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रॉबर्ट वाड्रा : भारत का अरबपति कारोबारी, 2007-12 के दौरान 1 लाख से बनाए 325 करोड़ रुपये, 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का मालिक

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काग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति के मालिक हैं। उन्होंने कब और कहां से इतनी संपत्ति हासिल की, यह जानना काफी दिलचस्प और हैरान करने वाला है। उनकी संपत्ति बढ़ने की रफ्तार देखकर बड़े-बड़े उद्योगपति भी दांतों तले अंगूली दबा लेते हैं। सेलिब्रेटी नेटवर्थ और अन्य वेबसाइटों से प्राप्त आंकड़ों से पता चलता है कि यह अकूत संपत्ति उन्होंने प्रियंका गांधी से शादी के बाद हासिल की है।

‘आम’ से ‘खास’ बने वाड्रा

अरबों की संपत्ति हासिल करने के लिए रॉबर्ट वाड्रा ने कहीं न कहीं देश की शीर्ष राजनीतिज्ञ सोनिया गांधी के रुतबे का इस्तेमाल किया। रॉबर्ट वाड्रा और प्रियंका गांधी ने 18 फरवरी, 1997 को शादी कर ली। इसके बाद ‘आम’ से ‘खास’ बने वाड्रा 12 कंपनियों में बतौर डायरेक्टर, एडिशनल डायरेक्टर या मैनेजिंग डायरेक्टर बन गए। रियल सेक्टर से लेकर फॉर्मा सेक्टर और हॉस्पिटल के क्षेत्र में भी कदम रखा है। शुरुआत में उनकी कंपनियों के पास आय का एकमात्र वैध स्रोत था डीएलएफ द्वारा मिला ब्याज मुक्त कर्ज। उसके बाद उनकी संपत्ति में लगातार बढ़ोतरी होती आ रही है।

1 लाख रुपये की रकम से शुरू की कंपनी

2004 में जब सोनिया गांधी के नेतृत्व में यूपीए सत्ता में आई, उस समय सोनिया के दामाद रॉबर्ट वाड्रा सस्ते गहनों के एक्सपोर्ट का छोटा बिजनस करते थे। 2007 में वाड्रा रियल एस्टेट के क्षेत्र में उतरे और स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लि. के नाम से एक कंपनी बनाई। मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के मुताबिक इस कंपनी को वाड्रा ने 2000 डॉलर से भी कम यानि करीब एक लाख रुपये की रकम से शुरू किया था।

वाड्रा ने 2008 में गुडगांव की कंपनी ने 7.5 करोड़ रुपये में साढ़े 3 एकड़ जमीन खरीदीं। जिसके बाद 18 दिनों में जमीन का राज्य सरकार ने लैंडयूज बदला दिया। 58 करोड़ रुपये में डीएलएफ ने रॉबर्ट वाड्रा से प्रॉपर्टी खरीदीं। डीएलएफ के साथ स्काईलाइट कंपनी ने दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान में भी कई डील की। 2009-2012 में स्काईलाईट ने राजस्थान में 2 हजार एकड़ जमीनें खरीदी और कई गुना ज्यादा दाम में बेची दीं। 

5 सालों में 1 लाख से बनाए 325 करोड़ रुपये

अप्रैल 2014 में प्रतिष्ठित अमेरिकी अखबार ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें प्रॉपर्टी के जानकारों से बातचीत, वाड्रा की कंपनियों की फाइलिंग और जमीन के दस्तावेजों के आधार पर वाड्रा की संपत्ति का आकलन किया गया था। वेबसाइट में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार वाड्रा ने 2007 में एक लाख रुपये से शुरू की गई कंपनी से 2012 में 12 मिलियन डॉलर यानि करीब 72 करोड़ रुपये से ज्यादा की प्रॉपर्टी बेची।

रिपोर्ट में दावा किया गया कि वाड्रा के पास उस समय 42 मिलियन डॉलर यानि 253 करोड़ रुपये से ज्यादा की रियल एस्टेट प्रॉपर्टी बची हुई थी। रिपोर्ट के दावों को मानें तो रॉबर्ट वाड्रा ने महज एक लाख रुपये की लागत से खड़ी की गई कंपनी से पांच साल के भीतर 325 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति बनाई।

7 सालों में आम बिजनसमैन से रियल एस्टेट का बड़ा नाम

2007 -14 के बीच केंद्र में मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए की सरकार थी। वेबसाइट के मुताबिक वाड्रा के पास रियल एस्टेट कारोबार का कोई खास तजुर्बा भी नहीं था। फिर भी इन सात सालों में वाड्रा एक आम बिजनसमैन से रियल एस्टेट का बड़ा नाम बन गए। वेबसाइट की मानें तो वाड्रा और गांधी परिवार के लिए महेश नागर नामक व्यक्ति जमीनों के सौदे कराता था। महेश नागर राजस्थान का रहने वाला है और गांधी परिवार से उसके गहरे संबंध हैं।

13 सालों में 15 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक

2007 से 2019 तक के आंकड़ों के मुताबिक रॉबर्ट वाड्रा ने 13 सालों में  15 हजार करोड़ रुपये से अधिक (15,030,750,0000 रुपये) की संपत्ति अर्जित की थी। फिलहाल रॉबर्ट वाड्रा रियल एस्टेट, फार्मा के साथ कई अन्य सेक्टरों में कारोबार कर रहे हैं। हालांकि, उनकी कमाई का अधिकांश हिस्सा रियल एस्टेट सेक्टर से आता है।रॉबर्ट वाड्रा ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान समेत कई राज्यों में प्रॉपर्टी डील की हैं। मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में पूछताछ के दौरान वाड्रा की लंदन स्थित 19 लाख पाउंड की ब्रायंस्टन स्क्वायर की संपत्ति भी सामने आई है। ईडी ने इस मामले में वाड्रा के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत मामला दर्ज किया। फिलहाल वाड्रा इस मामले में जमानत पर चल रहे हैं।

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