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सपा के गढ़ को भेदने की तैयारी में बीजेपी, चौधरी हरमोहन सिंह यादव की दसवीं पुण्‍यतिथि कार्यक्रम में शामिल होंगे पीएम मोदी

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समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव का गठबंधन लगातार बिखरता जा रहा है। यहां तक कि उनकी कार्यशैली की वजह से उनके पुराने सहयोगियों और समर्थकों का सपा से मोह भंग हो चुका है। बीजेपी इस मौके का फायदा उठाना चहती है। इस लिए सपा के दरकते गढ़ को भेदने के लिए तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 25 जुलाई को सपा संरक्षक मुलायम सिंह के दोस्त और सेंट्रल यूपी के कद्दावर नेता रहे स्व. चौधरी हरमोहन सिंह यादव की दसवीं पुण्यतिथि कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं। इस परिवार से मुलायम सिंह यादव का करीब 50 साल पुराना रिश्ता टूटने की कगार पर है। कहा जा रहा है कि मिलने के लिए समय नहीं देने पर सुखराम यादव सपा मुखिया अखिलेश यादव से नाराज हैं। 

सुखराम सिंह यादव थाम सकते हैं बीजेपी का दामन

दरअसल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चौ. हरमोहन यादव की पुण्यतिथि पर पूर्व सपा सांसद सुखराम यादव ने आंमत्रित किया है। प्रधानमंत्री मोदी को आमंत्रित करने के सवाल पर सुखराम ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी पूरे देश के प्रतिनिधि हैं। वह किसी पार्टी, जाति या धर्म के प्रधानमंत्री नहीं हैं। अभी मैं विदेश गया था। प्रधानमंत्री की वजह से वहां भारत की छवि देख खुशी हुई और समझ आया कि विदेशों में भारत का सम्मान बढ़ा है। बताया जा रहा है कि सुखराम सिंह यादव बीजेपी का दामन थाम सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के आने के बाद से बीजेपी से इस परिवार का रिश्ता और प्रगाढ़ हो जाएगा।

मिथक तोड़ने के लिए प्रधानमंत्री मोदी का कानपुर दौरा

बीजेपी ने अखिलेश यादव को झटका देने के लिए योजना तैयार कर ली है। प्रधानमंत्री मोदी का कानपुर कार्यक्रम इसी योजना का हिस्सा बताया जा रहा है। यादवों का एक धड़ा कानपुर के चौधरी हरमोहन सिंह यादव के परिवार की अगुवायी में बीजेपी से हाथ मिलाएगा। शुरुआत चौधरी हरमोहन के पौत्र मोहित यादव के बीजेपी में शामिल होने के साथ ही हो चुकी है। फिलहाल यूपी की राजनीति में यादवों की पहचान सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव और उनके परिवार से ही है, यही मिथक तोड़ने को प्रधानमंत्री मोदी का कानपुर दौरा प्रस्तावित है। सुखराम बीजेपी में यादवों का चेहरा हो सकते हैं।

यूपी में 75 प्रतिशत घोसी और 25 प्रतिशत कमरिया यादव

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में यादवों की दो उपजातियां कमरिया और घोसी हैं। एक अनुमान के मुताबिक करीब 75 प्रतिशत घोसी तो 25 प्रतिशत के करीब कमरिया यादव है। मुलायम कमरिया जबकि हरमोहन घोसी है। घोसी वर्ग के लोगों को टीस है कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में उन्हें बहुत कुछ नहीं मिला, जबकि मुलायम सिंह यादव को राजनीति में स्थापित करने में इस धड़े की बड़ी भूमिका रही है। मोहित यादव आरोप लगाते हैं कि सपा के शासनकाल में तीन चौथाई से अधिक कमरिया यादवों की भरती हुई। बीजेपी शासनकाल में भरती पाए यादवों का यह आंकड़ा उलट गया। मोहित घोसियों को बीजेपी की ओर एकजुट करने में लगे हैं। यूपी विधानसभा चुनाव में घोसियों के वोट बीजेपी में भी गए थे।

 

 

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