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गणतंत्र दिवस पर राजपथ की खूबसूरती देख रह जाएंगे दंग, सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट ने लगाया चार-चांद

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हर साल की तरह इस साल भी 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पूरे आन-बान-शान के साथ मनाया जाएगा। लेकिन इस बार का गणतंत्र दिवस परेड कुछ खास होने वाला है। दर्शकों को राजपथ पर भव्य परेड के साथ-साथ खूबसूरत बदलाव भी देखने को मिलेंगे। मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का काम तेजी से चल रहा है। इसके तहत कई शानदार बदलाव किए गए हैं, जिनमें लॉन, घास, नहर, ब्रिज, वॉक वे, ड्रेनेज सिस्टम, पार्किंग, अंडरपास, स्टेप गार्डन, लाइट पोल्स, साइनेज शामिल हैं। इससे राजपथ पहले के मुकाबले ज्यादा आकर्षक हो गया है।

नए बदलावों के बाद अब राजपथ का वॉकिंग एरिया बढ़कर 1 लाख 10 हजार 457 वर्ग मीटर हो गया है। लोगों को अब साइन बोर्ड भी बदले नजर आएंगे। सिटिंग अरेंजमेट की बात करें तो खास किस्म की कुर्सियां नई डिजाइन में बनाई गई हैं, जो पहले की तुलना में कम समय में इंसटाल की जा सकती हैं। ये कुर्सियां दिखने में सुंदर और बैठने में आरामदायक भी हैं। इसमें कुल 30 हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था है। लेकिन कोरोना महामारी को देखते हुए गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान करीब 24 हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था होगी। राष्ट्रपति भवन और इंडिया गेट के बीच उद्यानों में और राजपथ के किनारे कुल 915 प्रकाश स्तम्भ लगाए गए हैं।

इस बार गणतंत्र दिवस के मौके पर आने वाले लोगों को राजपथ के किनारे गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों की तस्वीरें नजर आएंगी, जिन्हें 500 से अधिक कलाकरों ने मिलकर तैयार किया है। तस्वीरों को आज़ादी की 75 वर्षगांठ अमृत महोत्सव को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसके अलावा पार्किंग की सुविधा बढ़ा दी गई है और अब एक ही समय में 50 बसें और 1,000 वाहन रखे जा सकेंगे। पेड़ों के नीचे भी हरियाली रहे, इसके लिए विशेष किस्म की घास लगाई गई है। गौरतलब है कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का काम कुल 85.3 हेक्टेयर में चल रहा है। इस प्रोजेक्ट में संसद भवन के साथ साथ प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति के आवास का भी निर्माण किया जा रहा है। सितंबर 2019 में घोषित सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट में 900 से 1,200 सांसदों के बैठने की क्षमता वाले एक नए त्रिकोणीय संसद भवन की परिकल्पना की गई है।

मोदी सरकार में राजपथ का कायाकल्प 

                पहले             अब
9.40 लाख वर्ग मीटर वाले राजपथ पर बजरी या लाल मोरंग होती थी। बजरी की जगह राजस्थान से लाए गए 1. 5 लाख ग्रेनाइट पत्थर लगे हैं।
पहले क्रॉस पाथवे जैसा कोई रास्ता नहीं था। 16 हजार 500 मीटर का क्रॉस पाथवे बनाया गया है।
राजपथ पर बेंचें टूट गई थीं या पुरानी हो चुकी थीं। सभी बेंच बदलकर 422 नई पत्थर की बेंच लगाई गई है। 
राजपथ पर साइन बोर्ड पुराने हो गए थे। दिव्यांग फ्रेंडली 114 आधुनिक साइन बोर्ड लगे हैं।
नहर के पास पहले कोई रास्ता नहीं था। नहर के साथ टहलने के लिए वाक वे बनाया गया है।
पहले ट्री एवेन्यू में 3890 पेड़ हुआ करते थे। ट्री एवेन्यू में कुल 4087 पेड़ लगाए गए हैं।
राजपथ पर पहले 661 मेनहोल थे। मेनहोल की संख्या बढ़कर 1490 हो गई है।

 

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