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केंद्र में PM Modi के उदय के साथ ही कांग्रेस का सूरज लगातार अस्त, Congress-mukt Bharat का सपना हो रहा साकार, आठ साल में हुए 50 विधानसभा चुनाव में से 41 में कांग्रेस को दी मात

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के केंद्र की राजनीति के उदयीमान नक्षत्र बनने के साथ ही कांग्रेस पार्टी जनता के भरोसे और विश्वास के साथ-साथ जनाधार भी खो रही है। पीएम मोदी का कांग्रेस-मुक्त भारत का विजन देश में हर ओर तेजी से साकार हो रहा है। 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद से ही कांग्रेस का ग्राफ लगातार पतन की ओर है। पीएम मोदी के कुशल नेतृत्व और जन कल्याणकारी नीतियों के चलते लोकसभा-विधानसभा से लेकर नगर निकायों के चुनावों तक में कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ रही है। 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस महज 44 सीटें जीत पाई थी। उसके बाद से अब तक 8 साल में 50 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, इनमें 41 कांग्रेस ने बुरी तरह मात खाई है।  जनता के लिए अछूत बनती जा रही कांग्रेस, अव्वल तो चुनाव जीत ही नहीं पाती। यदि कभी जीतती भी है तो अकुशल नेतृत्व, गुटबाजी और बगावत के चलते कांग्रेस को सत्ता गंवानी पड़ी है। सोनिया-राहुल-प्रियंका की परिवारवादी तिकड़ी हो या अन्य विपक्षी नेता कोई भी पीएम मोदी की सर्वहितकारी, समावेशी और सर्वांगीण विकास की राजनीति के आगे ठहर नहीं पाया है।

पीएम मोदी ने अपने विजन और जन कल्याणकारी योजनाओं से दिया जीत का मंत्र
पीएम मोदी ने बीजेपी को जीत का मंत्र दे दिया है। सबका साथ-सबका विकास, सबका विश्वास-सबका प्रयास के इस मंत्र से पीएम मोदी ने कल्याणकारी योजनाओं का सैचुरेशन यानी शत-प्रतिशत कवरेज लक्ष्य हासिल करने की दिशा में कदम बढ़ाए और इससे कांग्रेस की तुष्टिकरण की राजनीति पूरी तरह भरभराकर बिखर गई। जनमानस पीएम मोदी और बीजेपी का मुरीद हुआ और कांग्रेस का जनाधार लगातार कम होता गया। पांच विधानसभाओं के पिछले चुनाव में पांच राज्यों की 680 सीटों में से कांग्रेस बमुश्किल 56 पर जीत सकी। उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में बीजेपी की शानदार वापसी हुई और पंजाब में कांग्रेस ने अपनी सरकार भी गंवा दी। बाकी चार राज्यों में कांग्रेस का वोट प्रतिशत शर्मनाक स्थिति तक पहुंच गया।

कांग्रेस-मुक्त भारत का विजन तेजी से हो रहा साकार, कांग्रेस अपने दम पर सिर्फ 2 राज्यों तक सिमटी
इसी के साथ अब कांग्रेस देश के कुछ राज्यों तक सिमट कर रह गई है। इनमें भी सिर्फ दो राज्य राजस्थान और छत्तीसगढ़ में ही उसकी पूर्ण बहुमत की सरकार और कांग्रेसी मुख्यमंत्री हैं। झारखंड और महाराष्ट्र में वो छोटे सहयोगी दल की भूमिका में है। कांग्रेस के लिए पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे इसलिए भी चिंताजनक हैं, क्योंकि इन राज्यों में ने 680 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन पार्टी के 82% प्रत्याशी चुनाव हार गए। पीएम मोदी और बीजेपी की डबल इंजन सरकारों की कल्याणकारी योजनाओं और समावेशी विकास की ऐसी आंधी चली कि कई कांग्रेस प्रत्याशियों की तो जमानत तक जब्त हो गई।मोदी के प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित होने के बाद से ही कांग्रेस का ग्राफ गिरने लगा
पीएम मोदी के प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित होने के बाद से ही जनता ने देश के विकास के लिए उनकी ओर देखना शुरू कर दिया था। 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद से ही कांग्रेस का ग्राफ गिरने लगा। नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता की आंधी के बीच 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस महज 44 सीटें जीत पाई थी। उसके बाद से अब तक 8 साल में 50 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। लेकिन कांग्रेस की हालत ऐसी है कि अव्वल तो वह जीत ही नहीं पा रही, यदि मुश्किल से कोई चुनाव जीत ले तो पार्टी की आंतरिक राजनीति, बगावत और गुटबाजी के चलते सत्ता तर गंवानी पड़ी। मध्य प्रदेश इसका बहुत बड़ा उदाहरण है। 2018 में कांग्रेस ने सरकार बनाई, लेकिन डेढ़ साल में ही ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस के कई विधायक बीजेपी में आ गए और कमलनाथ सरकार गिर गई। ऐसा ही कर्नाटक में भी हुआ और अरुणाचल में भी। राजस्थान में भी गहलोत वर्सेज पायलट की बगावत चरम पर है।

आइये, जानते हैं कि पीएम मोदी ने न सिर्फ कांग्रेस मुक्त भारत का विजन जनता के सामने रखा, बल्कि एक के बाद एक सीढ़ियां चढ़ते हुए इस विजन को कैसे साकार किया। इस विजन की शुरुआत 2014 से हुई….

पीएम मोदी का विजन पर आठ सालों में ऐसे होता गया कांग्रेस-मुक्त भारत
2014: कुल 8 चुनाव, कांग्रेस ने सिर्फ एक जीता, उसमें भी सत्ता संभाल नहीं पाए
गुजरात के सीएम के बाद पीएम मोदी इसी साल देश के प्रधानमंत्री बने। 2014 में 8 राज्यों के विधानसभा चुनाव हुए। इनमें हरियाणा, जम्मू कश्मीर, झारखंड, महाराष्ट्र, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम शामिल हैं। इन 8 राज्यों में से केवल अरुणाचल में कांग्रेस सरकार बना सकी. यहां की 60 में से 42 सीटों पर पार्टी ने जीत दर्ज की. लेकिन जुलाई 2016 में मुख्यमंत्री पेमा खांडू समेत 33 विधायक पार्टी की जन-विरोधी नीतियों से परेशान होक बीजेपी में आ गए और राज्य की सत्ता बीजेपी के पास आ गई।

2015: दो राज्यों में हुए चुनाव, दिल्ली में कांग्रेस का सूपड़ासाफ, बिहार में मिली सत्ता गंवा दी
अगले साल 2015 में बिहार और दिल्ली में विधानसभा चुनाव हुए। दिल्ली में तो कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया। 70 विधानसभा सीटों में से एक पर भी कांग्रेस नहीं जीत सकी। उसी साल बिहार में भी चुनाव हुए। कांग्रेस ने आरजेडी और जेडीयू के साथ गठबंधन कर 41 सीटों पर चुनाव लड़ा। इसमें किसी तरह 27 सीटें तो जीत लीं, लेकिन महागठबंधन की सरकार चलाने का सलीका नहीं आया। कांग्रेस की हठधर्मिता के चलते जुलाई 2017 में नीतीश कुमार की जेडीयू ने गठबंधन तोड़ दिया और बीजेपी के साथ मिलकर बिहार में सशक्त सरकार बना ली।2016: पांच राज्यों में चुनाव, सिर्फ एक में मिली जीत और सत्ता
2016 में असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव हुए। असम और केरल में कांग्रेस की सरकार थी। चुनाव हुए तो कांग्रेस के हाथ से असम और केरल निकल गया। केवल छोटे-से पुडुचेरी में कांग्रेस की जीत हुई और सरकार बनी।
2017 : सात राज्यों में चुनाव, पंजाब में मिली जीत
2017 में 7 राज्यों के विधानसभा चुनाव हुए. इनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर, गोवा, गुजरात और हिमाचल प्रदेश शामिल है। पीएम मोदी के कांग्रेस मुक्त भारत का असर हुआ और कांग्रेस ने हिमाचल और मणिपुर में सत्ता गंवा दी। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात में पीएम मोदी के नेतृत्व के चलते बीजेपी को शानदार जीत मिली। गोवा में कांग्रेस आपसी गुटबाजी के चलते सरकार ही नहीं बना पाई। सिर्फ पंजाब में कांग्रेस जीत सकी।2018 : इस साल हुए 9 चुनाव, कांग्रेस दो राज्यों में सत्ता हासिल करने के बाद संभाल नहीं पाई
2018 में मार्च में त्रिपुरा, नागालैंड, मिजोरम और मेघालय में चुनाव हुए। कांग्रेस एक भी राज्य में नहीं जीत सकी। इसके बाद मई में कर्नाटक में चुनाव हुए, जहां जनता दल (सेक्युलर) के साथ मिलकर सरकार बनाई। लेकिन बगावत के कारण सालभर में ही सरकार गिर गई और बीजेपी सत्ता में आ गई। दिसंबर में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और तेलंगाना में चुनाव हुए। तेलंगाना छोड़कर तीनों राज्यों में कांग्रेस की सरकार बनी, लेकिन मध्य प्रदेश में 13 महीने में ही बगावत के कारण कांग्रेस की सरकार गिर गई।

2019 : लोकप्रिय और प्रभावशाली नरेन्द्र मोदी को ज्यादा ताकत से दोबारा प्रधानमंत्री बनाया
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जन कल्याणकारी योजनाओं के चलते लोकप्रियता सातवें आसमान पर पहुंच गई। इसी साल लोकसभा के भी चुनाव हुए। देश की जनता ने उन्हें और ज्यादा ताकत देकर दोबारा प्रधानमंत्री बनाया। कांग्रेस 52 सीटें ही जीत सकी। लोकसभा के अलावा 7 राज्यों- आंध्र प्रदेश, अरुणाचल, हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र, ओडिशा और सिक्किम में विधानसभा चुनाव हुए। 7 में से 5 में कांग्रेस नहीं जीत सकी। झारखंड और महाराष्ट्र में कांग्रेस ने सरकार को समर्थन दिया। झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के साथ तो महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार में है।

2020 : इस साल हुए दोनों विधानसभा चुनावों में कांग्रेस बुरी तरह हारी
इस साल दिल्ली और बिहार में चुनाव हुए। लगातार दूसरी बार दिल्ली में कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सकी। हालात यह रहे कि 70 में से 63 सीटों पर तो कांग्रेस प्रत्याशियों की जमानत ही जब्त हो गई। बिहार में कांग्रेस ने आरजेडी के साथ गठबंधन किया, लेकिन ये गठबंधन भी बुरी तरह हार गया।

2021 : पांच में से चार राज्यों में जनता ने कांग्रेस को बुरी तरह नकारा
इस साल पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव हुए। चार राज्यों में कांग्रेस हार गई। बंगाल में तो पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली। पुडुचेरी में जहां कांग्रेस सत्ता में थी, वहां से भी हार गई। तमिलनाडु में कांग्रेस ने द्रमुक समेत कई पार्टियों के साथ मिलकर में चुनाव लड़ा और 25 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे, जिसमें से 18 जीतकर आए। तमिलनाडु में कांग्रेस सरकार में सहयोगी है।

2022 : पांच राज्यों में चुनाव पांचों में हारी कांग्रेस, चार में बीजेपी की डबल इंजन सरकारें
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में चल रहा बीजेपी का विजय रथ इस साल भी पूरी स्पीड के साथ दौड़ा। जनता ने प्रधानमंत्री के आह्वान पर डबल इंजन की सरकारों पर भारी बहुमत के साथ जिताया और बताया की पीएम मोदी के नेतृत्व में उसे पूरा विश्वास है। इस साल उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में विधानसभा चुनाव हुए। 1985 के बाद पहली बार था जब कांग्रेस यूपी की सभी सीटों पर उतरी, लेकिन मात्र 2 सीटें ही जीत सकी। उसके कई प्रत्याशी जमानत तक नहीं बचा पाए। बाकी सभी राज्यों में भी कांग्रेस की हालत बेहद खराब ही रही। पंजाब में कांग्रेस अपनी सत्ता नहीं बचा सकी और 18 सीटों पर आकर सिमट गई।

 

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