Home विशेष यूएसए की रटगर्स यूनिवर्सिटी के शोध में खुलासा- सोशल मीडिया पर हिंदुओं...

यूएसए की रटगर्स यूनिवर्सिटी के शोध में खुलासा- सोशल मीडिया पर हिंदुओं के खिलाफ हेट स्पीच बढ़ी, आतंकी नेटवर्क फैला रहा है जहर, हिंदू ही जानबूझकर किए जा रहे टारगेट

591
SHARE

संयुक्त राज्य अमेरिका की रटगर्स यूनिवर्सिटी के शोध में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि हिंदुओं के खिलाफ सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स पर जानबूझकर आतंकी नेटवर्क जहर फैला रहा है। शोधकर्ताओं ने सोशल मीडिया और अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर हिंदूफोबिया में तेजी से हुई वृद्धि का आंकलन किया है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करते हुए सोशल मीडिया पर 10 लाख से ज्यादा ऐसे संदेशों को पढ़ा, जो छद्म भाषा में थे या फिर कोड में जारी किए गए थे। इन संदेशों में हिंदुओं को भारत में मुस्लिमों पर अत्याचार करने वाला बताने का षड्यंत्र रचा जा रहा है।

ईरानी ट्रोल्स ने हिंदुओं पर अल्पसंख्यकों के खिलाफ नरसंहार का आरोप लगाने का अभियान छेड़ा
विश्वविद्यालय का शोध बताता है कि ये संदेश टेलीग्राम और वाट्सअप से लेकर दूसरे सोशल प्लेटफॉर्म के जरिए भी प्रसारित किए जा रहे हैं। इनमें ईरानी ट्रोल्स ने हिंदुओं पर भारत में अल्पसंख्यकों के खिलाफ नरसंहार करने का आरोप लगाने का अभियान छेड़ रखा है। साथ ही हिंदू विरोधी रूढ़िवादिता का भी प्रसार किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर हिंदुओं के खिलाफ हेट स्पीच की अचानक बाढ़ आ गई है।

 

हिंदुओं के खिलाफ दुनियाभर में जहर उगल रहा है आतंकी इस्लामी वेब नेटवर्क
संयुक्त राज्य अमेरिका की रटगर्स यूनिवर्सिटी ने हालिया शोध ‘एंटी-हिंदू डिसइन्फॉर्मेशन: ए केस स्टडी ऑफ हिंदूफोबिया ऑन सोशल मीडिया’ में दावा किया है कि आ तंकी इस्लामी वेब नेटवर्क दुनियाभर में हिंदुओं के खिलाफ जहर उगल रहा है। उन्हें भारत में मुस्लिमों पर अत्याचार करने वाला बताने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट यह दावा भी करती है कि हिंदुओं के खिलाफ शुरू हुई हिंसा के पीछे यह नेटवर्क और उसकी सोशल मीडिया पर जारी कोशिशें हैं।

हिंदूफोबिक कोड वर्ड्स और मीम्स रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से पकड़ा
इतना ही नहीं इनमें हिंदुओं के खिलाफ अभद्र भाषा से लेकर पूरा अभियान चल रहा है। दूसरे शब्दों में कहें तो यह नेटवर्क हिंदुओं के खिलाफ लोगों को भड़काने का काम कर रहा है। शोध में दावा है कि जुलाई में हिंदूफोबिक कोड वर्ड्स और मीम्स रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए। जो वास्तविकता में विश्व हिंसा को भड़का सकता है। खासकर, तब जब देश के भीतर धार्मिक तनाव बढ़ा हुआ है।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक पांच गुना से ज्यादा बढ़े हेट स्पीच के मामले
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों पर गौर करें तो देश में बीते कुछ वर्षों में हिंदुओं के खिलाफ हेट स्पीच के मामलों में इजाफा हो रहा है। इसके पीछे इस्लामी कट्टरवादी ताकतें ही ज्यादा शामिल है। जिनकी शह पर सोशल नेटवर्क पर यह खेल हो रहा है।  एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि हेट स्पीच के मामले पांच गुना से ज्यादा बढ़े हैं। 2014 में हेट स्पीच के 323 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2020 में 1804 मामले दर्ज हुए थे। इनमें सर्वाधिक हिंदुओं के खिलाफ हैं। हालांकि यह तब है जब देश में हेट स्पीच को लेकर सीधे तौर पर कोई कानून नहीं है।

सोशल मीडिया पर जिस तेजी के साथ नफरत भरे संदेश शेयर हो रहे हैं, वह खतरनाक
सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म काफी हद तक इस नफरत के कोड वर्ड्स, मुख्य इमेज और प्लान आधारित कैंपेन से अनजान हैं, जबकि यह तेजी के साथ यहां पर बढ़ रहा है। रटगर्स यूनिवर्सिटी में ईगलटन इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स के निदेशक जॉन जे. के मुताबिक सोशल मीडिया पर जिस तेजी के साथ नफरत भरे संदेश साझा किए जा रहे हैं, वह खतरनाक है। सोशल मीडिया पर नफरत भरे संदेशों की तीव्रता और वास्तविक दुनिया में हिंसा के बीच हमेशा संबंध रहा है।

देश में हिंदुओं की खिलाफत और मुस्लिम तुष्टिकरण में लगे हैं कई राजनीतिक दल
हिंदुओं की खिलाफत और मुस्लिम तुष्टिकरण में भारत में भी कई राजनीतिक दल और उनके नेता पीछे नहीं हैं। कांग्रेस से लेकर सपा तक और तृणमूल कांग्रेस से लेकर आप तक सभी किसी भी हद तक जाकर मुस्लिम तुष्टिकरण में लगे हैं। ममता बनर्जी को तो इसके लिए कोलकात्ता हाईकोर्ट से फटकार तक लग चुकी है। हाईकोर्ट ने सरकार से कहा था कि, “आप दो समुदायों के बीच दरार पैदा क्यों कर रहे हैं। दुर्गा पूजन और मुहर्रम को लेकर राज्य में कभी ऐसी स्थिति नहीं बनी है। उन्‍हें साथ रहने दीजिए।” दरअसल एक धर्म को दूसरे धर्म के सामने खड़ा कर सियासत करने की ममता सरकार की कोशिश को हाईकोर्ट ने ताड़ लिया और कोर्ट ने सरकार पर तीखी टिप्पणी की।

 

Leave a Reply