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मोदी राज में किसानों की कमाई के बढ़े अवसर, प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के तहत किसानों की आय को दोगुनी करने का लक्ष्य

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसानों की आय दोगुनी करने के लिए खेती के अलावा कृषि से जुड़े अन्य क्षेत्रों के विकास पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले दिनों 10 सितंबर, 2020 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 20,050 करोड़ रुपये की लागत वाली प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना (PMMSY) का शुभारंभ किया। इस योजना का उद्देश्य मत्स्य उत्पादन और निर्यात में वृद्धि कर किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत सृजित करना है। 

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का शुभारंभ करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अगले 4-5 वर्षों में 20 हज़ार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए जाएंगे। फिलहाल 1700 करोड़ रुपये की लागत से इस योजना का काम शुरू हो रहा है। इसी के तहत ही बिहार के पटना, पूर्णियां, सीतामढ़ी, मधेपुरा, किशनगंज और समस्तीपुर में अनेक सुविधाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया है। इससे मछली उत्पादकों को नया इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा, आधुनिक उपकरण मिलेंगे, नया मार्केट भी मिलेगा। इससे खेती के साथ ही अन्य माध्यमों से भी कमाई का अवसर बढ़ेगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश में मछली से जुड़े व्यापार-कारोबार को देखने के लिए अब अलग से मंत्रालय भी बनाया गया है। इससे भी हमारे मछुआरे साथियों को, मछली के पालन और व्यापार से जुड़े साथियों को सुविधा हो रही है। उन्होंने कहा कि देश के हर हिस्से में विशेषतौर पर समंदर और नदी किनारे बसे क्षेत्रों में मछली के व्यापार-कारोबार को ध्यान में रखते हुए, पहली बार देश में इतनी बड़ी व्‍यापक योजना बनाई गई है। आजादी के बाद इस पर जितना निवेश हुआ, उनसे भी कई गुना ज्यादा निवेश प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना पर किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का लक्ष्य आने वाले 3-4 साल में मछली निर्यात को दोगुना करने का लक्ष्य है। इससे सिर्फ फिशरीज सेक्टर में ही रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे। आइए जानते हैं इस योजना के तहत और क्या-क्या लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं-

  • वर्ष 2024-25 तक मत्स्य उत्पादन में अतिरिक्त 70 लाख टन की वृद्धि करना,
  • वर्ष 2024-25 तक मत्स्य निर्यात से होने वाली आय को 1,00,000 करोड़ रुपये तक करना,
  • मछुआरों और मत्स्य किसानों की आय को दोगुनी करना,
  • पैदावार के बाद होने वाले नुकसान को 20-25 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करना,
  • मत्स्य पालन क्षेत्र और सहायक गतिविधियों में 55 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर पैदा करना।

इसके अलावा नीली क्रांति योजना की उपलब्धियों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से कई नए हस्तक्षेपों की परिकल्पना की गई है जिसमें मछली पकड़ने के जहाज़ों का बीमा, मछली पकड़ने वाले जहाज़ों/नावों के उन्नयन हेतु सहायता, बायो-टॉयलेट्स, लवण/क्षारीय क्षेत्रों में जलीय कृषि,मत्स्य पालन और जलीय कृषि स्टार्ट-अप्स, इन्क्यूबेटर्स, एक्वाटिक प्रयोगशालाओं के नेटवर्क और उनकी सुविधाओं का विस्तार, ई-ट्रेडिंग/विपणन, मत्स्य प्रबंधन योजना आदि शामिल है।

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