के मसले पर खुलकर बयान दिया।

पीएम मोदी की लेह यात्रा के बाद तेजी से बदले हालात

जानकारों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी की लेह यात्रा के बाद स्थिति तेजी से बदली। चीन ने विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता की पेशकश की। कई राउंड बातचीत विभिन्न स्तरों पर पर्दे के पीछे हुई। तनाव कम करने के लिए दोनों देशों ने कदम उठाए हैं। लेकिन भारत का रुख काफी सतर्क है। भारत लगातार स्थिति पर नजर बनाए रखेगा और सहयोगी देशों से भी संपर्क भी बना रहेगा। कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि सीमा मुद्दे पर भारत को रणीतिक और कूटनीतिक बढ़त मिली है। कई देशों ने भारत के पक्ष को बेहतर तरीक से समझा है और भारत इस बढ़त को बनाए रखना चाहेगा।

सीमा पर 6 नए पुलों का हुआ उद्घाटन

उधर चीन और पाकिस्तान सीमा से सटे सड़कों और पुलों का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग से जम्मू में सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा बनाए गए 6 नए पुलों का उद्घाटन किया। ये 6 पुल लगभग 43 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए हैं।

सीमा पर गोलीबारी के बावजूद समय पर बने पुल

पश्चिमी क्षेत्र सहित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कई सीमावर्ती बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन करते हुए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ”मुझे यह कहते हुए गर्व महसूस हो रहा है कि इन पुलों का निर्माण दुश्मनों द्वारा निरंतर सीमा पर गोलीबारी के बावजूद समय पर पूरा कर लिया गया है।”

मार्च 2021 तक बन जाएंगे बाकी बचे पुल 

बीआरओ डायरेक्टर जनरल ले. जनरल हरपाल सिंह ने कहा, ”हम कुल 17 पुल बना रहे हैं, जिनमें से 6 तैयार हो गए हैं, 5 अगले महीने बन जाएंगे और अन्य सभी मार्च 2021 में पूरे हो जाएंगे। सभी पुल समय से पहले ही तैयार हो रहे हैं।”

रक्षा मंत्री ने की निर्माणाधीन परियोजनाओं की समीक्षा

पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच 5 मई को शुरू हुए गतिरोध के बाद भी सरकार ने सीमा सड़क संगठन से कहा था कि वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास स्थित क्षेत्र में अपनी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को जारी रखे। सिंह ने लद्दाख समेत सीमावर्ती क्षेत्रों में निर्माणाधीन परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करने के लिए मंगलवार को एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की थी।

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