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स्वच्छ भारत मिशन से हर परिवार को सालाना 53 हजार करोड़ रुपये का फायदा, डायरिया की बीमारी में आई कमी

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मोदी सरकार के स्वच्छ भारत मिशन ने देश के ग्रामीण क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव लाया है। गांवों में न केवल स्वच्छता को बढ़ावा मिल रहा है बल्कि परिवार को स्वास्थ्य लाभ के रूप में अच्छी-खासी बचत करने में भी योगदान मिल रहा है। इसकी पुष्टि एक अंतरराष्ट्रीय शोध से हुई है। शोध के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्र के प्रत्येक भारतीय परिवार को सालाना 53 हजार रुपये तक का फायदा हुआ। इसके चलते डायरिया से बीमार पड़ने की घटनाएं कम हुईं और शौच के लिए घर से बाहर जाने में लगने वाले समय की बचत हुई।

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के आर्थिक प्रभाव का पहली बार विश्लेषण अक्टूबर 2020 के साइंस डायरेक्ट जर्नल में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन में पता चला कि दस सालों में घरेलू खर्च पर जो रिटर्न है वह लगात का 1.7 गुना है, जबकि समाज को दस साल में कुल रिटर्न का 4.3 गुना है। इसमें बताया गया है कि योजना से गरीब लोगों को निवेश का 2.6 गुना फायदा हुआ है जबकि समाज को 5.7 गुनी धनराशि का।

इस सर्वे में 12 प्रदेशों के 10,051 ग्रामीण परिवारों को शामिल किया गया। यह सर्वे बीते 20 जुलाई से 11 अगस्त, 2017 के बीच हुआ। जिन राज्यों में यह सर्वे हुआ, उनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, आंध्र प्रदेश और असम शामिल हैं। खुले में शौच करने वाले लोगों में 90 प्रतिशत इन्हीं राज्यों के रहने वाले थे।

अध्ययन के अनुसार, ‘‘प्रति परिवार वित्तीय प्रतिबद्धता यानि निवेश औसतन 257 डॉलर (करीब 19,000 रुपये) है। जबकि सालाना परिचालन और रखरखाव खर्च 37 डॉलर (करीब 2,700 रुपये) है। वहीं चिकित्सा लागत के संदर्भ में 10 साल के लिए बचत 123 डॉलर सालाना (करीब 9,000 रुपये) है। इस हिसाब से वित्तीय रिटर्न 60 डॉलर (करीब 4,000 रुपये) सालाना बैठता है।

इसमें कहा गया है कि दो तिहाई से अधिक (69.5 प्रतिशत) परिवार को औसतन 183 डॉलर (13,000 रुपये से अधिक) की सब्सिडी मिली। इनमें से 63.8 प्रतिशत परिवारों ने सरकार की सब्सिडी के साथ अपना पैसा भी लगाया जो औसतन 154 डॉलर (11,000 रुपये से अधिक) लगाया। अध्ययन के अनुसार, ‘‘सालाना 727 डॉलर प्रति परिवार लाभ मुख्य रूप से अतिसार के प्रभाव में कमी (55 प्रतिशत) और स्वच्छता को लेकर यानि शौच के लिए बाहर जाने में लगने वाले समय की बचत (45 प्रतिशत) के संदर्भ में है।”

इसमें यह भी पाया गया कि घरों में स्वच्छता से संपत्ति का मूल्य भी 294 डॉलर (21,000 रुपये से अधिक) बढ़ा। अध्ययन के अनुसार स्वास्थ्य लाभ का कारण समय से पहले मृत्यु में कमी आने के रूप में है। मूल्य के हिसाब से इसका आकल 249 डॉलर (करीब 18,000 रुपये) आंका गया है। इसमें कहा गया है, ‘‘वित्तीय और गैर-वित्तीय निवेश प्रति परिवार औसतन 268 डॉलर (19,700 रुपये) जबकि सालाना परिचालन एवं रखरखाव खर्च 131 डॉलर (9,600 रुपये) है। जबकि आर्थिक लाभ 10 साल के लिये सालाना 727 डॉलर है…”

अध्ययन के अनुसार लोगों के घरों से बाहर शौच के लिये जाने में लगने वाला समय उल्लेखनीय रूप से कम हुआ है। इससे एक परिवार के सभी सदस्यों को समय बचत के कारण मूल्य के संदर्भ में औसतन 325 डॉलर (24,000 रुपये) सालाना का लाभ हुआ है।

महिलाओं के सुविधा, सुरक्षा और स्वाभिमान में बढ़ोतरी

मार्च 2020 में यूनिसेफ और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के प्रभाव का एक अध्ययन जारी किया।

  • अध्ययन से सामने आया कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू शौचालयों के निर्माण से महिलाओं के सुविधा, सुरक्षा और स्वाभिमान में बढ़ोतरी हुई है।
  • अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष है कि शौच करने के लिए खुले में न जाने से 93 प्रतिशत महिलाएं यौन हमले से सुरक्षित महसूस करती हैं।
  • 91 प्रतिशत महिलाएं अपने दिन के एक घंटे तक समय बचाती हैं, जो पहले शौच स्थलों पर जाने में लगाती थीं।
  • फरवरी 2020 में 5 राज्यों बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में 6,993 महिलाओं का सर्वेक्षण किया गया।
  • कई दूसरे अध्ययन के मुताबिक महिलाओं से छेड़छाड़, यौन हिंसा और बलात्कार की घटनाओं में कमी आई है।
  • स्वच्छ भारत मिशन के तहत सभी स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग से शौचालय का निर्माण किया गया है।
  • स्कूलों में शौचालयों के निर्माण से लड़कियों के ड्रॉप ऑउट में कमी आई है।

ग्रामीण स्वच्छता कवरेज 100 फीसदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत दो अक्टूबर, 2014 को की थी। तब उन्होंने अक्टूबर 2019 तक देश को खुले में शौच से मुक्त बनाने का वादा किया था। अभियान की वेबसाइट के मुताबिक दो अक्टूबर, 2019 को यह लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया है। देश शत प्रतिशत खुले में शौच से मुक्ति के लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल हो गया है। पिछेल छह सालों में ग्रामीण क्षेत्र के घरों में दस करोड़ से ज्यादा शौचालयों का निर्माण किया गया है। जब अभियान की शुरुआत हुई तो प्रधानमंत्री मोदी ने खुद हाथों में झाड़ू थामी थी तो पूरे देश ने हाथ में झाड़ू थाम लिया था। आज यह अभियान एक जन आंदोलन बन चुका है। देश में शौचालय का इस्तेमाल न करने वाले लोगों की संख्या में तेजी से कमी आ रही है। 

ग्लोबल गोलकीपर अवार्ड से पीएम मोदी सम्मानित 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को स्वच्छ भारत अभियान के लिए बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन की ओर से ‘ग्लोबल गोलकीपर अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार भारत में पचास करोड़ लोगों को स्वच्छ, स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार का प्रतीक है। प्रधानमंत्री मोदी ने पुरस्कार को 130 करोड़ भारतीयों को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि ये सम्मान उन भारतीयों को समर्पित है जिन्होंने स्वच्छ भारत मिशन को एक जनआंदोलन में बदला।

डब्ल्यूएचओ ने की स्वच्छ भारत अभियान की तारीफ
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान की तारीफ की है। ‘स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण)’ के स्वास्थ्य लाभों पर अपने अध्ययन में डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि इस कार्यक्रम से तीन लाख से अधिक लोगों की जिंदगियां बच सकती हैं। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक 2014 में स्वच्छ भारत मिशन शुरू होने से पहले स्वच्छता नहीं होने से हर साल डायरिया के 19.9 करोड़ मामले सामने आते थे। ये धीरे-धीरे घट रहे हैं। अध्ययन में पेयजल आपूर्ति, स्वच्छता सेवाओं, व्यक्तिगत स्वच्छता में सुधार का सबूत मिला जिसका सकारात्मक स्वास्थ्य प्रभाव रहा।

पीएम मोदी ने रखी शौचालय की नींव

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के सामने उस समय मिसाल पेश की, जब उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी के शहंशाहपुर गांव में अपने हाथों से पहली बार शौचालय की नींव रखी। इसके बाद पीएम मोदी ने कहा कि मैं जिस गांव में गया, वहां शौचालय में लिखा हुआ था- इज्जत घर। ये हमारी महिलाओं की इज्जत के लिए ही है। जो महिलाओं की इज्जत चाहेगा, वो शौचालय जरूर बनाएगा।

जब पीएम मोदी ने स्वयं उठाया झाड़ू

महात्मा गांधी के सपने को साकार करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर, 2014 को दिल्ली के मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन के पास स्वयं झाड़ू उठाकर स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की थी। फिर वो वाल्मिकी बस्ती पहुंचे और वहां भी साफ-सफाई की और कूड़ा उठाया। उन्होंने इस अभियान को जन आंदोलन बनाते हुए देश के लोगों को मंत्र दिया था, ‘ना गंदगी करेंगे, ना करने देंगे’।

पीएम ने स्वयं कुदाल उठाकर की सफाई

प्रधानमंत्री इस कार्य को और आगे बढ़ाते रहे, वो अपने निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी पहुंचे और वहां भी खुद आगे बढ़कर सफाई अभियान को गति देने का काम किया। पीएम मोदी ने काशी के अस्सी घाट पर गंगा के किनारे कुदाल से साफ-सफाई की। इस मौके पर भारी संख्या में स्थानीय लोगों ने स्वच्छ भारत अभियान में उनका साथ दिया।

हर वर्ग का मिल रहा है साथ

देश में एक से बढ़कर एक लोग इस अभियान से जुड़ते चले गए और स्वच्छ भारत अभियान एक राष्ट्रीय आंदोलन बनता चला गया। सरकारी अधिकारियों से लेकर, सीमा की रक्षा में जुटे वीर जवानों तक, बॉलीवुड कलाकारों से लेकर नामचीन खिलाड़ियों तक, बड़े-बड़े उद्योगपतियों से लेकर आध्यात्मिक गुरुओं तक, सभी इस पवित्र कार्य से जुड़ते चले गए। इसमें अमिताभ बच्चन, सचिन तेंदुलकर, सानिया मिर्जा, साइना नेहवाल और मैरी कॉम जैसी हस्तियों के योगदान बेहद सराहनीय हैं।

‘मन की बात’ में सराहना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ‘मन की बात’ में लगातार देश के विभिन्न व्यक्तियों और संगठनों के उन प्रयासों की सराहना की है, जिसने स्वच्छ भारत अभियान को व्यापक रूप से सफल बनाने में मदद की है।

 

 

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