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उद्धव सरकार में जारी है साधु-संतों के खिलाफ हिंसा, महाराष्ट्र के नांदेड़ में साधु और सेवक की बेरहमी से हत्या

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महाराष्ट्र के पालघर में दो साधुओं की मॉब लिंचिंग के बाद उत्पन्न देशव्यापी आक्रोश अभी शांत भी नहीं हुआ था कि नांदेड़ में लिंगायत समाज के एक साधु और उनके सेवक की हत्या ने फिर आक्रोश को भड़का दिया है। साधु-संतों के खिलाफ हो रही ये घटनाएं साबित कर रही हैं कि उद्धव सरकार बनने के बाद अपराधियों के हौसले बुलंद है। वे हिन्दू साधु-संतों के खिलाफ एक मुहिम चला रहे हैं।
नांदेड़ के आश्रम में शनिवार देर रात रुद्र पशुपति महाराज और उनके सेवक की हत्या कर दी गई। बताया जाता है कि साधु का शव आश्रम में मिला, जबकि उनकी सेवा करने वाले सेवादार का शव आश्रम से कुछ दूर पर पड़ा मिला।  सुबह ज​ब शिष्यों ने उन्हें आश्रम में मृत देखा तो तुरंत पुलिस को सूचना दी।

हत्या करने का आरोप भी उसी समाज के एक शख्स पर लगा है। हत्यारोपी साईनाथ शनिवार रात दरवाजा खोलकर आश्रम में दाखिल हुआ। क्योंकि कहीं भी दरवाजा तोड़ने के निशान नहीं हैं। पशुपति महाराज की हत्या करने के बाद आरोपी साईनाथ साधु की लाश कार में रखकर बाहर निकलने की फिराक में था। लेकिन कार गेट में फंस गई। इस दौरान छत पर सो रहे आश्रम के दो सेवादार जाग गए। उन्हें जब तक सारी बात समझ में आती आरोपी भागने लगा। जिसके बाद सेवादारों ने आरोपी का पीछा किया। लेकिन वह भाग निकला।
पशुपति महाराज के सेवक भगवान राम शिंदे भी लिंगायत समाज से है। उसकी हत्या साईनाथ ने की या किसी और ने, पशुपति महाराज की हत्या से पहले या बाद में, तमाम सवालों पर पुलिस फिलहाल जांच कर रही है। पशुपति महाराज इस मठ में 2008 से रह रहे थे। इस मठ को निर्वामी मठ के नाम से जाना जाता है।
उद्धव सरकार किस हद तक हिंदू विरोधी है, आइए देखते हैं

महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी के समर्थन से बनी उद्धव राज में हिंदू सुरक्षित नहीं हैं। महाराष्ट्र में सरकार बदलते ही हिन्दू विरोधियों के हौसले बुलंद हो गए हैं। उन्हें ना तो कानून का डर है ना पुलिस का। राज्य में हिन्दुओं पर लगातार हमले हो रहे हैं, लेकिन कुर्सी बचाने के चक्कर में उद्धव ठाकरे की सरकार तुष्टिकरण में जुटी हुई है। पालघर में जिस तरह पुलिस की मौजूदगी में दो साधुओं और उनके ड्राइवर की मॉब लिंचिंग की गई है, उससे राज्य के हिंदुओं में दहशत का माहौल है।

पालघर में साधुओं की मॉब लिंचिग: 16 अप्रैल
पालघर में पुलिस के सामने जूना अखाड़ा के दो साधुओं कल्पवृक्ष गिरि महाराज और सुशील गिरी महाराज को पीट-पीटकर मार दिया गया। जूना अखाड़े के दोनों साधु अपने ड्राइवर के साथ मुंबई से गुजरात के सूरत में अपने साथी गुरुभाई के अंतिम संस्कार के लिए जा रहे थे। दोनो साधुओं को ही उनका अंतिम संस्कार करना था, लेकिन जब इनकी गाड़ी महाराष्ट्र-गुजरात बॉर्डर के पास पालघर इलाके में पहुंची तो पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इसके कुछ देर बाद आदिवासी बहुल इस इलाके में एक खास समुदाय के सैकड़ों लोगों की भीड़ ने लाठी-डंडे और इंट-पत्थरों से इनपर हमला कर दिया। हैरानी की बात यह है कि महाराष्ट्र पुलिस मूकदर्शक बन सारा तमाशा देखती रही। साधु पुलिस के सामने गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन पुलिसवालों ने उन्हें भीड़ के हवाले कर दिया।

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