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गणतंत्र दिवस परेड को लेकर विपक्ष के सियासी एजेंडे का पर्दाफाश

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दिल्ली में राजपथ पर हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड का आयोजन किया जाता है। यह परेड रायसीना हिल से शुरू होकर राजपथ, इंडिया गेट से होते हुए लाल किले पर खत्म होती है। परेड से पहले प्रधानमंत्री इंडिया गेट पर अमर जवान ज्योति और समर स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर इस साल परेड में कुल 75 विमानों के साथ अब तक का सबसे बड़ा और भव्य फ्लाईपास्ट होगा। कोरोना महामारी और उसके प्रोटोकॉल के कारण 75 सालों में पहली बार 26 जनवरी की परेड देरी से शुरू होगी। हर साल गणतंत्र दिवस की परेड सुबह ठीक 10 बजे शुरू होती है, जबकि इस बार 10:30 बजे शुरू होगी। यह भी बताया जा रहा है कि इस बार के गणतंत्र दिवस परेड में कोई भी विदेशी मेहमान बतौर मुख्य अतिथि शामिल नहीं होगा।

परेड में शामिल होने के लिए हर साल विभिन्न राज्यों और मंत्रालयों से झांकी के लिए कई प्रस्ताव प्राप्त होते हैं। इनमें से कुछ झांकियों का चयन निर्धारित चयन प्रक्रिया के तहत किया जाता है। झांकियों की चयन प्रक्रिया में खास दिशानिर्देशों का पालन करते हुए कला, संस्कृति, वास्तुकला, मूर्तिकला, नृत्यकला, डिजाइन और संगीत के क्षेत्र के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों की एक समिति आखिरी फैसला लेती है। झांकियों के चयन के मानक के तौर पर थीम, कान्सेप्ट, डिजाइन, विजुअल इफेक्ट का ध्यान रखा जाता है। प्रतिष्ठित लोगों की एक्सपर्ट कमेटी तय मानकों के आधार पर स्वीकार या रिजेक्ट करती है। इस चयन में सरकार की कोई भूमिका नहीं होती।

मानकों के साथ ही निर्धारित समय का भी ध्यान रखा जाता है। इस साल परेड के लिए राज्यों और मंत्रालयों से कुल 56 प्रस्ताव प्राप्त हुए, इनमें से 21 प्रस्तावों को चुना गया। इस तरह से कुल 35 प्रस्ताव खारिज हुए। अगर राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के हिसाब से देखें तो इस बार उनसे मिले 29 प्रस्तावों में से 12 को मंजूरी दी गई है। तय मानको के अनुसार चयन होने पर भी कुछ राज्यों की ओर से झांकी खारिज किए जाने पर सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्षी राज्यों के नेता इसको लेकर राजनीतिक घमासान मचे रहे हैं। केंद्र सरकार ने परेड के लिए पश्चिम बंगाल सहित कुछ राज्यों की झांकियों को खारिज किए जाने पर किए जा रहे हंगामे को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। सरकार का कहना है कि जिन राज्यों की झांकियां इस बार खारिज हुई हैं, उन्हीं राज्यों की झांकियां पहले इन्हीं मानकों पर सलेक्ट हो चुकीं हैं।

केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आरोपों पर कहा है कि सीपीडब्ल्यूडी की ओर से नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर आधारित झांकी पहले ही चुनी जा चुकी है। ऐसे में बंगाल सरकार की झांकी खारिज होने को नेताजी के अपमान से जोड़ना गलत है। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती 23 जनवरी को अब से पराक्रम दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया है। अब से हर साल गणतंत्र दिवस समारोह की शुरुआत नेताजी की जयंती 23 जनवरी से शुरू कर 30 जनवरी तक किया जाएगा। इतना ही नहीं मोदी सरकार के कार्यकाल में 2016, 2017, 2019, और 2021 में पश्चिम बंगाल की झांकी ने परेड समारोह में भाग लिया था। साथ ही 2016 में बाउल गायकों पर पश्चिम बंगाल की झांकी को सर्वश्रेष्ठ झांकी के रूप में सम्मानित भी किया गया था।

गणतंत्र दिवस परेड में बंगाल
*नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती 23 जनवरी अब पराक्रम दिवस
*गणतंत्र दिवस समारोह की शुरुआत अब नेताजी की जयंती 23 जनवरी से
*वर्ष 2016, 2017, 2019, और 2021 परेड में पश्चिम बंगाल की झांकी शामिल
*वर्ष 2016 में पश्चिम बंगाल की झांकी सर्वश्रेष्ठ झांकी के रूप में सम्मानित

इसी तरह देखा जाए तो तमिलनाडु की झांकियों के प्रस्तावों को वर्ष 2017, 2019, 2020 और 2021 में चुना गया था। केंद्र सरकार का कहना है कि जिन मानकों के आधार पर इस वर्ष इन राज्यों को परेड के लिए नहीं चुना गया, उन्हीं मानकों के आधार पर पहले संबंधित राज्यों की झांकियों को परेड के लिए हरी झंडी मिली थी। इसलिए इस पर राजनीति करना सही नहीं होगा।

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