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देखिए कांग्रेस का महिला विरोधी बेशर्म चेहरा, राहुल गांधी पर लगे थे रेप के आरोप, पीड़िता सुकन्या को नहीं मिला इंसाफ

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जब कांग्रेस के पापों का घड़ा भर गया, तो 2014 और 2019 में देश की जनता ने कांग्रेस को इतनी बड़ी सजा दी, जिसे किसी ने उम्मीद नहीं की थी। जनता का विश्वास खोने के बाद कांग्रेस के नेता अभी भी बेहोशी की हालात में है। वे जनता के निर्वाचित प्रतिनिधि और लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करने से बाज नहीं आते हैं। जहां कांग्रेस के नेता महिला सुरक्षा के मामले में घड़ियाली आंसू बहाते हुए प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार पर निशाना साध रहे हैं, वहीं अमेठी के सुकन्या देवी रेप कांड से उनके दोहरे चरित्र का पता चलता है।

तो चलिए आपको बताते हैं सुकन्या देवी रेप कांड के बारे में जो कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी के महिला विरोधी चेहरे को उजागर करता है। दरअसल, सुकन्या देवी मामला उस आरोप से संबंधित है, जिसमें राहुल गांधी और उनके दोस्तों पर यूपी के एक स्थानीय कांग्रेस नेता की बेटी सुकन्या देवी के साथ 2006 में अमेठी में गैंगरेप करने का आरोप लगाया गया था। शुरू में इस आरोप को कई ब्लॉगर्स द्वारा उठाया गया था। उसमें कहा गया था कि कथित घटना को लेकर शिकायत करने के लिए सोनिया गांधी से मिलने के बाद लड़की और उसके माता-पिता गायब हो गए थे।

ऑपइंडिया के मुताबिक आरोपों में कहा गया कि सुकन्या, बलराम सिंह नामक कांग्रेस कार्यकर्ता की बेटी थी, और वह आरोपित राहुल गांधी की बहुत बड़ी प्रशंसक थी। आरोप लगाया गया कि जब राहुल गांधी अमेठी गेस्ट हाउस में अपने दोस्तों के साथ पार्टी कर रहे थे, तो वह उनसे मिलने के लिए वहां गई थीं, जहां आरोपित राहुल गांधी और उनके 7 दोस्तों ने उनका कथित तौर पर गैंगरेप किया, जिनमें से 2 ब्रिटेन के थे और 2 अन्य इटली के थे। 

पीड़िता सुकन्या किसी तरह इस घटना के बाद भाग निकली और कई लोगों से संपर्क किया लेकिन कोई भी मदद के लिए आगे नहीं आया। आरोपों में कहा गया कि सुकन्या देवी अपने पिता बलराम सिंह और मां सुमित्रा देवी के साथ सोनिया गाँधी और मानवाधिकार आयोग से मिलीं, मगर उसके बाद उसका पूरा परिवार लापता हो गया। आरोप यह भी था कि ध्रुपद नाम का वीडियोग्राफर और एक न्यूज चैनल का एक कैमरामैन, जिन्होंने सुकन्या का बयान रिकॉर्ड किया था, उसके बाद वो भी लापता हो गए। अमेठी के लोग इस पूरी घटना की चर्चा करते हैं, लेकिन सामने आने से डरते हैं कि कही उनको भी गायब ना करवा दिया जाए।

इस घटना के समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और राहुल गांधी अमेठी के सांसद थे। कांग्रेस प्रारंभ में इस घटना को मीडिया में दबाने में सफल रही। यह मामला उस स्तर तक नहीं पहुंच पाया, जिस स्तर पर पुलिस और सीबीआई जांच हो पाती। 2011 में यह मामला उस समय सूर्खियों में आया,जब सपा विधायक किशोर समरते ने इसे उठाया। समरीते ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में एक मामला भी दायर किया था, जिसमें कथित बलात्कार और सुकन्या के माता-पिता के गायब होने को लेकर जांच की मांग की गई थी। बाद में यह मामला राजनीति और कोर्ट के दांव-पेंच में फंस कर रह गया। 

गैंगरेप का यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, लेकिन सबूत के अभाव में आरोपी कानून के शिकंजे से निकल गए। सुप्रीम कोर्ट ने उल्लेख किया था कि “कोई भी साक्ष्य नहीं है” यह दिखाने के लिए कि कथित घटना 2006 में हुई थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सुकन्या देवी रेप कांड रहस्य बनकर रह गया और कांग्रेस राज में एक महिला को इंसाफ नहीं मिला। लेकिन उस समय उठे सवाल आज भी जवाब की तलाश में हैं। क्या यूपीए सरकार ने राहुल गांधी को बचाने में भूमिका अदा की? अगर कोई मामला नहीं था, तो सुकन्या के माता-पिता ने घर क्यों छोड़ा ? क्या सुकन्या के परिवार पर कांग्रेस की तरफ से दबाव बनाया गया था ? क्या आज भी सुकन्या देवी का बलात्कारी स्वतंत्र रूप से घूम रहा है? 

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