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भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार हुई दोगुनी, विश्व बैंक ने देश की जीडीपी ग्रोथ अनुमान को 5.4 से बढ़ाकर किया 10.1 प्रतिशत

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कोरोना इफेक्ट से बाहर निकलते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी रफ्तार पकड़ ली है। अर्थव्यवस्था में मौजूदा सुधार को देखते हुए विश्व बैंक ने भी अपने अनुमानों में संशोधन किया है। वित्त वर्ष 2021-22 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान को 4.7 प्रतिशत से बढ़ाकर 10.1 प्रतिशत कर दिया है। इस अनुमान के पीछे निजी उपभोग में वृद्धि एवं निवेश को कारण बताया गया है। इससे पहले जनवरी में विश्व बैंक ने ही भारत की जीडीपी वृद्धि दर को 5.4 प्रतिशत बताया था। 

बुधवार को जारी दक्षिण एशिया की आर्थिक स्थिति पर आधारित एक रिपोर्ट में विश्व बैंक ने बताया कि वैक्सीनेशन कार्यक्रम, नीतिगत निर्णयों और वैश्विक अर्थव्यवस्था का असर दिखाई दे रहा है। भारत में सरकार ने जनवरी के मध्य में बड़े पैमाने पर कोरोना वैक्सीनेशन की शुरुआत की थी। इस वजह से भारत की जीडीपी ग्रोथ बेहतर रहने का अनुमान जताया गया है। देश में कोरोना वैक्सीनेशन के बाद अधिकतर राज्यों में आर्थिक गतिविधियों में सुधार आने की उम्मीद जताई गई है।

वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि वैक्सीनेशन की तेजी के साथ व्यापार गतिविधियां, निवेश और माँग के बढ़ने की भी उम्मीद है। देश में जैसे-जैसे टीकाकरण बढ़ता जाएगा उसी हिसाब से आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि हो सकती है। आईटी, ई-कॉमर्स, डाटा प्रोसेसिंग और डिजिटल पेमेंट जैसे क्षेत्र जीडीपी वृद्धि में भरपूर योगदान दे रहे हैं। भारत सरकार ने अपने बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर अधिक ध्यान देने की वकालत की थी।

हालांकि वर्ल्ड बैंक ने कोरोना महामारी की दूसरी लहर की वजह से जीडीपी ग्रोथ के मामले में अनिश्चितता कायम रहने की आशंका भी जताई है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2022 के लिए भारत के जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 7.5-12.5 प्रतिशत रह सकता है। नीतिगत सुधार की वजह से भारत की जीडीपी ग्रोथ इस रेंज में रहने का अनुमान जताया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक 2021 में सरकारी निवेश में 16.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। 2020 में दक्षिण एशिया क्षेत्र में भारत ही एक मात्र ऐसा देश था, जहां प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में बढ़ोत्तरी देखने को मिली। इस बढ़ोत्तरी के कारण विकासशील देशों में निवेश के क्षेत्र में भारत ने अपना एक अलग स्थान बनाया। एफडीआई, पूंजीगत इनफ्लो और आयात में कमी के कारण अंतर्राष्ट्रीय फॉरेक्स रिजर्व 2019 के मुकाबले लगभग दोगुना हो चुका है।

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