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भारत के लिए राहत की खबर, दूसरे देशों के मुकाबले कोरोना से मौत की दर बेहद कम, लॉकडाउन पालन करने में सबसे आगे रहे भारतीय

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकारें जिस तरह कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ रही है। उसके सकारात्मक नतीजें भी दिखाई दे रहे हैं। जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी द्वारा जारी एक रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत में दूसरे देशों के मुकाबले मौत की दर बेहद कम है। इस मामले में भारत ने दक्षिण कोरिया, चीन, रूस और अमेरिका सबको पीछे छोड़ दिया है।

भारत में कोरोना से मौत की दर 3.3 प्रतिशत
भारत में कोरोना से मौत की दर सिर्फ 3.3 प्रतिशत है। यानि कोरोना से संक्रमित सौ लोगों में से 4 से भी कम लोगों की मौत हो रही है। अगर इस आकंड़े को जनसंख्या के आधार पर देखा जाए तो हर एक लाख लोगों में सिर्फ 0.09 लोगों की की मौत हो रही है।

भारत ने दक्षिण कोरिया को पीछे छोड़ा
कोरोना संक्रमण को रोकने में हर जगह दक्षिण कोरिया की तारीफ हो रही है। लेकिन भारत ने मौत की दर में उसे भी पीछे छोड़ दिया है। कोरिया में 10780 संक्रमित मरीजों में से अब तक 250 लोगों की मौत हो चुकी है। यानि यहां मौत की दर 2.3 प्रतिशत है। जबकि हर एक लाख लोगों में 0.48 प्रतिशत की मौत हो रही है। भारत के बाद चीन में सबसे कम मौत की दर है। यहां 83959 मामलों में से 5.5 प्रतिशत लोगों की मौत हो रही है। जबकि जनसंख्या के हिसाब से ये आंकड़ा 0.33 प्रतिशत पर बैठता है।

यूरोप में हालात बेहद खराब
यूरोपीय देशों में हाहाकार मचा हुआ है। मौत की दर के मामले में बेल्जियम सबसे आगे हैं। यहां कोरोना के अब तक 49 हजार केस सामने आए है। इसमें से अब तक 15.7 प्रतिशत मरीजों की मौत हो चुकी है। यहां हर एक लाख जनसंख्या पर 67.44 लोग मर रहे हैं। इसके बाद स्पेन (11.5%) और इटली (13.6%) की बारी आती है।

अमेरिका में भी हज़ारों की मौत
उधर अमेरिका में अब तक 65 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि 11 लाख लोग कोरोना से संक्रमित हैं। यहां मौत की दर 5.9 प्रतिशत है। जबकि हर एक लाख लोगों में से 19.85 लोगों की मौत हो रही है।

भारत कोरोना संक्रमण को रोकने में कामयाब  
केंद्रीय पर्यावरण सचिव और कोरोना पर बने एक अधिकार प्राप्त समूह के प्रमुख सीके मिश्रा ने कहा कि लॉकडाउन एवं अन्य प्रयासों से सरकार कोरोना संक्रमण को रोकने में कामयाब रही है। लॉकडाउन से पहले भी संक्रमण की जो दर थी, उसे बढ़ने नहीं दिया गया है बल्कि उसमें थोड़ी कमी ही नजर आ रही है। आने वाले दिनों में इसमें और सुधार होगा। मिश्रा ने कहा कि लॉकडाउन से पहले जब करीब 15 हजार टेस्ट हुए थे तब भी संक्रमण की दर 4% के करीब थी। अब जबकि दस लाख टेस्ट पार कर रहे हैं तब भी करीब-करीब ऐसी स्थिति है बल्कि थोड़ी कमी का ही रुझान है।

सफल रही लक्षित टेस्टिंग नीति
सीके मिश्रा ने कहा कि संक्रमण की दर का स्थिर रहने से साफ है कि हमारी लक्षित टेस्टिंग नीति सफल रही है। दूसरे, लॉकडाउन से बीमारी का फैलाव रुका। तीसरे, जमीन स्तर पर काम करने से भी बीमारी को फैलने से रोकने में सफलता मिली। उन्होंने कहा कि पिछले 40 दिनों के दौरान टेस्टिंग क्षमता में भारी इजाफा किया गया है। 23 मार्च को महज 14,915 टेस्ट हुए थे जबकि शुक्रवार (एक मई) को 70 हजार टेस्ट किए गए थे। शनिवार को भी करीब इतने ही टेस्ट हुए होंगे। टेस्ट में जरूरत के अनुसार लगातार इजाफा हो रहा है।

लॉकडाउन का पालने करने में भारतीय सबसे आगे
कोरोना वायरस के कारण अप्रैल में दुनिया के तमाम देशों में लॉकडाउन रहा। इस पाबंदी का पालन करने में भारतीय सबसे आगे रहे, जबकि संक्रमण के लगातार बढ़ रहे मामलों के बावजूद अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के लोग पार्कों में जमा हुए, दफ्तरों के लिए निकले और नियमों की धज्जियां उड़ाईं। गूगल के डाटा से इसका खुलासा हुआ है।

लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी के निर्देशों का पालन किया
गूगल ने लोगों के फोन लोकेशन का इस्तेमाल कर बताया बताया कि पाबंदियों की वजह से पार्क, बस-रेलवे स्टेशन, किराना-दवा की दुकानों, बाजारों और दफ्तरों में लोगों के आने पर कितना असर पड़ा है। कितने लोग घर पर रहे। यह डाटा एक अप्रैल से 26 अप्रैल के बीच का है। डाटा के विश्लेषण से पता चला कि भारत में ज्यादातर लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी के निर्देशों का पालन किया। स्पेन, इटली में लोगों ने नियमों का बखूबी पालन किया।

सामान्य दिनों की तुलना में कम लोग घरों से निकले
भारत में पार्क जाने वालों की संख्या में 68 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। सामान्य दिनों की तुलना में करीब आधे लोग ही किराना दुकानों में गए। दफ्तर जाने वालों की संख्या में भी 41 प्रतिशत की कमी आई। इतना ही नहीं सामान्य दिनों की तुलना में 22 प्रतिशत ज्यादा लोग घर पर रहे।

विशेषज्ञों ने की लॉकडाउन की तारीफ
भारत में अमेरिका, इटली और स्पेन समेत कई देशों के मुकाबले हालात बेहतर हैं। यहां नए मामले तो सामने आ रहे हैं लेकिन केस दोगुने होने की दर करीब 13 दिन है। विशेषज्ञ लॉकडाउन का सख्ती से पालन होने को इसकी बड़ी वजह मान रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इन कोशिशों के लिए भारत सरकार की तारीफ की है।

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