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कांग्रेस, यूपीए और एनडीए शासित राज्य सरकारों में किसने देश को मुश्किल में डाला, देखिए हैरान करने वाले आंकड़े

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कोरोना की दूसरी लहर ने जिस तरह से देश के सामने चुनौती पेश की है, उससे पूरा देश हैरान और परेशान है। अब सवाल उठ रहे है कि जब हालात पूरी तरह से नियंत्रण में थे, तो अचानक इतने खराब कैसे हो गए। जब हम कोरोना संक्रमण और उससे होने वाली मौतों के आंकड़ों पर राज्यवार नजर डालते हैं, तो हैरान करने वाली तस्वीर उभरकर सामने आती है। एनडीए शासित राज्य सरकारों की तुलना में कांग्रेस और यूपीए की राज्य सरकारों में हालात काफी खतरनाक है। देश में कोरोना के सक्रिय और मरने के मामले उन राज्यों में सबसे ज्यादा हैं, जहां कांग्रेस और यूपीए (गैर-कांग्रेस) की राज्य सरकारें हैं। 

यूपीए, कांग्रेस और एनडीए शासित राज्यों में कोरोना के मामले

पूरे देश में सक्रिय मालमों की संख्या 27,65,490 और मौतों का आंकड़ा 1,93,055 है, जिनमें यूपीए शासित राज्यों में सक्रिय मामले 16,42,080 (59 प्रतिशत) और मौतों के आंकड़े 1,27,250 (66 प्रतिशत) है। इनमें कांग्रेस शासित राज्यों में कोरोना के सक्रिय मामले 10,46,302 (38 प्रतिशत) और मौतों के आंकड़े 84, 884 (44 प्रतिशत) है। जबकि एनडीए शासित राज्यों में सक्रिय मामलों की संख्या 11,23,410 (41 प्रतिशत) और मौतों की संख्या 65, 805 (34 प्रतिशत) है। हैरानी की बात है कि यूपीए शासित राज्यों में जनसंख्या 44 प्रतिशत और कांग्रेस शासित राज्यों की जनसंख्या 22 प्रतिशत है, जबकि एनडीए शासित राज्यों की जनसंख्या 56 प्रतिशत है।

प्रति 10 लाख जनसंख्या पर सक्रिय और मौतों का आंकड़ा

प्रति दस लाख जनसंख्या पर भी यूपीए, कांग्रेस और एनडीए शासित राज्यों में सक्रिय मामले और मौतों के आंकड़े में काफी अंतर है। प्रति दस लाख की जनसंख्या पर यूपीए शासित राज्यों में सक्रिय मामले 2,824 और मौतों का आंकड़ा 219 है। कांग्रेस शासित राज्यों में सक्रिय मामले 3,547 और मौतों का आंकड़ा 288 है। जबकि एनडीए शासित राज्यों में सक्रिय मामले 1,494 और मौतों के आंकड़े 88 है।

कांग्रेस शासित राज्यों में हालात काफी खराब

अगर यूपीए, कांग्रेस और एनडीए शासित राज्यों के आंकड़ों पर गौर करें, तो जो तस्वीर उभर सामने आती है, वो हालात खराब होने की पूरी कहानी बयां कर रही है। यूपीए और एनडीए शासित राज्यों की तुलना में कांग्रेस शासित राज्यों में सक्रिय मामलों और मौतों का आंकड़ा काफी ज्यादा है। यहां तक कि प्रति दस लाख की जनसंख्या पर भी कांग्रेस शासित राज्यों में हालात काफी खराब है। इससे पता चलता है कि कांग्रेस शासित राज्यों की नाकामी का खामियाजा पूरा देश भुगत रहा है। गौरतलब है कि कांग्रेस शासित राज्यों में महाराष्ट्र, राजस्थान, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पंजाब शामिल है।

लापरवाही, राजनीति, दुष्प्रचार का नतीजा

दरअसल आंकड़े खुद गवाही दे रहे हैं कि कांग्रेस शासित राज्यों की लापरवाही, राजनीति, दुष्प्रचार का खामियाजा इन राज्यों की जनता को भुगतना पड़ रहा है। ये वहीं महाराष्ट्र की उद्धव सरकार है, जिसे कोरोना से लड़ने की जगह रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी से लड़ रही थी। सचिन वाजे जैसे विवादास्पद पुलिस अधिकारी से वसूली कराने में लगी हुई थी। 

कांग्रेस शासित छत्तसगढ़ ऐसा पहला राज्य था, जिसने 16 जनवरी को जब भारत सरकार ने कोवैक्सीन और कोविशील्ड टीकों को उपयोगी मानते हुए देश भर में टीकाकरण की शुरुआत की, तो कोवैक्सीन का विरोध किया था। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव ने कहा था कि कोवैक्सीन के तीसरे चरण के परिणाम जब तक नहीं आ जाते, तब तक इसके टीकाकरण की अनुमति नहीं दी जा सकती। साथ ही कोवैक्सीन पर एक्सपायरी तारीख नहीं होने को लेकर सवाल उठाया था।

 

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