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राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के बीच गोवा से निकली कांग्रेस छोड़ो यात्रा, कांग्रेस के आठ विधायक बीजेपी में शामिल, बीजेपी का मिशन-2024 होगा और आसान

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आपको याद ही होगा कि वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस छोड़ते हुए अपनी चिट्ठी में लिखा था कि राहुल गांधी को पहले कांग्रेस जोड़ो यात्रा करनी चाहिये और उसके बाद भी भारत जोड़ो जैसी मुहिम चलानी चाहिये। आजाद की बात कितनी सटीक थी, यह एक बार फिर साबित हो गया। गोवा से खबर आयी है कि इसी साल मार्च में विधानसभा चुनाव जीत कर आये कांग्रेस के 11 विधायकों में से 8 ने बीजेपी ज्वाइन कर ली है। दिलचस्प यह कि कि ऐसे विधायकों में पूर्व मुख्यमंत्री दिगम्बर कामत भी शामिल हैं। कामत समेत कांग्रेस के बाकी उम्मीदवारों के साथ कसमें भी खिलायी गयी थीं। कांग्रेस प्रभारी पी. चिदंबरम की निगरानी में ईश्वर की शपथ लेकर सारे उम्मीदवारों ने शपथ ली थी कि पूरे पांच साल के विधानसभा के कार्यकाल तक वे कांग्रेस नहीं छोड़ेंगे। लेकिन कांग्रेसियों के लिए कस्मे-वादे…सब बातें ही हैं। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के बीच में ही आठ विधायकों ने कांग्रेस छोड़ो-बीजेपी जोड़ो के नारे को चरितार्थ कर दिया।गोवा में ‘कांग्रेस छोड़ो-बीजेपी जोड़ो’ नारे से बीजेपी की मिशन 2024 की राह आसान
राहुल गांधी पता नहीं किस मुहूर्त में भारत जोड़ो यात्रा पर निकले हैं कि उनका खुद का कुनबा टूटता ही जा रहा है। गुजरात के बाद अब कांग्रेस छोड़ो यात्रा गोवा से निकली है, जो निश्चित रूप से कांग्रेस के लिए बड़ा झटका साबित होगी और बीजेपी के लिए मिशन-2024 की राह को और आसान बनाएगी। गोवा में कांग्रेस को लगा यह झटका उसके और कार्यकर्ताओं के मनोबल पर भी असर जरूर डालेगा। भारत जोड़ो यात्रा के जरिए कांग्रेस देश के 12 राज्यों में पदयात्रा निकालकर उम्मीद जता रही थी कि इससे उसके कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ेगा, लेकिन एक के बाद एक संकटों से कांग्रेस उबर ही नहीं पा रही है। जनता के साथ-साथ अब कार्यकर्ताओं का विश्वास भी उठने लगा है, जिसने कांग्रेस थिंक टैंक में चिंताएं बढ़ा दी हैं।राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के बीच गोवा में कांग्रेस को करारा झटका लगा
राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के बीच गोवा में कांग्रेस को करारा झटका लगा है। राज्य में पार्टी के 11 विधायकों में से 8 ने भाजपा का दामन थाम लिया है। इसके चलते अब 40 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के अब तीन ही विधायक बचे हैं। केदार नाइक, संकल्प अमोनकर, राजेश फलदेसाई और रुडोल्फ फर्नांडीस भी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले विधायकों में हैं। कांग्रेस को यह झटका ऐसे वक्त में लगा है, जब राहुल गांधी की लीडरशिप में पार्टी तमिलनाडु से जम्मू-कश्मीर तक भारत जोड़ो यात्रा निकाल रही है। ऐसे में गुलाम नबी आजाद के पार्टी छोड़ने और फिर 8 विधायकों की टूट ने उसे करारा झटका दिया है। कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री दिगंबर कामत ही सात और विधायकों को बीजेपी में ले गए
गोवा कांग्रेस 8 विधायक मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के साथ विधानसभा पहुंचे और स्पीकर रमेश तावड़कर को कांग्रेस से अलग होने की चिट्ठी सौंपी। इसके तुरंत बाद गोवा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सदानंद तनवड़े ने सभी विधायकों को भाजपा की सदस्यता दिलाई। कांग्रेस छोड़ने वाले विधायक गोवा के पूर्व CM दिगंबर कामत, माइकल लोबो, देलिया लोबो, केदार नाइक, राजेश फलदेसाई, एलेक्सो स्काइरिया, संकल्प अमोलकर और रोडोल्फो फर्नांडीज शामिल है। बागी विधायकों की संख्या पार्टी के कुल विधायकों की संख्या के दो-तिहाई से ज्यादा है। इस वजह से इन विधायकों पर दल-बदल कानून लागू नहीं होगा।

सावंत का तंज- ऐसा लगता है Rahul भारत जोड़ो के बजाए कांग्रेस छोड़ो यात्रा पर है
कांग्रेस विधायकों के पार्टी में शामिल होने पर प्रमोद सावंत ने कहा कि मैं सभी का भाजपा में स्वागत करता हूं। सावंत ने इस मौके पर कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा, ‘कांग्रेस ने भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत की है, लेकिन मुझे लगता है कि गोवा में कांग्रेस छोड़ो यात्रा शुरू हो गई है। देश भर में लोग कांग्रेस को छोड़कर भाजपा में शामिल हो रहे हैं।’ गोवा के राजनीतिक इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब कांग्रेस के राज्य में महज तीन ही विधायक बचे हैं। बता दें कि दिगंबर कामत और माइकल लोबो पार्टी से लंबे समय से नाराज बताए जा रहे थे और जुलाई में भी उन्होंने बगावत की कोशिश की थी, लेकिन कुछ विधायकों का साथ नहीं मिला था। काबिले गौर है कि इससे पहले 2019 में कांग्रेस के 15 में से 10 विधायक BJP में शामिल हुए थे। इसमें नेता विपक्ष चंद्रकांत कावलेकर भी शामिल थे। गोवा के CM प्रमोद सावंत ने कांग्रेस के सभी बागी विधायकों को BJP में शामिल करवाया था।कांग्रेस आलाकमान तिकड़ी की ये चार बड़ी गलतियां और 7 महीने में टूट गई पार्टी
गोवा विधानसभा चुनाव के नतीजे 10 मार्च 2022 को आए थे। इनमें कांग्रेस को 40 में से 11 सीटें मिली थीं, लेकिन 7 महीने के भीतर ही पार्टी टूट गई। इसके पीछे की वजह कांग्रेस की 3 बड़ी गलतियां है। इन्हें यहां समझिए…
1. दिगंबर कामत को नेता प्रतिपक्ष न बनाना- दरअसल, कांग्रेस को कमजोर करने के लिए अब किसी बाहरी की जरूरत नहीं है। कांग्रेस आलाकमान के खुद के फैसले ही कांग्रेस को कमजोर करने का काम कर रहे हैं। चुनाव परिणाम आने के बाद कांग्रेस ने कामत के बजाए माइकल लोबो को नेता प्रतिपक्ष बनाया। नेता प्रतिपक्ष की रेस में शामिल पूर्व मुख्यमंत्री दिगंबर कामत कांग्रेस हाईकमान के इस फैसले के खिलाफ थे। उनकी नाराजगी को देखकर तय माना जा रहा था कि कांग्रेस में टूट होगी।
2. अध्यक्ष पर एक्शन, प्रभारी पर कार्रवाई नहीं- अपनी ही पार्टी में पिक एंड चूज की नीति कांग्रेस पर भारी पड़ रही है। दरअसल, हार के बाद हाईकमान तिकड़ी ने प्रदेश अध्यक्ष गिरीश चोडनकर से तो इस्तीफा ले लिया, लेकिन प्रदेश प्रभारी दिनेश गुंडूराव पर कोई कार्रवाई नहीं की। गुंडूराव से पार्टी के कई सीनियर चुनाव के पहले से नाराज चल रहे थे। इसी वजह से पार्टी ने पी चिदंबरम को कांग्रेस का ऑब्जर्वर बनाकर भेजा था। लेकिन पी चिदंबरम पार्टी को टूटने से रोक नहीं पाए।3. नए अध्यक्ष पर गुटबाजी हुई तो एक्शन नहीं लिया– गोवा कांग्रेस के नए अध्यक्ष अमित पाटकर को लेकर भी पार्टी में गुटबाजी तेज हुई थी, जिसका असर राष्ट्रपति चुनाव में दिखा। पार्टी के 4 विधायकों ने उस वक्त क्रॉस वोटिंग की थी। कांग्रेस ने इस पर भी डैमेज कंट्रोल का कदम नहीं उठाया।
4. चुनाव से पहले राहुल ने दिलाई थी शपथ- अपने ही उम्मीदवारों पर अविश्वास के माहौल ने भी कांग्रेसियों को दिल से नाराज किया। विधानसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी ने कांग्रेस के सभी उम्मीदवारों को 5 साल तक पार्टी नहीं छोड़ने की शपथ दिलाई थी। लोगों और कार्यकर्ताओं में इसका मैसेज यह गया कि राहुल गांधी को अपने ही कांग्रेसियों पर विश्वास नहीं है। उन्होंने सभी उम्मीदवारों से एक शपथ पत्र पर हस्ताक्षर भी करवाए थे। जबरन हलफनामा लेकर विधायकों से लिखवा तो लिया कि वे 5 साल तक पार्टी नहीं छोड़ेंगे, लेकिन इसका असर उल्टा ही हुआ।

 

 

 

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