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यूक्रेन संकट: दुनिया की नजर भारत पर, आखिर क्यों बाइडेन से ज्यादा हो रही है ग्लोबल लीडर प्रधानमंत्री मोदी की चर्चा?

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यूक्रेन संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार रात रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात कर तत्काल हिंसा रोकने की अपील की। प्रधानमंत्री ने दोनों पक्षों से तनाव में कमी लाने के लिए राजनयिक बातचीत करने को कहा। प्रधानमंत्री ने कहा कि रूस और नाटो समूह के बीच के मतभेदों को केवल ईमानदार और गंभीर संवाद के जरिए ही सुलझाया जा सकता है। बातचीत के दौरान राष्‍ट्रपति पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी को यूक्रेन को लेकर ताजा घटनाक्रम के बारे में बताया। यूक्रेन संकट के बाद राष्ट्रपति पुतिन से बात करने वाले प्रधानमंत्री मोदी पहले वैश्विक नेता में से हैं। इस बातचीत के बाद दुनियाभर की नजर भारत पर लगी हुई है।

भारत से करेंगे विचार-विमर्श- अमेरिका
रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से ज्यादा प्रधानमंत्री मोदी की चर्चा हो रही है। राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी कहा है कि वह रूस-यूक्रेन संकट पर भारत से विचार-विमर्श करेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति विभाग, विदेश विभाग और अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद से लेकर विभिन्न स्तरों पर बाइडन प्रशासन यूक्रेन के संकट पर भारत से समर्थन की मांग कर रहा है और कई स्तरों पर भारतीय समकक्षों से बात की जा रही है। यूक्रेन संकट पर अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने गुरुवार को भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर से बातचीत भी की।

यूक्रेन को भारत से उम्मीद-पीएम मोदी की बात पुतिन जरूर सुनेंगे
यूक्रेन के राष्‍ट्रपति व्‍लोदोमीर जेलेंस्‍की रूस के साथ लड़ाई में अकेले पड़ गए हैं। उनका दुख भी अब दुनिया के सामने छलक आया है। उन्‍होंने यहां तक कहा कि उन्‍हें इस जंग में अकेला छोड़ दिया गया है। अमेरिका और नाटो जो मदद की बात कर रहा था, निंदा के अलावा यूक्रेन के लिए अभी तक कुछ नहीं किया है। इस संकट के बीच यूक्रेन ने कहा है कि भारत और रूस के बीच अच्‍छे संबंध हैं, ऐसे में हमें यकीन है भारत के प्रधानमंत्री की बात रूसी राष्‍ट्रपति जरूर सुनेंगे। भारत में यूक्रेन के राजदूत डॉ इगोर पोलिखा ने कहा कि भारत अब पावरफुल ग्‍लोबल प्‍लेयर है। ऐसे में भारत को दूसरे बड़े देशों की तरह ही इस मामले में अपनी भूमिका दिखाने की जरूरत है। उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी इस समय दुनिया के सबसे ताकतवर नेताओं में से एक हैं। उनका सभी देश के नेता पूरा सम्‍मान करते हैं।

मोदी -पुतिन की दोस्ती से रिश्ते हुए मजबूत
ये सब वैसे ही नहीं हुआ है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी के बीच मजबूत व्यक्तिगत संबंधों ने दोनों देशों के कूटनीतिक और सामरिक रिश्तों को नई ऊर्जा दी है। राषट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी अच्छे दोस्त हैं और कई मौकों पर दोनों यह साबित भी कर चुके हैं। क्रेमलिन में 1 दिसंबर, 2021 को राष्ट्रपति पुतिन ने विदेशी राजदूतों से परिचय प्राप्त करने के समारोह में कहा था कि वह प्रधानमंत्री मोदी के साथ रूस-भारत के आपसी संबंधों को और व्यापक पैमाने पर विकसित करने का इरादा रखते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने भी रूस की न्यूज एजेंसी टीएएसएस से बातचीत के दौरान कहा था वह कैसे पुतिन के एक दोस्त की खातिर आत्म-बलिदान देने के व्यवहार की इज्जत करते हैं। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि दोनों नेताओं की दोस्ती बेहद सहज-सरल है और उनके बीच का संबंध बेहद स्वाभाविक है।

भारत और रूस अपनी ‘दोस्ती’ के 50 साल पूरे हो गए हैं। मोदी सरकार ने रूस के साथ रिश्तों को और मजबूती देने की कोशिश की है। भारत पश्चिमी देशों खासकर अमेरिका की परवाह किए बिना रूस से सैन्य उपकरण और बड़े हथियार खरीद रहा है, जिनमें एस-400 मिसाइल, टैंक्स, छोटे हथियार, एयरक्राफ्ट्स, शिप्स, कैरियर एयरक्राफ्ट और सबमरीन्स शामिल हैं।

पीएम मोदी को रूस का सर्वोच्च नागरिक सम्मान
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अप्रैल 2019 में प्रधानमंत्री मोदी को रूसी संघ के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार – ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल’ से सम्मानित किया। यह सम्मान उन्हें दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देने में असाधारण सेवाओं के लिए दिया गया। पहली बार किसी भारतीय को यह सम्मान मिला है।

जब प्रोटोकॉल तोड़ हवाई अड्डे पर विदा करने आए पुतिन
मई 2018 में रूस के सोची शहर में प्रधानमंत्री मोदी और रूस के राष्ट्रपति पुतिन के बीच एक दिन की अनौपचारिक मीटिंग ने दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊर्जा दी। मीटिंग खत्म होने के बाद राष्ट्रपति पुतिन प्रोटोकॉल को तोड़कर प्रधानमंत्री मोदी को विदा करने एयरपोर्ट साथ आए। वे गले लगे और हाथ हिलाकर विदाई दी।

ग्लोबल लीडर मोदी
एक दौर वह भी था जब भारत विश्व की महाशक्तियों के भरोसे रहता था। आज भारत बोलता है तो दुनिया सुनती है। दरअसल दुनिया में इस समय किसी नेता की सबसे ज्यादा पूछ है तो वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं। प्रधानमंत्री मोदी की शख्सियत और व्यक्तित्व की पूरी दुनिया कायल है। पीएम मोदी ने जिस तरह से भारत की छवि को पूरी दुनिया में पेश किया है, उसने दुनिया भर के नेताओं को प्रधानमंत्री मोदी का मुरीद बना दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 2014 में देश का नेतृत्व संभालने के बाद से ही अंतर्राष्ट्रीय पटल पर भारत के अग्रदूत बने हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का दबदबा लगातार बढ़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय संगठनों और मंचों पर भारत की भागीदारी बढ़ी है।

शानदार शख्सियत के धनी हैं प्रधानमंत्री मोदी
आज पूरी दुनिया प्रधानमंत्री मोदी के दमदार व्यक्तित्व और शानदार प्रतिनिधित्व का कायल है। घरेलू राजनीति में वे जितने लोकप्रिय हैं वैसे ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक अमिट छाप छोड़ चुके हैं। आज पीएम मोदी देश-विदेश में कहीं जाते हैं तो लोग उनसे हाथ मिलाने, साथ में फोटो खिंचवाने और सेल्फी लेने को आतुर रहते हैं। ऐसी लोकप्रियता आज विश्व में किसी राजनेता की नहीं दिखती है। आलम यह है कि विश्व के तमाम राजनेता उन्हें एक ग्लोबल लीडर मानते हैं।

पीएम मोदी के लीडरशिप में भारत न केवल विश्व क्षितिज पर दमदार स्थिति में आया है बल्कि ग्लोबल ताकत बन गया है। आइये हम ऐसे ही कुछ उदाहरण देखते हैं-

वर्ल्ड लीडर्स में पहले पायदान पर पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले दिनों कोरोना संकट के दौरान जिस प्रकार से देश की 130 करोड़ जनता की रक्षा करते हुए पूरी दुनिया के लिए मदद के हाथ बढ़ाए हैं, उसने उन्हें एक बार फिर दुनिया का सबसे लोकप्रिय और शीर्ष नेता बना दिया है। अमेरिकी रिसर्च एजेंसी मॉर्निग कंसल्ट के ताजा सर्वे के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 72 अंकों के साथ वर्ल्ड लीडर्स में पहले पायदान पर बने हुए हैं। मॉर्निग कंसल्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज समेत दुनिया के 12 राष्ट्र प्रमुखों को पीछे छोड़ दिया है।

कोरोना के खिलाफ जंग में मिली वैश्विक सराहना
प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना से जंग में पूरी दुनिया को रास्ता दिखाया है। विश्व के तमाम संगठनों ने कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई में निर्णयकारी नेतृत्व निभाने वाले प्रधानमंत्री मोदी को दुनिया के लिए प्रेरणास्रोत बताया है। कई दिग्गज अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों के सर्वे में भी प्रधानमंत्री मोदी की वाहवाही की गई है। मशहूर अमेरिकी पत्रकार थॉमस फ्रायडमैन ने भी माना कि मोदी सरकार ने कोरोना वायरस को परास्त करने में बेहतरीन काम किया है। इससे विश्व स्तर पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ भारत का सम्मान बढ़ा है। 

पूरी दुनिया के लिए संकटमोचक बने पीएम मोदी
वैश्विक कोरोना संकट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने ना सिर्फ देश के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए संकटमोचक बन गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी के निर्देश पर दुनिया के तमाम देशों में कोरोना वायरस से लड़ने के लिए मदद भेजी जा रही है। वैक्सीन के साथ कई देशों को मोदी सरकार ने दवाएं और चिकित्सीय उपकरण भेजे हैं।

दर्जनों देशों में की जा रही है वैक्सीन और दवा की आपूर्ति
कोरोना महामारी से बचाव के लिए सबसे जरूरी वैक्सीन के साथ दवा की आपूर्ति को लेकर भारत अभी दुनिया का सबसे अग्रणी देश बन गया है। 55 से अधिक देशों को भारत ने दवा की आपूर्ति की है। इसमें अमेरिका, ब्रिटेन जैसे शक्तिशाली देशों से लेकर गुआना, डोमिनिक रिपब्लिक, बुर्कीनो फासो जैसे गरीब देश भी हैं, जिन्हें भारत ने अनुदान के तौर पर दवाओं की आपूर्ति की है। भारत ने मालदीव, मॉरीशस, सेशेल्स, मेडागास्कर और कोमोरोस और अन्य पड़ोसी देशों को खाद्य सामग्री और दवाएं भेजकर मदद की। 

इस्लामिक देशों के साथ भारत के संबंधों में आई मजबूती
सऊदी अरब से लेकर यूएई सहित तमाम इस्लामिक देशों ने भारत के प्रधानमंत्री मोदी को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित भी किया। इसके अलावा इस्लामिक देशों के साथ भारत के संबंध भी मजबूत हुए हैं, जिसका नतीजा है कि कश्मीर मसले पर दुनिया भर के देशों ने भारत का साथ दिया। 

विदेशी दौरों में द्विपक्षीय संबंधों को दिया नया आयाम
प्रधानमंत्री मोदी दुनिया की महाशक्तियों के प्रमुखों समेत अपने पड़ोसी देशों के राष्ट्राध्यक्षों से मुलाकात में द्विपक्षीय संबंधों को नया आयाम देने के साथ ही वह भारत की नीतियों को प्रमुखता से बताने में सफल रहे हैं। इससे दुनिया के तमाम देशों के साथ भारत के संबंध प्रगाढ़ हुए हैं और देश का सिर सम्मान से ऊंचा उठा और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है।

फाइल फोटो

अमेरिका ने दिया रणनीतिक सहयोगी देश का दर्जा
प्रधानमंत्री मोदी के दमदार नेतृत्व के कारण ही अमेरिका ने भारत को रणनीतिक सहयोगी देश का दर्जा दिया है। इसका मतलब यह हुआ कि भारत के साथ कारोबारी रिश्तों को नाटो (नार्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन) के सदस्य देशों के साथ कारोबार के तर्ज पर ही वरीयता दी जाएगी। इस फैसले के बाद भारत को अब अमेरिका से उच्चतम रक्षा तकनीक लाइसेंसिंग प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। अमरीका ने पिछले दिनों भारत को एसटीए-वन दर्जे वाले देशों में शामिल करने की घोषणा की है। यह निर्यात नियंत्रण व्यवस्था में भारत की स्थिति में बहुत ही महत्वपूर्ण बदलाव है। इस दर्जे के बाद भारत को अमेरिका से अत्याधुनिक रक्षा तकनीक हासिल करने में छूट मिलेगी। इससे भारत को अमरीका के निकटतम सहयोगियों और भागीदारों की तरह अमरीका से अधिक उन्नत और संवेदनशील प्रौद्योगिकी उत्‍पादों को खरीदने की अनुमति होगी। भारत सूची में एकमात्र दक्षिण एशियाई देश है।

‘कट्टर तिकड़ी’ को एक साथ साध गए पीएम मोदी
विदेश नीति के तौर पर प्रधानमंत्री मोदी की उपलब्धियां आंकी जाए तो इस बात से अंदाजा लग जाएगा कि किस तरह उन्होंने इजरायल और फिलीस्तीन जैसे आपस में दुश्मन देशों के बीच संतुलन स्थापित किया। विशेष यह कि प्रधानमंत्री ने बारी-बारी दोनों ही देशों का दौरा किया और भारत की विदेश नीति के अपने स्टैंड पर कायम रहे। दोनों ही देशों ने भारत के बारे में सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। प्रधानमंत्री मोदी ने जब 10 फरवरी,2018 को फिलीस्तीन का दौरा किया तो ऐसा अद्भुत नजारा दिखा जिसकी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी। जॉर्डन के हेलिकॉप्टर पर सवार प्रधानमंत्री मोदी फिलीस्तीन के आसमान में उड़ रहे थे और उन्हें सुरक्षा प्रदान कर रही थी इजरायल की वायुसेना। विश्व राजनीति के लिए ऐसा अनोखा काम कोई और नही हो सकता है।


अमेरिका और रूस से एक साथ दोस्ती
अमेरिका और रूस की अदावत सभी जानते हैं। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की के कूटनीतिक कौशल के कारण आज दोनों ही देश भारत के साथ खड़े दिखते हैं। ब्रिक्स सम्मेलन में जिस तरह से रुस ने भारत का साथ देते हुए चीन की हेकड़ी गुम कर दी वह काबिले तारीफ है। ठीक इसी तरह पाकिस्तानपरस्त रहे अमेरिका को भारत की तरफ ले आना भी बड़ी बात है। आज अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित करने का खतरा मंडरा रहा है। अमेरिका ने भारत से दोस्ती की खातिर आज पाकिस्तान को हर मंच पर अकेला छोड़ दिया है।

Asean देशों को चीन के ‘चंगुल’ से छुड़ाया
26 जनवरी, 2018 को नई दिल्ली के राजपथ पर विश्व ने एक और अनोखा दृश्य तब देखा जब आसियान देशों के 10 राष्ट्राध्यक्ष भारत की जमीन पर एक साथ दिखे। थाइलैंड, वियतनाम, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलिपींस, सिंगापुर, म्यांमार, कंबोडिया, लाओस और ब्रुनेई आसियान के नेताओं ने भारत को अपनी इस इच्छा से अवगत कराया है कि रणनीतिक तौर पर अहम भारत-प्रशांत क्षेत्र में ज्यादा मुखर भूमिका निभाए। साफ है कि आसियान देशों के नेताओं का पीएम मोदी पर भरोसा व्यक्त किया जाना विश्व राजनीति में भारत के दबदबे को दिखा रहा है।

आतंकवाद पर दुनिया ने स्वीकारा पीएम मोदी का आह्वान
आतंकवाद अच्छा या बुरा नहीं होता, आतंकवाद तो बस आतंकवाद होता है। अंतर्राष्ट्रीय जगत में भारत की यही बात पहले अनसुनी रह जाती थी, लेकिन अब भारत की बातों को दुनिया मानने लगी है और एक सुर में आतंक की निंदा कर रही है। आतंक के खिलाफ आज अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, रूस, नार्वे, कनाडा, ईरान जैसे देश हमारे साथ खड़े हैं। पाकिस्तान को छोड़कर सार्क के सभी सदस्य देश अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, मालदीव और नेपाल हमारे साथ हैं। जी-20 हो या हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन, ब्रिक्स हो या सार्क समिट सभी ने हमारे साथ आतंकवाद को मानवता का दुश्मन बताते हुए दुनिया को इसके खिलाफ एक होने का आह्वान किया है।

भारत ने जीता अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन का चुनाव
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का दबदबा लगातर बढ़ता जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत को हाल ही में एक और कामयाबी मिली। भारत ने अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन का चुनाव जीत लिया। कुल 10 सदस्यों वाले इस संगठन का भारत 1959 से सदस्य है। फिलहाल जो चुनाव हुआ है वह अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन की एक काउंसिल के लिए हुआ है। यहां वह काउंसिल कैटेगरी बी की है जिसके लिए पहली बार चुनाव हुआ है। IMO यूएन की ऐसी एजेंसी है जो नौवहन के बचाव और सुरक्षा पर नजर रखती हैं। यह एजेंसी जहाजों द्वारा फैलाए जाने वाले प्रदूषण पर भी नजर रखती है। भारत और जर्मनी के साथ ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, कनाडा, स्पेन, ब्राजील, स्वीडन, नीदरलैंड और यूएई इसके सदस्य हैं।

जलवायु परिवर्तन पर प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व पर भरोसा
जलवायु परिवर्तन पर काम करने के लिए भारत वैश्विक नेतृत्व को प्रेरित कर रहा है क्योंकि भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरत का 40% हिस्सा 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य तय किया है। भारत ने ऊर्जा के लिए कोयले से सौर की तरफ रूख करने के लिए ठोस प्रयास किए हैं। सौर और पवन ऊर्जा में भारी निवेश से बिजली की कीमतें भी कम हुई हैं। इसके अतिरिक्त मोदी सरकार यह साहस भी दिखाया है जब अमेरिका ने खुद को पेरिस समझौते से अलग किया तो दुनिया की नजर भारत पर ठहर गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व मंच पर अपनी ताकतवर उपस्थिति दर्ज करा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर ही इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA) का गठन हुआ जिसमें 121 देश शामिल हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर बना ‘अंतरराष्ट्रीय सौर संगठन’
दुनिया ग्लोबल वॉर्मिंग को कम करने के लिए चिंता जता रही थी, लेकिन भारत ने बड़ी पहल की और वैश्विक स्तर पर अमेरिका और फ्रांस के साथ इसके लिए इनोवेशन की तरफ कदम बढ़ाया गया। 26 जनवरी, 2016 को गुरुग्राम में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने ‘इंटरनेशनल सोलर अलायंस’ (आईएसए) के अंतरिम सचिवालय का उद्घाटन किया तो एक ‘नये अध्याय’ की शुरुआत हुई। दरअसल ‘अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई पहल का परिणाम है और इसकी घोषणा भारत और फ्रांस द्वारा 30 नवंबर 2015 को पेरिस में की गई थी। आईएसए के गठन का लक्ष्य सौर संसाधन समृद्ध देशों में सौर ऊर्जा का उपयोग बढ़ाना और इसे बढ़ावा देना है। अब तक इस मंच से दुनिया के 36 से अधिक देश जुड़ चुके हैं।

ICJ में भारत का झंडा बुलंद
संयुक्त राष्ट्र में भारत को बड़ी जीत तब मिली जब दलवीर भंडारी लगातार दूसरी बार अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट ऑफ जस्टिस में जज बन गए। दलवीर भंडारी का मुकाबला ब्रिटेन के क्रिस्टोफर ग्रीनवुड से था, लेकिन आखिरी दौर में अपनी हार देखते हुए उन्हें नाम वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। दरअसल शुरुआती ग्यारह राउंड में दलवीर भंडारी संयुक्त राष्ट्र महासभा की वोटिंग में ग्रीनवुड पर भारी बढ़त बनाए हुए थे, लेकिन सुरक्षा परिषद में ग्रीनवुड आगे हो जाते थे। यूएन महासभा में दलवीर भंडारी को 183 वोट मिले, जबकि उन्हें सुरक्षा परिषद के सभी 15 वोट मिले। गौर करें तो यह जीत भंडारी की नहीं बल्कि भारत के उस बढ़े कद की है जो प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बढ़ा है। कभी दुनिया पर राज करने वाला ब्रिटेन आज भारत के सामने बौना साबित हो रहा है।

डोकलाम पर चीन ने देखी भारत की धमक
अमेरिका के प्रतिष्ठित थिंक-टैंक हडसन इंस्टिट्यूट के सेंटर ऑन चाइनीज स्ट्रैटजी के डायरेक्टर माइकल पिल्स्बरी नो कहा कि चीन की बढ़ती ताकत के समक्ष मोदी अकेले खड़े हैं। दरअसल ये टिप्पणी उन्होंने ‘वन बेल्ट, वन रोड’ परियोजना को ध्यान में रखते हुए कही थी। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी और उनकी टीम चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के इस महत्वाकांक्षी प्रॉजेक्ट के खिलाफ मुखर रही है। दरअसल अमेरिकी थिंक टैंक का मानना बिल्कुल सही है, क्योंकि भारत ने चीन को डोकलाम विवाद में भी अपनी दृढ़ता का परिचय करा दिया है और चीन को अपनी सेना को वापस बुलाने पर मजबूर होना पड़ा। चीन ने भारत को युद्ध की भी धमकी दी लेकिन पीएम मोदी की नीतियों से चीन अकेला हो गया और पश्चिमी देशों ने उसे संयम बरतने की सलाह दी। अमेरिका, फ्रांस, जापान, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया जैसे देश भारत के साथ खड़े रहे।

अंतरिक्ष कूटनीति से सार्क को दी नई दिशा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उम्दा कूटनीति की मिसाल है दक्षिण एशिया संचार उपग्रह। इसकी पेशकश उन्होंने 2014 में काठमांडू में हुए सार्क सम्मेलन में की थी। यह उपग्रह सार्क देशों को भारत का तोहफा है। सार्क के आठ सदस्य देशों में से सात यानी भारत, नेपाल, श्रीलंका, भूटान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और मालदीव इस परियोजना का हिस्सा बने जबकि पाकिस्तान ने अपने को इससे यह कहकर अलग कर लिया कि इसकी उसे जरूरत नहीं है वह अंतरिक्ष तकनीक में सक्षम है। 5 मई 2017 के सफल प्रक्षेपण के बाद इन देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने जिस तरह खुशी का इजहार करते हुए भारत का शुक्रिया अदा किया उससे उपग्रह से जुड़ी कूटनीतिक कामयाबी का संकेत मिल जाता है। लेकिन पाकिस्तान ने अपने अलग-थलग पड़ने का दोष भारत पर यह कहते हुए मढ़ दिया कि भारत परियोजना को साझा तौर पर आगे बढ़ाने को राजी नहीं था।

प्रधानमंत्री मोदी की नीति से पस्त हुआ पाकिस्तान
मोदी सरकार की स्पष्ट और दूरदर्शी विदेशनीति के प्रभाव से पाकिस्तान विश्व बिरादरी में अलग-थलग पड़ गया है। प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति में ऐसा घिरा है कि उसे विश्व पटल पर भारत के खिलाफ अपने साथ खड़ा होने वाला कोई एक सहयोगी देश नहीं मिल रहा। चीन तक भारत के खिलाफ उसका साथ देने को तैयार नहीं है। हाल में ही जब चीन ने पाकिस्तान की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें पाकिस्तान ने भारत पर ओबीओआर को नुकसान पहुंचाने के लिए भारत की साजिश की बात कही थी। दूसरी ओर अमेरिका की अफगान नीति से उसे बाहर किया जा चुका है तथा वह पाकिस्तान से सहयोग में भी लगातार कटौती कर रहा है। पाक को आतंकवाद का गढ़ कहते हुए अफगानिस्तान और बांग्लादेश भी अब पाकिस्तान का साथ पूरी तरह से छोड़ चुके हैं।

सर्जिकल स्ट्राइक पर भारत को दुनिया का साथ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का दुनिया में जो स्थान बन गया है वह निश्चित ही भारत के बढ़ते प्रभुत्व को बयां करता है। जम्मू-कश्मीर के उरी में 18 सितंबर, 2016 को हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 29 सितम्बर 2016 को सर्जिकल स्ट्राइक कर पाकिस्तान के आतंकवादी ठिकानों और लॉन्चपैठ को तबाह किया तो विश्व समुदाय भारत के साथ खड़ा रहा। इस के साथ ही पहली बड़ी सफलता 28 सितंबर को तब मिली जब पाकिस्तान में होने वाले सार्क सम्मेलन के बहिष्कार की घोषणा के तुरंत बाद तीन अन्य देशों (बांग्लादेश, भूटान और अफगानिस्तान) ने उसका समर्थन करते हुए सम्मेलन में ना जाने की बात कही। वहीं नेपाल ने सम्मेलन की जगह बदलने का प्रस्ताव दिया और पाकिस्तान के आंतकवाद के कारण सार्क सम्मेलन न हो सका। इसके अलावा चीन ने भी पाक के द्वारा कश्मीर में अंतराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग पर इसे द्विपक्षीय मामला कहकर कन्नी काट ली।

सुरक्षा परिषद में भारत की सदस्यता को कई देशों का समर्थन
प्रधानमंत्री मोदी ने कई विभिन्न देशों की यात्राएं की हैं। इन यात्राओं में वे तीन प्रमुख एजेंडों के साथ आगे बढ़ रहे थे। अलग-अलग देशों के साथ संबंधों में सुधार, निवेश आमंत्रित करने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भारत की स्थायी सीट के लिए समर्थन जीतना उनका प्रमुख उद्देश्य था। दरअसल भारतीय इतिहास में कोई और प्रधानमंत्री नहीं जिन्होंने सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए इतनी मेहनत की है। अमेरिका, जर्मनी, रूस, फ्रांस और जापान जैसे देशों के राजदूत और नेताओं को भारत के पक्ष में लाकर उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के लिए लगभग सभी देशों का समर्थन हासिल कर लिया। यह समर्थन इस अंतरराष्ट्रीय मंच की स्थिति के लिए भारत की पात्रता दिखाने के उनके प्रयासों का प्रत्यक्ष परिणाम था।

पीएम मोदी के आह्वान से योग को दुनिया ने दिया समर्थन
प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर 21 जून, 2015 को विश्व के 192 देश जब ‘योगपथ’ पर चल पड़े तो सारे संसार में योग का डंका बजने लगा। आधुनिकता के साथ अध्यात्म का मोदी मंत्र दुनिया के देशों को भी भाया और इसी कारण पीएम मोदी की पहल को 192 देशों का समर्थन मिला। 177 देश योग के सह प्रायोजक के तौर पर इस आयोजन से जुड़ भी गए। अब पूरी दुनिया योग शक्ति से आपस में जुड़ी हुई महसूस होने लगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनथक प्रयास से योग को आज पूरी दुनिया में एक नई दृष्टि से देखा जाने लगा है। यह अनायास नहीं है कि पूरी दुनिया में योग का डंका बज रहा है। ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भारत की नीति और भारतीय होने पर गौरव की अनुभूति से प्रभावित प्रधानमंत्री मोदी ने योग का पूरी दुनिया में प्रसार किया है।

जाहिर है प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया की एक अहम शक्ति बनकर उभरा है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत का अहम स्थान है, तो सामरिक क्षेत्र में भी भारत ने अपनी हनक का अहसास कराया है। सामाजिक समस्याओं को सुलझाने में भारत ने जहां अपनी जिम्मेदारी निभाई है, वहीं पर्यावरण संतुलन जैसे मुद्दे पर भी भारत की पहल सराहनीय रही है। आतंकवाद के मुद्दे पर भारत के रुख ने जहां देश-दुनिया को सोचने को मजबूर किया है, वहीं विश्व शांति की ओर भारत के प्रयासों को दुनिया के देशों ने मान्यता दी है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत का दुनिया में जो स्थान बन गया है वह निश्चित ही भारत के बढ़ते प्रभुत्व को बयां करता है। विदेश नीति के तौर पर उनकी उपलब्धियां आंकी जाए तो पीएम मोदी के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का दबदबा लगातार बढ़ रहा है।

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