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प्रधानमंत्री मोदी ने राजस्थान में किया 4 मेडिकल कालेजों का शिलान्यास, कहा- हेल्थ सेक्टर की कमियों को दूर करने के प्रयास जारी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज, 3o सितंबर को राजस्थान में चार मेडिकल कालेजों का शिलान्यास किया और पेट्रोकेमिकल्स टेक्नोलाजी इंस्टीट्यूट का उद्धाटन भी किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हम देश के स्वास्थ्य क्षेत्र को बदलने के लिए एक नई राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति पर काम कर रहे हैं। स्वच्छ भारत अभियान से आयुष्मान भारत और अब आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन इसी का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा, ‘100 साल की सबसे बड़ी महामारी ने दुनिया के हेल्थ सेक्टर के सामने अनेक चुनौतियां खड़ी कर दी, और ये महामारी बहुत कुछ सिखाया भी है और बहुत कुछ सिखा रही है। हर देश अपने-अपने तरीके से इस संकट से निपटने में जुटा है। भारत ने इस आपदा में आत्मनिर्भरता का, अपने सामर्थ्य में बढ़ोतरी का संकल्प लिया है। राजस्थान में 4 नए मेडिकल कॉलेज के निर्माण के कार्य का प्रारंभ और जयपुर में इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल टेक्नॉलॉजी का उद्घाटन, इसी दिशा में एक अहम कदम है।’

उन्होंने कहा, ‘साल 2014 के बाद से राजस्थान में 23 नए मेडिकल कॉलेजों के लिए केंद्र सरकार ने स्वीकृति दी थी। इनमें से 7 मेडिकल कॉलेज काम करना शुरू कर चुके हैं। और आज बांसवाड़ा, सिरोही, हनुमानगढ़ और दौसा में नए मेडिकल कॉलेज के निर्माण की शुरुआत हुई है।’ प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘हम सभी ने देखा है कि कुछ दशक पहले देश की मेडिकल व्यवस्थाओं का क्या हाल था। 2001 में, आज से 20 साल पहलेजब मुझे गुजरात ने मुख्यमंत्री के तौर परसेवा का अवसर दिया, तो हेल्थ सेक्टर की स्थिति वहां की भी बहुत चुनौतियों से भरी हुई थी। चाहे वो मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर हो, मेडिकल शिक्षा हो, या फिर इलाज की सुविधाएं हो, हर पहलू पर तेजी से काम करने की जरूरत थी। हमने चुनौती को स्वीकारा और मिलकर स्थितियों को बदलने की कोशिश की। गुजरात में उस समय मुख्यमंत्री अमृतम योजनाके तहत गरीब परिवारों को 2 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की सुविधा शुरु की गई थी। गर्भवती महिलाओं को अस्पतालों में डिलीवरी के लिए चिरंजीवी योजना के तहत प्रोत्साहित किया गया, जिससे माताओं और बच्चों का जीवन बचाने में बहुत अधिक सफलता मिली। मेडिकल शिक्षा के मामले में भी बीते 2 दशकों के अथक प्रयासों से गुजरात ने मेडिकल सीटों में लगभग 6 गुना वृद्धि दर्ज की है।’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘बीते 6-7 सालों से उनको दूर करने की निरंतर कोशिश की जा रही है।और हम सबको मालूम है हमारा संविधान के तहत जो फेडरल स्ट्रक्चर की व्यवस्था है। उसमें हेल्थ ये राज्य का विषय है, राज्य की जिम्मेवारी है। लेकिन मैं राज्य का मुखयमंत्री रहा लम्बे समय तक। तो क्या कठिनाईयां है वो मुझे मालूम थी। देश के स्वास्थ्य सेक्टर को ट्रांसफॉर्म करने के लिए हमने एक राष्ट्रीय अप्रोच, एक नई राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति पर काम किया। स्वच्छ भारत अभियान से लेकर आयुष्मान भारत और अब आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन तक, ऐसे अनेक प्रयास इसी का हिस्सा हैं।’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘आज हम संतोष के साथ कह सकते हैं कि 6 एम्स से आगे बढ़कर आज भारत 22 से ज्यादा एम्स के सशक्त नेटवर्क की तरफ बढ़ रहा है। इन 6-7 सालों में 170 से अधिक नए मेडिकल कॉलेज तैयार हो चुके हैं और 100 से ज्यादा नए मेडिकल कॉलेज पर काम तेज़ी से चल रहा है। साल 2014 में देश में मेडिकल की अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट की कुल सीटें 82 हजार के करीब थीं। आज इनकी संख्या बढ़कर एक लाख 40 हजार सीट तक पहुंच रही है। यानि आज ज्यादा नौजवानों को डॉक्टर बनने का मौका मिल रहा है, आज पहले से कहीं अधिक नौजवान डॉक्टर बन रहे हैं। मेडिकल एजुकेशन की इस तेज प्रगति का बहुत बड़ा लाभ राजस्थान को भी मिला है।।’

उन्होंने कहा, ‘हमारा प्रयास ये है कि हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज या फिर पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन देने वाला कम से कम एक संस्थान जरूर हो। इसके लिए मेडिकल शिक्षा से जुड़ी गवर्नेंस से लेकर दूसरी नीतियों, कानूनों, संस्थानों में बीते वर्षों के दौरान बड़े रिफॉर्म्स किए गए हैं। मेडिकल एजुकेशन और हेल्थ सर्विस डिलिवरी में जो गैप था, उसको लगातार कम किया जा रहा है। बड़े अस्पताल, चाहे वो सरकारी हो या प्राइवेट, उनके संसाधनों का नए डॉक्टर, नए पैरामेडिक्स तैयार करने में ज्यादा से ज्यादा उपयोग हो, इस पर सरकार का बहुत जोर है। तीन-चार दिन पहले शुरू हुआ आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन, देश के कोने-कोने तक स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाने में बहुत मदद करेगा। अच्छे अस्पताल, टेस्टिंग लैब्स, फार्मेसी, डॉक्टरों से अपाइंटमेंट, सभी एक क्लिक पर होगा। इससे मरीजों को अपना हेल्थ रिकॉर्ड संभालकर रखने की भी एक सुविधा मिल जाएगी।’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी स्किल्ड मैनपावर का सीधा असर प्रभावी स्वास्थ्य सेवाओं पर होता है। इसे हमने इस कोरोना काल में औऱ ज्यादा महसूस किया है।केंद्र सरकार के सबको वैक्सीन-मुफ्त वैक्सीनअभियान की सफलता इसी का प्रतिबिंब है। आज भारत में कोरोना वैक्सीन की 88 करोड़ से अधिक डोज लग चुकी है। राजस्थान में भी 5 करोड़ से अधिक वैक्सीन डोज लग चुकी है।

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