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पीएम मोदी के विजन से अंतरिक्ष में लंबी छलांग लगाएगा भारत, ISRO सबसे भारी रॉकेट से 36 सेटेलाइट को लॉन्च करेगा

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भारत स्पेस के क्षेत्र में लंबी छलांग लगाने के लिए पूरी तरह से तैयार है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार इस बात की कोशिश कर रही है कि भारत तेजी से बढ़ती स्पेस इंडस्ट्री का फायदा उठाने के लिए अपनी पूरी क्षमता के साथ काम करे। इसी नीति पर आगे बढ़ते हुए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का सबसे भारी रॉकेट ‘एलवीएम-3′ एक साथ 36 सेटेलाइट के लॉन्च के लिए तैयार है। यह लॉन्च आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से किया जाएगा। एलवीएम-3 के जरिये ब्रिटिश स्टार्टअप वनवेब के 36 सेटेलाइट को एक साथ लॉन्च किया जाएगा। इस लॉन्च के साथ एलवीएम-3 दुनिया के कमर्शियल सेटेलाइट लॉन्च बाजार में कदम रखेगा। एलवीएम-3 को पहले ‘जीएसएलवी एमके-3’ नाम से जाना जाता था। ‘एलवीएम-3-एम2/वनवेब इंडिया-1 मिशन’ का लॉन्च 23 अक्टूबर को भारतीय समयानुसार 12 बजकर 7 मिनट पर किया जाएगा।

ग्लोबल कमर्शियल सैटेलाइट लांच मार्केट में कदम रखेगा भारत

इसरो द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, अंतरिक्ष विभाग और अंतरिक्ष एजेंसी की कमर्शियल ब्रांच के तहत काम करने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के केंद्रीय उद्यम (सीपीएसई) न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) ने ब्रिटेन स्थित नेटवर्क एक्सेस एसोसिएट्स के साथ दो लॉन्च सेवा अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए थे। इन अनुबंधों के तहत एलवीएम-3 रॉकेट के जरिये वनवेब के निचली कक्षा के ब्रॉडबैंड संचार सेटेलाइट का प्रक्षेपण किया जाना था। इसरो ने कहा कि यह मांग के आधार पर एनएसआईएल के जरिये पहला एलवीएम-3 समर्पित कमर्शियल प्रक्षेपण है। अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा, वनवेब के साथ हुआ यह करार एनएसआईएल और इसरो के लिए मील का पत्थर है, क्योंकि इसके जरिये एलवीएम-3 रॉकेट वैश्विक कमर्शियल सेटेलाइट लॉन्च बाजार में कदम रखने जा रहा है।

क्या है एलवीएम-3

एलवीएम-3 तीन चरणों वाला लॉन्च वाहन है, जिसमें दो ठोस मोटर स्ट्रैप-ऑन, एक तरल प्रणोदक चरण और एक क्रायोजेनिक चरण शामिल है। यह रॉकेट चार टन भार वर्ग के सेटेलाइट को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (जीटीओ) में प्रक्षेपित करने में सक्षम है। भारत की भारती एंटरप्राइजेज वनवेब में एक प्रमुख निवेशक और शेयरधारक है।

देश का स्पेस सेक्टर 130 करोड़ देशवासियों की प्रगति का माध्यमः पीएम मोदी

पीएम मोदी ने पिछले साल इंडियन स्पेस एसोसिएशन (ISpA) का शुभारंभ किया था। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा है कि देश को इनोवेशन सेंटर बनाने के लिए सरकार पूरी कोशिश कर रही है और इसके लिए प्राइवेट सेक्टर का योगदान बेहद अहम है, ‘पहले Space Sector का मतलब होता था- सरकार! लेकिन हमने इस Mindset को बदला और फिर इस सेक्टर में इनोवेशन के लिए सरकार, स्टार्टअप, आपस में सहयोग और स्पेस का मंत्र दिया। आज ISRO की Facilities को प्राइवेट सेक्टर के लिए Open किया जा रहा है।’ इंडियन स्पेस एसोसिएशन यानि ISpA की वर्चुअली शुरूआत करते हुए पीएम मोदी ने कहा है कि देश का स्पेस सेक्टर 130 करोड़ देशवासियों की प्रगति का एक बड़ा माध्यम है। गरीबों के घरों, सड़कों और दूसरे इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में सैटेलाइट से ट्रैकिंग हो या नाविक टेक्नोलॉजी, गवर्नेंस को पारदर्शी बनाने में ये बहुत मददगार साबित हो रही हैं। पीएम मोदी ने एयर इंडिया से जुड़े फैसले का उदाहरण देते हुए कहा कि ‘Public Sector Enterprises को लेकर सरकार एक स्पष्ट नीति के साथ आगे बढ़ रही है।

देश की कई दिग्गज कंपनियों के सहयोग से बना है ISpA

ISpA के संस्थापक सदस्यों में लार्सन एंड टुब्रो, ग्रुप का नेल्को, वनवेब, भारती एयरटेल, मैपमायइंडिया, वालचंदनागर इंडस्ट्री, अनंत टेक्नॉलजी लिमिटेड जैसी निजी क्षेत्र की कंपनियां शामिल हैं। गोदरेज, अजिस्टा-बीएसटी एरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड, BEL, सेंटम इलेक्ट्रानिक्स एंड मैक्सर इंडिया ने भी ISpA को बनाने में पूरा सहयोग दिया है।

इनोवेशन पर मोदी सरकार का जोर

मोदी सरकार ISRO जैसे संस्थानों में जो सुविधाएं मौजूद हैं, उन्हें प्राइवेट सेक्टर के लिए खोलने का मन बना चुकी है। ताकि इस क्षेत्र में आने वाले युवा कारोबारियों को मशीनों की खरीद के लिए अधिक संसाधन खर्च ना करने पड़ें और उनका सारा फोकस इनोवेशन पर हो। मोदी सरकार इस बात को भली-भांति समझती है कि स्पेस सेक्टर के विकास से आम लोगों की जिंदगी में तेजी से बदलाव लाए जा सकते हैं। बेहतर मैपिंग, इमेजिंग और कवेक्टिविटी की सुविधा से किसानों और मछुआरों को मौसम की बेहतर जानकारी मिल सकती है, सामनों की शिपमेंट और डिलीवरी में तेजी आ सकती है। पर्यावरण की बेहतर सुरक्षा हो सकती है। साथ ही आपदा की पहले जानकारी मिलने से लाखों लोगों की जिंदगी के खतरे में पड़ने से बचाया जा सकता है। पीएम मोदी ने उम्मीद जताई की देश के इन्हीं लक्ष्यों के लिए इंडियन स्पेस एसोसिएशन भी काम करेगा।

अंतरिक्ष क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधारों की शुरुआत

सरकार ने नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर के गठन का फैसला किया है। आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देने के लिए इसमें निजी क्षेत्र को मंजूरी दी गई है। इससे उद्योग जगत न केवल अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भागीदारी निभाएगा, बल्कि हमारी स्पेस टेक्नोलॉजी को भी नई ऊर्जा मिलेगी। यह निर्णय भारत को बदलने तथा देश को आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से आधुनिक बनाने के प्रधानमंत्री के दीर्घकालिक दृष्टिकोण के अनुरूप है। इससे न केवल इस क्षेत्र में तेजी आएगी बल्कि भारतीय उद्योग विश्व की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेगा। इसके साथ ही प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बड़े पैमान पर रोजगार की संभावनाएं हैं और भारत एक ग्लोबल टेक्नोलॉजी पावरहाउस बन रहा है।

इंसान को अंतरिक्ष में भेजने वाला चौथा देश बनेगा भारत

भारतीय स्पेस प्रोग्राम को नई ताकत देते हुए मोदी सरकार ने साल 2022 तक तीन भारतीयों को अंतरिक्ष भेजने के लिए दस हजार करोड़ रुपये के गगनयान मिशन को मंजूरी दी है। इस गगनयान प्रोजेक्ट के सफल होने पर भारत इंसान को अंतरिक्ष भेजने वाला चौथा देश बन जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने लालकिले की प्राचीर से दिए अपने भाषण में घोषणा की थी कि 2022 में देश की किसी बेटी या बेटे को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। गगनयान के तहत तीन लोग कम से कम सात दिन तक अंतरिक्ष में रहेंगे। गगनयान के लिए जीएसएलवी एमके-3 का इस्तेमाल किया जाएगा। इसरो ने मानव रहित अंतरिक्ष विमान के लिए आवश्यक प्रौद्योगिकी संपन्न क्रू स्केप सिस्टम का परीक्षण भी कर लिया है। इसरो विभिन्न राष्ट्रीय एजेंसियों, प्रयोगशालाओं, शिक्षा संस्थानों और उद्योग क्षेत्र के साथ व्यापक सहयोग करके गगनयान कार्यक्रम के उद्देश्यों को सार्थक बनाएगा।

मोदी सरकार में भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की जितनी प्रगति हुई है, उतनी पहले कभी नहीं हुई। एक नजर डालते हैं इसरो की कुछ अहम उपलब्धियों पर-

रीसैट-2बीआर1 के साथ चार देशों के 9 और सैटेलाइट लॉन्च

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में भारत ने अंतरिक्ष में एक कामयाब उड़ान भरी। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन- इसरो ने 11 दिसंबर,2019 को 3:25 बजे भारतीय उपग्रह रीसैट-2बीआर1 के साथ चार देशों के 9 सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजे। यह प्रक्षेपण पीएसएलवी-सी48 रॉकेट के जरिए आंध्र प्रदेश स्थित श्रीहरिकोटा से किया गया। यह पीएसएलवी की 50वीं उड़ान और श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया जाने वाला 75वां रॉकेट है। रीसैट-2बीआर1 रडार इमेजिंग अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है। यह बादलों और अंधेरे में भी साफ तस्वीरें ले सकता है। यह 35 सेंटीमीटर की दूरी पर स्थित दो चीजों की अलग-अलग और साफ पहचान कर सकता है। यह उपग्रह सीमा की सुरक्षा के लिहाज से बेहद खास है। इससे भारत की राडार इमेजिंग ताकत कई गुना बढ़ जाएगी। इसकी मदद से सीमा की निगरानी और सुरक्षा काफी आसान हो जाएगी। भारत के साथ जापान, इटली, इजराइल का एक-एक और अमेरिका के छह सैटेलाइट लॉन्च किए गए। भारत के लिए गर्व की बात है कि इसरो ने अब तक 319 विदेशी उपग्रहों को कक्षा में स्थापित किए हैं।

जासूसी उपग्रह कार्टोसेट-3 सहित 13 अमेरिकी सैटेलाइट लॉन्च

इसके पहले 27 नवंबर 2019 को पीएसएलवी-सी47 के जरिए कार्टोसैट-3 और अमेरिका के 13 नैनो सैटेलाइट एक साथ अंतरिक्ष में भेजे गए। कार्टोसैट-3 एक सैन्य जासूसी उपग्रह है। यह सबसे ताकतवर कैमरे वाला उपग्रह है। कार्टोसैट-3 का इस्तेमाल देश की सीमाओं की निगरानी के लिए होगा। यह प्राकृतिक आपदाओं में भी मदद करेगा। कार्टोसैट उपग्रह से किसी भी मौसम में धरती की तस्वीरें ली जा सकती हैं। इसके जरिए आसमान से दिन और रात दोनों समय जमीन से एक फीट की ऊंचाई तक की साफ तस्वीरें ली जा सकती हैं।

जासूसी सैटेलाइट RISAT-2B लॉन्च

भारत ने 22 मई 2019 को स्पाई सैटेलाइट RISAT-2B को लॉन्च किया। पीएसएलवी सी46 ने RISAT-2B को पृथ्वी की निचली कक्षा सफल तौर पर स्थापित किया गया। यह सैटेलाइट खुफिया निगरानी, कृषि, वन और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में काम आएगा। इसके जरिए अंतरिक्ष से जमीन पर 3 फीट की ऊंचाई तक की बेहतरीन तस्वीरें ली जा सकती हैं। यह दिन के साथ रात में भी साफ तस्वीरें लेने और सभी मौसमों में काम करने वाला है। यह धरती पर हो रही छोटी-छोटी गतिविधियों की सटीक स्थिति दिखा पाने में सक्षम है। इससे दुश्मनों पर नजर रखने में मदद मिलेगी।

सैन्य उपग्रह एमीसेट सफलतापूर्वक लॉन्च

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन- इसरो ने 1 अप्रैल, 2019 को पीएसएलवी- सी 45 का सफल प्रक्षेपण किया। इसके साथ EMISAT और अन्य विदेशी नैनो उपग्रहों को अंतरिक्ष में छोड़ा गया। पहली बार इसरो का मिशन एक साथ तीन कक्षाओं के लिए भेजा गया। एमिसैट का वजन 436 किलोग्राम है। यह डीआरडीओ का इलैक्ट्रॉनिक इंटेलीजेंस सैटेलाइट है। इससे दुश्मन देशों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी। एमिसैट से दुश्मन के राडार और सेंसर्स पर निगरानी रखने में मदद मिलेगी।इसके साथ 28 सैटलाइट को भी लॉन्च किया गया। इन 28 में 24 अमेरिकी सैटेलाइट शामिल हैं।

स्पेस में सैटेलाइट मार गिराने वाला महाशक्ति बना भारत

भारत अंतरिक्ष में लाइव सैटेलाइट को मार गिराने की क्षमता रखने वाला चौथा देश बन गया है। इससे पहले यह क्षमता अमेरिका, रूस और चीन के ही पास थी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने आज अपना नाम अंतरिक्ष महाशक्ति के नाम पर दर्ज करा दिया है। हमने अंतरिक्ष में उपग्रह को मार गिराने की क्षमता हासिल कर ली है। हमारे वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में 300 किमी दूर LEO (Low Earth Orbit ) में एक लाइव सैटेलाइट को मार गिराया है जो कि एक पूर्व निर्धारित लक्ष्य था। 3 मिनट में ही सफलतापूर्वक ये ऑपरेशन पूरा किया गया है। इसे 27 मार्च 2019 को अंजाम दिया गया।

संचार उपग्रह जी सैट-31 सफलतापूर्वक लॉन्च

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन- इसरो ने 6 फरवरी, 2019 को फ्रेंच ग्‍याना के अंतरिक्ष स्‍थल से 40वां संचार उपग्रह जीसैट-31 का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। जीसैट-31 उपग्रह का वजन दो हजार पांच सौ 36 किलोग्राम है। यह भारत का 40वां संचार उपग्रह है। इस तरह के 11 उपग्रह पहले से ही अंतरिक्ष में देश की संचार सेवाओं के लिए काम कर रहे हैं। इस उपग्रह के काम करने की अवधि 15 साल होगी और यह कक्षा में स्थित उपग्रहों में से कुछ को अपना काम जारी रखने की सुविधा उपलब्‍ध कराएगा। साथ ही यह भू स्थिर कक्षा में केयू बैंड ट्रांसपोंडर क्षमता को भी बढ़ावा देगा। इसरो प्रमुख डॉक्टर सिवन ने बताया कि उच्च शक्ति के इस संचार उपग्रह से डीटीएच टेलीविजन के लिए ट्रांसपॉन्डर क्षमता मिलेगी और एटीएम, शेयर बाजार, ई-प्रशासन और दूरसंचार से जुड़ी अन्य सेवाओं के विस्तार में मदद मिलेगी।

पीएसएलवी सी-44 का किया सफल प्रक्षेपण

इसरो ने 24 जनवरी, 2019 को श्रीहरिकोटा से कलामसैट और इमेजिंग उपग्रह माइक्रोसैट-आर को अंतरिक्ष में ले जाने वाले पीएसएलवी सी-44 का सफल प्रक्षेपण किया। इस अंतरिक्ष अभियान की खास बात पीएसएलवी के नए रूप की उड़ान है। कलामसैट को विधार्थियों ने और चेन्‍नई स्थित स्‍पेस किड्स इंडिया ने तैयार किया है। माइक्रोसैट और कलामसैट प्रक्षेपित करने वाले पीएसएलवी सी 44 अभियान के बाद इसरो इस साल 32 अभियान संचालित करेगा।

संचार उपग्रह जीसैट-7ए सफलतापूर्वक लॉन्च

इसरो ने 19 दिसंबर, 2018 को देश का 35वां संचार उपग्रह जीसैट-7ए श्रीहरिकोटा से सफलतापूर्वक लॉन्च किया। इसे प्रक्षेपण यान जीएसएलवी-एफ11 के जरिए लॉन्च किया गया। जीसैट-7ए उपग्रह का वजन 2,250 किलोग्राम है। इसरो ने कहा है कि जीसैट 7 ए भारतीय क्षेत्र में केयू बैंड में उपयोगकर्ताओं को संचार क्षमता प्रदान करेगा। इससे वायुसेना की नेटवर्किंग क्षमता मजबूत होगी। जीसैट-7ए का जीवन आठ वर्ष है।

सबसे वजनी उपग्रह जीसैट-11 सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित

5 दिसंबर, 2018 को जीसैट-11 उपग्रह फ्रेंच गुयाना स्पेस सेंटर से एरियनस्पेस रॉकेट की मदद से सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया। प्रक्षेपण के 33 मिनट बाद जीसैट -11 को कक्षा में स्थापित कर दिया गया। करीब 5,854 किलोग्राम वजन का जीसैट -11 इसरो का बनाया अब तक का सबसे अधिक वजन वाला उपग्रह है। इसका जीवन काल 15 साल से अधिक रहने का अनुमान है। यह अत्याधुनिक और अगली पीढ़ी का संचार उपग्रह है। जीसैट-11 देश में ब्रॉडबैंड सेवाएं प्रदान करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। जी सैट-11 उपग्रह 32 यूजर बीम के माध्‍यम से केयू बैंड और 8 हब बीम के माध्‍यम से केए बैंड में भारत के सामान्‍य और द्वीपीय क्षेत्रों में तीव्रगति की इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध कराएगा। इसरो के अध्‍यक्ष डॉ के सिवन ने कहा ‘जीसैट-11’ देश के ग्रामीण और दूरदराज के ग्राम पंचायत क्षेत्रों में भारत नेट परियोजना के तहत आने वाली ब्रॉडबैण्‍ड सम्‍पर्क सेवा को गति देगा, जो कि डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का एक हिस्‍सा है। सिवन ने कहा कि भारत नेट परियोजना का उद्देश्‍य ई-बैंकिंग, ई-हेल्‍थ और ई-गवर्नेंस जैसी जन कल्‍याणकारी योजनाओं को सशक्‍त बनाना है। उन्‍होंने कहा कि जीसैट-11 भविष्‍य के सभी तरह के संचार उपग्रहों के लिए एक अग्रदूत साबित होगा।

इसरो ने एक साथ 31 सैटेलाइट लॉन्च किए

अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 29 नवंबर, 2018 को अंतरिक्ष यान पीएसएलवी-सी43 के साथ आठ देशों के 31 सैटेलाइटों को प्रक्षेपित किया। इसमें धरती का अध्ययन करने वाले भारतीय हाइपर स्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट (HySIS) शामिल है। 380 किलोग्राम के इस सैटेलाइट को इसरो ने विकसित किया है। इसरो के मुताबिक, आंध्र प्रदेश में श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 29 नवंबर को पीएसएलवी-सी43 से इन उपग्रहों का प्रक्षेपण किया गया। HySIS पीएसएलवी-सी43 अभियान का प्राथमिक उपग्रह है। इसके अलावा प्रक्षेपित 30 विदेशी सैटेलाइट में 23 अमेरिका के हैं और बाकी ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, कोलंबिया, फिनलैंड, मलेशिया, नीदरलैंड और स्पेन के हैं। इन विदेशी उपग्रहों का कुल वजन 261.5 किलोग्राम है।

अंतरिक्ष में पहुंचा भारी सैटेलाइट

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत का स्पेस मिशन रोजाना सफलता के नए-नए अध्याय जोड़ रहा है। इसरो ने 14 नवंबर, 2018 को अपने भारी रॉकेट जीएसएलवी-एमके3-डी2 की मदद से देश के सबसे उन्नत संचार उपग्रह जीसैट-29 को कक्षा में स्थापित किया। यह उपग्रह पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर के दूरस्थ इलाकों में इंटरनेट और अन्य संचार सुविधाएं मुहैया कराने में मददगार होगा। यह उपग्रह क्यू ऐंड वी बैंड्स, ऑप्टिकल कम्युनिकेशन और एक हाई रेजॉल्यूशन कैमरा भी अपने साथ ले गया है। भविष्य के स्पेस मिशन के लिए पहली बार इन तकनीकों का परीक्षण किया गया। इस रॉकेट में दुनिया के दूसरे सबसे बड़े बूस्टर S200 का इस्तेमाल किया गया। 3423 किलोग्राम वजन का यह सैटलाइट भारत की जमीन से लॉन्च किया गया अब तक का सबसे भारी उपग्रह है। इस अभियान को इसलिए भी अहम माना है क्योंकि भारत के महत्वाकांक्षी चंद्रयान-2 और मानवयुक्त अंतरिक्ष अभियानों में इस रॉकेट का इस्तेमाल किया जा सकता है।

इसरो ने दिखाई अपनी ताकत, 100वें सैटेलाइट का हुआ सफल परीक्षण

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय अंतरिक्ष एवं अनुसंधान संगठन यानि (इसरो) रोज नए आयाम लिख रहा है। इसी वर्ष 12 जनवरी,2018 को इसरो ने सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान पीएसएलवी-40 सी के जरिये पृथ्वी अवलोकन उपग्रह कार्टोसैट-2 सहित 31 उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण किया। इसरो की इस सफलता पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी वैज्ञानिकों की पीठ थपथपाते हुए इसरो की इस कामयाबी पर बधाई दी।

30 नैनो सैटेलाइट को पीएसएलवी-सी38 के जरिए छोड़ा

23 जून, 2017 को इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) ने श्रीहरिकोटा स्थित लॉन्चपैड से कार्टोसैट-2s सैटेलाइट के साथ 30 नैनो सैटेलाइट को पीएसएलवी-सी38 के जरिए छोड़ा। कार्टोसैट-2 शृंखला उपग्रह का वजन 712 किलोग्राम है। पीएसएलवी-सी38 के जरिये भेजे जाने वाले अन्य 30 उपग्रहों का कुल वजन 243 किलोग्राम है। कार्टोसैट को मिलाकर सभी 31 उपग्रहों का कुल भार 955 किलोग्राम है। यह राकेट 14 देशों से 29 नैनो उपग्रह लेकर गया है, जिसमें ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, ब्रिटेन, चिली, चेक गणराज्य, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, लातविया, लिथुआनिया, स्लोवाकिया और अमेरिका के साथ-साथ भारत का एक नैनो उपग्रह भी शामिल है। 15 किलोग्राम वजनी भारतीय नैनो सैटेलाइट एनआईयूएसएटी तमिलनाडु की नोरल इस्लाम यूनिवर्सिटी का था। यह उपग्रह कृषि फसल की निगरानी और आपदा प्रबंधन सहायता अनुप्रयोगों के लिए मल्टी-स्पेक्ट्रल तस्वीरें प्रदान करेगा। भारतीय सेना को भी इस सैटेलाइट लॉन्च से फायदा होगा। निगरानी से जुड़ी ताकत बढ़ेगी।

जीएसएलवी मार्क 3-डी1

देश के सबसे भारी रॉकेट जीएसएलवी मार्क 3-डी1 के जरिए सबसे वजनदार संचार उपग्रह जीसेट-19 को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित किया गया। GSLV Mk III रॉकेट को ISRO ने FAT BOY नाम दिया है। इसकी खासियत ये है कि ये ISRO द्वारा निर्मित अबतक का सबसे भारी (640 टन) लेकिन, सबसे छोटा (43 मीटर) रॉकेट है। 200 परीक्षणों के बाद ISRO ने इसे 5 जून, 2017 को अंतरिक्ष में भेजने में सफलता हासिल की। जीएसएलवी मार्क3-डी1 भूस्थैतिक कक्षा में 4,000 किलो और पृथ्वी की निचली कक्षा में 10,000 किलो तक के पेलोड या उपग्रह ले जाने की क्षमता रखता है। रॉकेट में स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन लगा है। इसके सफल प्रक्षेपण से भविष्य में अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने का भारत का रास्ता साफ होगा। अब तक 2,300 किलो से ज्यादा वजन वाले संचार उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए इसरो को विदेशी रॉकेटों पर निर्भर रहना पड़ता था। इसरो के पूर्व प्रमुख व सलाहकार डॉ राधाकृष्णन ने इस सफलता को मील का पत्थर करार दिया है। उन्होंने कहा, इसने प्रक्षेपण उपग्रह की क्षमता 2.2-2.3 टन से करीब दोगुनी 3.5-4 टन कर दी है। हम अब संचार उपग्रहों के प्रक्षेपण में आत्मनिर्भर हो जाएंगे।

GPS से भी 6 गुना बेहतर ‘नाविक’

भारत का अपना GPS सफलतापूर्वक काम करने लगा है और अगले साल तक देश की जनता भी इसका इस्तेमाल कर सकेगी। सबसे बड़ी बात ये है कि देशी NavIC अमेरिकी GPS से कहीं अधिक अचूक है। खास बात ये है कि NavIC यानी ‘Navigation with Indian Constellation’ का हिंदी अर्थ नाविक है, जो नाम खुद प्रधानमंत्री मोदी ने दिया है। इसके साथ ही भारतीय अंतरिक्ष रिसर्च संगठन (ISRO) ने एकबार फिर से अंतरिक्ष की दुनिया में अपनी कामयाबियों की कड़ी में एक और झंडा गाड़ दिया है। वैज्ञानिकों ने NavIC को इस तरह से डिजाइन किया है कि इस्तेमाल करने वालों को देश के अंदर किसी भी जगह की सटीक से सटीक जानकारी मिल सकेगी। जानकारी के अनुसार अब अगर आप कहीं भी रास्ता भटक जाएं, तो ‘NavIC’ आपकी मदद के लिए हाजिर होगा। इसके लिए ISRO ने  IRNSS-1G (Indian Regional Navigation Satellite System) सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजा था। इसी के बाद प्रधानमंत्री ने इस शुद्ध देशी GPS का नाम NavIC (Navigation with Indian Constellation) दिया था। जानकारों के अनुसार अमेरिकी GPS, 24 सैटेलाइट्स का समूह है, इसीलिए उसका दायरा बहुत अधिक है और वो पूरी दुनिया पर नजर रख सकता है। लेकिन सिर्फ 7 सैटेलाइट के समूह वाले NavIC का दायरा सिर्फ भारत और उसके आसपास के क्षेत्रों तक सीमित है। लेकिन अमेरिकी GPS की तुलना में इसकी सू्क्ष्मता बहुत ही ज्यादा सटीक है। NavIC की accuracy 5 मीटर है, जबकि GPS की accuracy 20-30 मीटर की है।

एक साथ 104 सैटेलाइट छोड़कर रचा इतिहास

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान, इसरो ने एक साथ 104 उपग्रह लांच करके एक नया इतिहास रच दिया। सारी दुनिया इसरो की इस सफलता को देखकर दंग रह गई। इससे पहले एक अभियान में इतने उपग्रह एक साथ कभी नहीं छोड़े गए। एक अभियान में सबसे ज्यादा 37 उपग्रह भेजने का विश्व रिकार्ड रूस के नाम था। यह प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से किया गया। इस अभियान में भेजे गए 104 उपग्रहों में से तीन भारत के थे। विदेशी उपग्रहों में 96 अमेरिका के तथा इजरायल, कजाखिस्तान, नीदरलैंड, स्विटजरलैंड और संयुक्त अरब अमीरात के एक-एक थे। इससे पहले इसरो ने जून 2015 में एक मिशन में 23 उपग्रह लांच किए थे।

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