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ईंधन की किल्लत नहीं होने देगी सरकार: पश्चिम एशिया संकट पर प्रधानमंत्री मोदी का देश को भरोसा

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पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को बड़ी राहत दी है। प्रधानमंत्री मोदी ने आज सोमवार 23 मार्च को लोकसभा में दिए अपने विशेष संबोधन में जोर देकर कहा कि दुनिया भर में उथल-पुथल के बावजूद भारत में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की सप्लाई में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने सदन को बताया कि हालांकि भारत अपनी जरूरत का 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है, लेकिन सरकार ने एक ठोस रणनीति के तहत बैकअप प्लान तैयार किया है। उन्होंने कहा कि देश के इकोनॉमिक फंडामेंटल्स मजबूत हैं और हम किसी भी अनिश्चितता से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ईरान-इजरायल संघर्ष का असर लंबे समय तक खिंच सकता है। उन्होंने इसकी तुलना कोरोना काल की चुनौतियों से करते हुए कहा कि हमें उसी तरह की मानसिक और रणनीतिक तैयारी रखनी होगी। सरकार शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म, दोनों तरह के प्रभावों पर नजर रखने के लिए एक इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप बना चुकी है जो रोज हालात की समीक्षा करता है।

पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में भारत ने तेल आयात के लिए अपने विकल्पों को बढ़ाया है। पहले हम 27 देशों पर निर्भर थे, लेकिन आज 41 देशों से तेल मंगा रहे हैं। इसके अलावा, भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन का स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व भी मौजूद है, जो आपात स्थिति में देश की लाइफलाइन बनेगा।

प्रधानमंत्री ने किसानों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि ग्लोबल मार्केट में खाद की कीमतें बढ़ने के बावजूद, सरकार इसका बोझ किसानों पर नहीं आने देगी। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे कोरोना के समय 3000 रुपये की यूरिया बोरी किसानों को 300 रुपये से भी कम में दी गई थी। साथ ही, इथेनॉल ब्लेंडिंग और सोलर पंपों जैसे विकल्पों ने तेल पर हमारी निर्भरता को कम किया है।

लोकसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत हमेशा शांति का पक्षधर रहा है। उन्होंने बताया कि वह खुद खाड़ी देशों के राष्ट्राध्यक्षों के संपर्क में हैं और वहां रहने वाले करीब एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में रुकावट और कमर्शियल जहाजों पर हमले भारत को कतई स्वीकार्य नहीं हैं।

संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यों को सख्त निर्देश दिए कि युद्ध की आड़ में कालाबाजारी या जमाखोरी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने जनता से भी अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और एकजुट होकर इस वैश्विक संकट का सामना करें।

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