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प्रधानमंत्री मोदी ने दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा का किया अनावरण, महाकाल एक्सप्रेस को दिखाई हरी झंडी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को वाराणसी-चंदौली की सीमा पर स्थित पड़ाव में एकात्मवाद के प्रणेता माने जाने वाले पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्थल संग्रहालय का लोकार्पण किया और यहां स्थापित पंडित जी की 63 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया। प्रधानमंत्री मोदी ने स्मारक स्थल का अवलोकन करने के बाद 1250 करोड़ रुपये की तीस से अधिक परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। यहीं से तीन ज्योर्तिलिंगों को जोड़ने वाले आईआरसीटी की तीसरी कारपोरेट ट्रेन महाकाल एक्सप्रेस को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हरी झंडी भी दिखाई।

प्रधानमंत्री मोदी ने अनावरण कार्यक्रम में मौजूद लोगों को संबोधित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि तमाम दबाव के बावजूद उनकी सरकार फैसले पर अडिग है। उन्होंने कहा कि चाहे अनुच्छेद 370 पर फैसला हो या फिर नागरिकता संशोधन कानून पर फैसला हो, यह देश हित में जरूरी था। दबाव के बावजूद हम अपने फैसले के साथ खड़े हैं और इसके साथ बने रहेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत भोजपुरी में करते हुए कहा कि पड़ाव का यह स्मारक और पंडित दीन दयाल उपाध्याय की भव्य प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी, दीन दयाल जी की नैतिकता और विचार युवाओं को प्रेरित करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने लोकार्पित होने वाली योजनाओं और इसके लाभ के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि काशी सहित इस पूरे पूर्वांचल क्षेत्र में हो रहे कनेक्टिविटी के काम आपकी सुविधा के साथ-साथ रोज़गार निर्माण के भी बड़े साधन तैयार कर रहे हैं। विशेषतौर पर पर्यटन आधारित रोजगार, जिसको लेकर काशी और आसपास के क्षेत्रों में बहुत बड़ी संभावना है, उनको बल मिल रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज जब भारत में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की बात हो रही है तो पर्यटन उसका अहम हिस्सा है। उन्होंने बताया भारत के पास हेरिटेज पर्यटन की बहुत बड़ी ताकत है। काशी समेत आस्था से जुड़े तमाम स्थानों को नई तकनीक का उपयोग करके विकसित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मां गंगा जब काशी में प्रवेश करती हैं, तो वो उन्मुक्त होकर अपनी दोनों भुजाओं को फैला देतीं हैं। एक भुजा पर धर्म, दर्शन और आध्यात्म की संस्कृति विकसित हुई है और दूसरी भुजा इस पार पड़ाव में सेवा, त्याग, समर्पण और तपस्या, मूर्तिमान हुई है। आज इस क्षेत्र, दीनदयाल जी की स्मृति स्थली का जुड़ना, अपने नाम पड़ाव की सार्थकता को और सशक्त कर रहा है।

ऐसा पड़ाव जहां, सेवा, त्याग, विराग और लोकहित सभी एक साथ जुड़कर एक दर्शनीय स्थल के रूप में विकसित होंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बीते 5 वर्षों में वाराणसी जनपद में लगभग 25 हज़ार करोड़ रुपये के विकास कार्य या तो पूरे हो चुके हैं, या काम चल रहा है। देवी अहिल्याबाई होलकर के बाद इतने बड़े पैमाने पर काशी नगरी के लिए काम हो रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा आज काशी आने वाला हर श्रद्धालु सुखद अनुभव लेकर यहां से जाता है। कुछ दिन पहले श्रीलंका के राष्ट्रपति भी यहां आए थे, तो यहां के अद्भुत वातावरण, दिव्य अनुभूति से मंत्रमुग्ध थे। उन्होंने बताया काशी विश्वनाथ धाम में तमाम कार्य तेजी से पूरे किए जा रहे हैं। बहुत ही जल्दी से बाबा का दिव्य प्रांगण एक आकर्षक और भव्य रूप में हम सभी के सामने आएगा। इसी तरह अयोध्या में भी श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर के निर्माण के लिए ट्रस्ट का गठन हो चुका है।

आइए एक नजर डालते हैं पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्थल संग्रहालय की खासियत पर…

पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा के ठीक सामने कुंड का निर्माण किया गया है, जिसमें दो फुट जल सदैव रहेगा, जिसे प्रतिमा की सुंदरता के लिए बनाया गया है। कुंड की खासियत यह है कि कुंड में जैसे ही दो फुट से ज्यादा पानी होगा, पानी फिल्टरेशन होकर एसटीपी के माध्यम से पुन: फाउंटेन से होकर कुंड में झरने के रूप में गिरेगा।

यहां पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, गोष्ठी सहित अन्य छोटे कार्यक्रमों के लिए एम्फी थिएटर का निर्माण कराया गया है। बीचों बीच लगभग एक गोलाकार स्थल बनाया गया है, जिसके चारों तरफ छह सीढ़ियां बनाई गई हैं, जिन पर व्हाइट और ग्रीन ग्रेनाइट लगाया गया है। एम्पीथियेटर से सटा ही चेंजिंग रूम है। पार्क ग्रीन ग्रास, फूलों और पौधों से सजाया गया है, जिससे स्मृति स्थल में घूमने आए पर्यटकों को सुकून मिले। पार्क में टहलने के लिए पाथवे बनाया गया है, जिसके किनारे ईंट से डिजाइन बनाई गई है।

पर्यटकों को लुभाने के लिए प्रतिमा के सामने एक सेल्फी पॉइंट्स बनाया गया है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्थल में इंटरप्रिटेशन वाल पर पंडित जी के विचारों और सिद्धांतों को कलाकृतियों के माध्यम से उकेरा गया है। साथ ही पंडित जी के कुछ चित्र भी बनाए गए हैं। 

इस पूरे स्मृति स्थल को डिजाइन करने वाले आर्किटेक्ट आदित्य मित्र के मुताबिक स्मृति स्थल के निर्माण की परिकल्पना उस वक्त तैयार की गई, जब दीनदयाल उपाध्याय की जन्म शताब्दी मनाई जा रही थी। ऐसी मान्यता है कि यहीं पड़ाव के समीप ही उन्होंने अंतिम सांस ली थी। ऐसे में अंतिम पड़ाव के रूप में इसे यहां तैयार किया गया है। गौरतलब है कि गृहमंत्री और तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने पांच अगस्त, 2018 को चंदौली जिले में मुगलसराय स्टेशन को पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन करने की घोषणा की थी। इस दौरान जनसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंडित दीनदयाल स्मृति स्थल की घोषणा करते हुए गृहमंत्री के हाथों शिलान्यास करवाया था। पड़ाव चौराहे पर गन्ना विकास संस्थान की करीब 3.67 हेक्टेयर जमीन पर दीनदयाल उपाध्याय के स्मृति स्थल निर्माण के लिए 74 करोड़ रुपये देने की घोषणा की थी।

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