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भरोसा अटूट और जादू कायम : 50 प्रतिशत से अधिक विपक्षी मतदाता और 58 प्रतिशत लोग पीएम मोदी को मानते हैं किसानों के शुभचिंतक

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देश में आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नाम आशा, भरोसा और त्याग का प्रतीक बन गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी अभूतपूर्व सक्रियता से अपने आप को एक ऐसे नेता के रूप में स्थापित किया है, जो अहंकार मुक्त होकर देश और जनहित में अपनी जिम्मेदारियों को निभा रहा है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री मोदी की स्वीकारोक्ति इस कदर है कि उनके हर फैसले पर जनता मुहर लगा देती है। पिछले सात साल में नोटबंदी, जनता कर्फ्यू और लॉकडाउन जैसे कठोर फैसले हों या ताली और थाली बजाना हो या फिर घर-घर दीप जलाना हो, जनता ने फैसले पर सवाल उठाए बिना प्रधानमंत्री मोदी की एक आवाज पर भरोसा जताया, जो आज भी अटूट है। इसकी पुष्टि आईएएनएस-सी वोटर स्नैप ओपेनियन पोल से होती है।

19 नवंबर, 2021 को तीन कृषि कानूनों को रद्द करने की घोषणा के कुछ ही घंटों के अंदर कराये गए सर्वे से पता चलता है कि जनता पर प्रधानमंत्री मोदी का जादू कायम है। सर्व में 58.6 प्रतिशत लोगों ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी वास्तव में किसानों का हित चाहने वाले यानि किसान हितैषी हैं। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि 50 प्रतिशत से अधिक विपक्षी मतदाता भी प्रधानमंत्री मोदी को किसान समर्थक मानते हैं। प्रधानमंत्री मोदी पर देशवासियों का भरोसा और मजबूत हुआ है, क्योंकि प्रधानमंत्री को एक ऐसे नेता के रूप में देखते हैं, जो व्यक्तिगत और परिवार के हित में फैसले नहीं लेते हैं, बल्कि देशहित में लेते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने तीन कृषि कानूनों को वापस लेकर फिर साबित किया है कि किसानों के सबसे बड़े शुभचिंतक वही हैं।

कृषि कानून वापसी के फैसले पर 52% ने लगाई मुहर

देश भर में किए गए इस सर्वेक्षण में 52 प्रतिशत से भी अधिक लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी के फैसले को सही ठहराया। 40.7 प्रतिशत लोगों ने कृषि कानून को रद्द करने का श्रेय मोदी सरकार को दिया। सर्वे में शामिल 55.1 प्रतिशत लोगों ने कहा कि 2022 में उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी सरकारों को इसका सियासी फायदा मिलने वाला है।

कानून विरोध को 56% ने बताया राजनीतिक साजिश

तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन की शुरुआत से ही इसके पीछे राजनीतिक साजिश की बात कही जा रही थी। इस सर्वे ने भी इसे सही साबित किया है। 56.7 प्रतिशत लोगों का मानना था कि कृषि कानूनों का विरोध केवल एनडीए सरकार को कमजोर करने की राजनीतिक साजिश का हिस्सा है। 50 प्रतिशत से अधिक लोगों ने माना कि मोदी सरकार द्वारा लाए गए तीनों कृषि कानून अच्छे और ये किसानों के हित में थे।

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