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मोदी राज में रिकॉर्ड स्तर पर सड़क निर्माण: 2020-21 में प्रतिदिन 37 किलोमीटर राजमार्गों का निर्माण कर बनाया नया कीर्तिमान

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत राजमार्ग निर्माण में सबसे तेज गति से विकास वाला देश बन गया है। केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद से पिछले कुछ वर्षों में देश भर में राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में काफी प्रगति हुई है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2020-21 में प्रतिदिन 37 किलोमीटर राजमार्गों के निर्माण कर नया कीर्तिमान बनाया है। मोदी राज में पिछले 7 वर्षों के दौरान राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई अप्रैल 2014 के 91,287 किलोमीटर से बढ़कर 20 मार्च, 2021 तक 1,37,625 किलोमीटर हो गई है। ये 50 प्रतिशत की वृद्धि है।

चालू वित्त वर्ष 2020-21 में 22 मार्च तक 12,205 किलोमीटर राजमार्गों का निर्माण करके सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने एक और मील का पत्थर हासिल किया है। यह तय लक्ष्य 11,000 किमी से 1,205 किमी अधिक है। राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण की वर्तमान दर साल 2014-15 में लगभग 12 किमी प्रतिदिन की तुलना तीन गुना ज्यादा है। यह उपलब्धि इसलिए खास है क्योंकि कोरोना महामारी की वजह से शुरू के कुछ महीनों में लॉकडाउन के कारण निर्माण गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुईं। सड़क परिवहन और राजमार्ग और एमएसएमई मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को कहा है कि ये उपलब्धियां अभूतपूर्व हैं और दुनिया का कोई भी देश इसका मुकाबला करने में सक्षम नहीं हैं।

पीएम मोदी की पहल पर केंद्र सरकार के पांच साल में किए गए इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण पर एक नजर –

मोदी सरकार में इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में खूब हुए काम, जीवन हुआ आसान
प्रधानमंत्री मोदी ने देश की बागडोर थामने के साथ ही इन्फ्रास्ट्रक्चर को सशक्त बनाने का बीड़ा उठा लिया था। सड़क, हाईवे, रेलवे, वाटरवे और एयरपोर्ट से जुड़ी परियोजनाओं से लेकर आवास योजना तक में उनकी सरकार ने जो तेजी दिखाई है वह एक सक्षम और समर्थ भारत का भरोसा देती है।

3 हजार किमी एक्सप्रेसवे, 4 हजार किमी ग्रीनफील्ड हाइवे 
मोदी सरकार ने भारतमाला प्रॉजेक्ट के दूसरे चरण के तहत एक्सप्रेस-वे बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। दूसरे चरण में सरकार ने कुल तीन हजार किलोमीटर एक्सप्रेस-वे और चार हजार किलोमीटर ग्रीनफील्ड हाइवे बनाने का लक्ष्य तय किया है। नई योजना के तहत वाराणसी-रांची-कोलकाता, इंदौर-मुंबई, बेंगलुरु-पुणे और चेन्नै-त्रिचि के बीच एक्सप्रेस-वे बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके साथ ही ग्रीनफील्ड हाइवे योजना के तहत पटना से राउरकेला, झांसी से रायपुर, सोलापुर से बेलगाम, गोरखपुर से बरेली और वाराणसी से गोरखपुर के बीच नए राजमार्ग बनाए जाएंगे। इन सड़कों के निर्माण के लिए 2024 तक की समयसीमा निर्धारित की गई है।

चीन सीमा पर कुल 61 सड़कों का निर्माण
प्रधानमंत्री मोदी ने केंद्र की सत्ता संभालते ही जहां पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते बेहतर करने की कोशिश की, वहीं देश की सीमाओं पर बुनियादी ढांचे के विकास पर भी जोर दिया। सीमा पर सेना की पहुंच को आसान और तीव्र बनाने के लिए मोदी सरकार ने फंड और अन्य सुविधाएं देने में काफी तेजी दिखाई, जिसका नतीजा है कि चीन सीमा से लगी 61 रणनीतिक सड़कों की कनेक्टिविटी करीब-करीब पूरी कर ली गई है। सरकारी दस्तावेज के अनुसार, अरुणाचल, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर (लद्दाख सहित), उत्तराखंड और सिक्किम में चीन सीमा पर कुल 61 सड़कों का निर्माण चल रहा था। इनमें अरुणाचल में 27, हिमाचल में 5, कश्मीर में 12, उत्तराखंड में 14 और सिक्किम की 3 सड़कें शामिल हैं। इनकी कुल लंबाई 2323.57 किलोमीटर है।

चीन के विरोध के बाद भी गलवान नदी पर बना पुल
पूर्वी लदाख की गलवान घाटी में सेना के इंजीनियरों ने 60 मीटर लंबे उस पुल का निर्माण पूरा कर लिया, जिसे चीन रोकना चाहता था। गलवान नदी पर बने इस पुल से भारत-चीन सीमा के इस संवेदनशील सेक्टर में भारत की स्थिति बहुत मजबूत हो गई है। गलवान नदी पर बने इस पुल की मदद से अब सैनिक वाहनों के साथ नदी पार कर सकते हैं। गलवान पर पुल बनने के बाद भारत के जवान 255 किलोमीटर लंबे रणनीतिक डीबीओ रोड की सुरक्षा कर सकते हैं। यह सड़क दरबुक से दौलत बेग ओल्डी में भारत के आखिरी पोस्ट तक जाती है।

भारत-पाक सीमा पर 2100 किलोमीटर लंबी सड़कें
इसके अलावा, सरकार पाकिस्तान से लगे पंजाब और राजस्थान के इलाकों में 2100 किलोमीटर लंबे मुख्य और संपर्क मार्ग का भी निर्माण जारी है। ये सड़कें भारत के लिए रणनीतिक तौर पर काफी अहम होंगी। राजस्थान में 945 किलोमीटर मुख्य और 533 किलोमीटर संपर्क मार्ग, जबकि पंजाब में 482 किलोमीटर मुख्य और 219 किलोमीटर संपर्क मार्ग बनाए जा रहे हैं।

 

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