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किसानों की समृद्धि के लिए समर्पित पीएम मोदी, देश के डेयरी सेक्टर के विकास के लिए आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर दिया जोर

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसानों की आय दोगुनी करने के लिए कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया है। इस दिशा में पहल करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में 10 सितंबर, 2020 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ई-गोपाला मोबाइल एप का शुभारंभ किया। यह एप किसानों को पशुधन के लिए ई-मार्केटप्लस की सुविधा उपलब्ध कराता है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसके साथ ही बिहार के पूर्णिया में अत्याधुनिक सुविधाओं वाले वीर्य केंद्र का भी उद्घाटन किया।

इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज देश के 50 करोड़ से ज्यादा पशुधन को खुरपका और मुंहपका जैसी बीमारियों से मुक्त करने के लिए मुफ्त टीकाकरण अभियान चल रहा है। पशुओं को बेहतर चारे के लिए भी अलग-अलग योजनाओं के तहत प्रावधान किए गए हैं। देश में बेहतर देसी नस्लों के विकास के लिए मिशन गोकुल चल रहा है। एक वर्ष पहले ही देशव्यापी कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम शुरू किया गया था,जिसका एक चरण 10 सितंबर को पूरा हो चुका है।

आइए जानते हैं किस तरह गोपाला एप किसानों के प्रत्यक्ष उपयोग के लिए एक समग्र नस्ल सुधार, बाज़ार और सूचना पोर्टल के रूप में ई-प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराता है :

  • देश में पशुधन के सभी रूपों (वीर्य, भ्रूण, आदि) में रोग मुक्त जीवाणु (जर्मप्लाज़्म) को खरीदना और बेचना,
  • गुणवत्तापूर्ण प्रजनन सेवाओं की उपलब्धता (कृत्रिम गर्भाधान, पशु प्राथमिक चिकित्सा, टीकाकरण, उपचार आदि) और पशु पोषण के लिए किसानों का मार्गदर्शन करना,
  • उचित आयुर्वेदिक दवा/एथनो पशु चिकित्सा दवा का उपयोग करते हुए जानवरों का उपचार आदि की जानकारी देना,
  • पशुपालकों को अलर्ट भेजना (टीकाकरण, गर्भावस्था निदान आदि के लिए नियत तारीख पर)
  • किसानों को क्षेत्र में विभिन्न सरकारी योजनाओं और अभियानों के बारे में सूचित करना।

पूर्णिया में वीर्य केंद्र (सीमेन स्टेशन) की स्थापना

प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार के पूर्णिया में ‘राष्ट्रीय गोकुल मिशन’ के तहत अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त वीर्य केंद्र (सीमेन स्टेशन) का उद्घाटन किया। बिहार सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई 75 एकड़ भूमि पर 84.27 करोड़ रुपये के निवेश से यह केंद्र स्थापित किया गया है। यह सरकारी क्षेत्र के सबसे बड़े वीर्य केंद्रों में से एक है जिसकी उत्पादन क्षमता 50 लाख वीर्य नमूना प्रति वर्ष है। यह वीर्य केंद्र बिहार की स्वदेशी नस्लों के विकास एवं संरक्षण को भी नया आयाम देगा और इसके साथ ही पूर्वी एवं पूर्वोत्तर राज्यों की पशु वीर्य की मांग को पूरा करेगा।

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