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जो नहीं हो पाया सालों से, पूरा हुआ मोदी के कार्यकालों में

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मोदी सरकार ने ऐसी उपलब्धियों को हासिल किया है, जिनके बारे में सोचने से ही लोग मुंह फेर लेते थे। मोदी सरकार ने साहसिक कदम उठाते हुए रक्षा क्षेत्र से लेकर सामजिक न्याय, भारतीय संस्कृति, आर्थिक सुधार, नागरिकता और अधिकार जैसे मामलों में मिसाल पेश की। आइए मोदी सरकार द्वारा किए गए साहसिक फैसलों पर एक नजर डालते हैं।

रक्षा क्षेत्र में मोदी सरकार

वन रैंक वन पेंशन योजना

वन रैंक वन पेंशन योजना लागू करना सभी सैनिकों की सेवा और त्याग के प्रति एक बड़ा प्रयास था। कांग्रेस के शासनकाल में इस विषय पर किसी भी विचार-विमर्श की योजना को वर्ष 1973 में ही ठंडे बस्ते में डाल दिया गया थी, लेकिन मोदी सरकार के सत्ता में आते ही इस पर नए सिरे से विचार हुआ और योजना को लागू कर दिया गया। इससे यह व्यवस्था सुनिश्चित हो गई कि सैनिकों व उनके आश्रितों को न केवल उनके सेवाकाल के दौरान आर्थिक संबल मिलेगा, बल्कि सेवाकाल समाप्त हो जाने के बाद भी उनकी स्थिति संतोषजनक बनी रहेगी। इससे अलग-अलग समय पर सेवामुक्त हुए दो सैनिकों की पेंशन का अंतर समाप्त हो गया। यह असमानता सेना के सभी पदों पर थी, जिस पर कांग्रेस के शासनकाल में कभी कोई प्रयास तक नहीं किया गया। 2006 से पहले तक रिटायर हुए सैनिक को अपने से जूनियर पद पर तैनात सैनिक से भी कम पेंशन प्राप्त हो रही थी। इस भारी अंतर के परिणामस्वरूप सैनिकों के मन में भारी असंतोष था। मोदी सरकार के प्रयासों ने इसे समानता प्रदान की।

वन रैंक वन पेंशन से देशभर के 19 लाख पूर्व सैनिकों को इसका लाभ मिल चुका है। सिर्फ हरियाणा में ही लगभग 2 लाख पूर्व सैनिकों के परिवारों के खातों में OROP का 900 करोड़ रुपया जमा हो चुका है। सरकार ने शहीद सैनिकों के बच्चों की स्कॉलरशिप बढ़ाई है और इसके दायरे में पुलिस और अन्य केंद्रीय पुलिस बलों को भी लाया गया है।

देश को मिला पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ (CDS)

जनरल बिपिन रावत को देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) नियुक्त किया गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने15 अगस्त 2019 को सीडीएस के पद का ऐलान किया था। सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 24 दिसंबर को सीडीएस का पद बनाए जाने को मंजूरी दी थी जो तीनों सेनाओं से जुड़े सभी मामलों में रक्षा मंत्री के प्रधान सैन्य सलाहकार के तौर पर काम करेगा। जनरल रावत बतौर सीडीएस रक्षा मंत्रालय और तीनों सेनाओं के बीच समन्वयक की भूमिका निभाएंगे। उनका ओहदा 4 स्टार जनरल का होगा। इसके लिए अधिकतम आयु सीमा 65 साल है।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ”सरकार ने जनरल रावत को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ नियुक्त करने का फैसला किया है जो 31 दिसंबर से आगामी आदेश तक प्रभावी होगा और जनरल रावत की सेवा अवधि 31 दिसंबर से तब तक के लिए बढ़ाई जाती है, जब तक वह सीडीएस कार्यालय में रहेंगे। सरकार द्वारा नियमों में संशोधन करके सेवानिवृत्त की आयु बढ़ाकर 65 वर्ष करने के बाद जनरल रावत तीन साल के लिए सीडीएस के तौर सेवाएं दे सकेंगे।

स्वदेशी आईएनएस खंडेरी पनडुब्बी बनी नौसेना की शान

आईएनएस खंडेरी भारत की दूसरी स्कार्पियन-वर्ग की मारक पनडुब्बी है, जिसे पी-17 शिवालिक वर्ग के युद्धपोत के साथ नौसेना में शामिल किया गया। आईएनएस खंडेरी के नौसेना में शामिल होने से भारत की नेवी की क्षमता में कई गुणा इजाफा होगा। आईएनएस खंडेरी में 40 से 45 दिनों तक सफर करने की क्षमता है।

मुंबई के समुद्र तट की रक्षा के लिए नौसेना की दूसरी सबसे अत्याधुनिक पनडुब्बी में तट पर ही रह कर करीब 300 किलोमीटर दूर तक के दुश्मन जहाज को नष्ट करने की क्षमता है। समुद्र की गहराई में दो साल के परीक्षण के बाद खंडेरी को नौसेना को सौंपा गया है। खंडेरी भारतीय समुद्री सीमा की सुरक्षा करने में पूरी तरह से सक्षम है और साथ ही देश में निर्मित यह पनडुब्बी एक घंटे में 35 किलोमीटर की दूरी आसानी से तय कर सकती है।

वायु सेना को मिला पहला राफेल

चीन और पाकिस्तान की चुनौतियों को देखते हुए और वायुसेना द्वारा प्रयोग किये जा रहे मिग और सुखोई लड़ाकू विमानों के पुराने होते जाने के कारण इन्हें जल्द से जल्द बदलने की जरूरत थी। यह देखते हुए भी कांग्रेस सरकार लापरवाहियां बरतने में लगी रही। उसके अनिर्णय के कारण राफेल डील खत्म होने की कगार पर पहुंच गई और यह स्थिति मोदी सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती के रूप में आ खड़ी हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने बिना वक्त बरबाद किये त्वरित निर्णय लिया और ये लड़ाकू विमान जल्द से जल्द वायुसेना को मिल सके इस प्रक्रिया को सुनिश्चिचत कर दिया।जिस काम को मनममोहन सिंह की सरकार दस सालों में नहीं कर सकी उसी काम को प्रधानमंत्री मोदी ने कुछ महीनों में पूरा करके देश को सुरक्षित करने की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। कांग्रेस की सरकार फ्लाईवे कडींशन में 18 राफेल विमानों को फ्रांस की डासाल्ट कंपनी से खरीदना चाहती थी। कंपनी से खरीदने पर एक राफेल विमान की कीमत 100 मिलियन पड़ रही थी और इन विमानों में भारतीय वायुसेना की जरूरतों के अनुरूप तकनीकें और मिसाइलें भी नहीं थीं। इस स्थिति में भी मनमोहन सिंह की सरकार इन विमानों को दस साल में भी खरीद नहीं सकी। प्रधानमंत्री मोदी ने इस पूरी खरीद प्रक्रिया में हो रही देरी को खत्म करने के लिए सीधे फ्रांस सरकार से बातचीत करके, खरीदने का निर्णय लिया। फ्रांस की सरकार से सीधे राफेल विमान खरीदने से एक विमान की कीमत 90 मिलियन हो गई और विमानों में भारतीय वायुसेना की जरूरतों के अनुसार तकनीकें और मिसाइलें भी मिल गईं। अब जो मिसाइलें राफेल विमानों में लगेंगी उससे भारतीय सीमा के अंदर से ही चीन के तिब्बत तक मिसाइलों से निशाना लगाया जा सकता है। इस करार से राफेल विमानों के रखरखाव की जिम्मेदारी भी कंपनी के ऊपर ही है।

सामाजिक न्याय में मोदी सरकार 

ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा

इसके लिए 123वां संविधान संशोधन करके संविधान में एक नया अनुच्छेद 338बी जोड़ा गया। आयोग को अब सिविल कोर्ट के अधिकार प्राप्त होंगे और वह देश भर से किसी भी व्यक्ति को सम्मन कर सकता है और उसे शपथ के तहत बयान देने को कह सकता है।

उसे अब पिछड़ी जातियों की स्थिति का अध्ययन करने और उनकी स्थिति सुधारने के बारे में सुझाव देने तथा उनके अधिकारों के उल्लंघन के मामलों की सुनवाई करने का भी अधिकार होगा। संविधान संशोधन विधेयक पर जो भी विवाद थे वे लोकसभा में हल हो गए और राज्यसभा में ये आम राय से पारित हुआ है। इस आयोग को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग या राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के बराबर का दर्जा मिल गया है।

तीन तलाक की प्रथा खत्म

2014 में जब पीएम मोदी ने पहली बार देश की बागडोर संभाली थी, तभी से महिला सशक्तिकरण, महिलाओं को समाज में सम्मान दिलाना, महिलाओं की आर्थिक उन्नति, महिलाओं की शिक्षा उनके एजेंडे की प्राथमिकता में रहा। आज जिस तीन तलाक बिल को संसद के दोनों सदनों को मंजूरी मिली है और 1400 साल पुरानी इस कुप्रथा से करोड़ों मुस्लिम महिलाओं को मुक्ति मिली।मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक के दलदल से निकालने वाले बिल को लेकर हर बार राज्यसभा में हार का सामना करना पड़ता था, लेकिन पीएम मोदी ने कभी हार नहीं मानी। मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए पीएम मोदी हमेशा आगे रहे और आखिर उन्हें कामयाबी मिल ही गई। आज देशभर की करोड़ों मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक की बेड़ियों से आजादी मिल चुकी है।

सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण

जाति की राजनीति करने वाले नेताओं ने वर्षों से सामान्य वर्ग को आरक्षण देने का सिर्फ शिगूफा छोड़ रखा था, लेकिन मोदी सरकार ने देखते ही देखते इसे संसद से पारित करा दिया। यहां भी पीएम मोदी का इरादा सामान्य वर्ग के ऐसे लोगों को राहत देने का है, जो आर्थिक रूप से गरीब हैं। मोदी सरकार ने सामान्य श्रेणी में आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लोगों को नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 10 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला किया।

बाल अधिकारों के लिए पोक्सो संशोधन विधेयक

राज्यसभा ने पोक्सो संशोधन विधेयक पारित कर दिया, जिसमें चाइल्ड पोर्नोग्राफी को परिभाषित कर बच्चों के साथ अपराध मामलों में मौत की सजा का प्रावधान किया। बच्चों के खिलाफ यौन अपराध और बलात्कार के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए केन्द्र सरकार ने 1023 विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें गठित करने को मंजूरी दी। अभी तक 18 राज्यों ने ऐसी अदालतों की स्थापना के लिए सहमति जतायी है। 1023 विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन के लिए कुल 767 करोड़ रूपये का खर्च किया जाएगा, इसमें से केन्द्र 474 करोड़ रूपये का योगदान देगा।

इसके साथ ही POSCO ई-बॉक्स के नाम से बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों को दर्ज करने के लिए एक प्रत्यक्ष एवं आसान ऑनलाइन शिकायत प्रबंधन प्रणाली की शुरुआत की गई। इससे यौन अपराधियों के खिलाफ POSCO अधिनियम, 2012 के तहत समय पर कार्रवाई सुनिश्चित होगी। ऐसी घटनाओं की बड़ी संख्या नजदीकी रिश्तेदारों के खिलाफ होती है और उन्हें दबा दिए जाने की प्रवृत्ति होती है। ई-बॉक्स का प्रयोग बहुत ही आसान है और इससे शिकायतकर्ता की गोपनीयता को बनाया रखा जा सकेगा। इस ई-बॉक्स को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की वेबसाईट http://ncpcr.gov.in/ के मुख पृष्ठ पर प्रमुख रूप से उपलब्ध है। यहां प्रयोगकर्ता को सामान्य रूप से POSCO ई-बॉक्स का बटन दबाना होता हैस जो आपको उससे जुड़े एक नए पेज पर ले जाता है।

भारतीय संस्कृति पर मोदी सरकार 

करतारपुर कॉरिडोर की शुरुआत

गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के कॉरिडोर का उद्धाटन 9 नवंबर को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से किया गया था। करतारपुर कॉरिडोर के निर्माण की मांग भी लंबे समय से होती रही है। 17-18 साल की कोशिशों के बाद पिछले साल भारत और पाकिस्तान की सरकारों की इस पर सहमति बनी। इसके बाद इस कॉरिडोर का निर्माण कार्य 11 महीने में पूरा हुआ।

1998 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में करतारपुर कॉरिडोर बनाने पर चर्चा हुई। साल 1999 में वाजपेयी सरकार में दिल्ली से लाहौर तक ‘दोस्ती बस सेवा’ शुरू की गई। वाजपेयी खुद इस बस में सवार होकर लाहौर पहुंचे थे और उस समय के पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से करतारपुर कॉरिडोर बनाने पर दोबारा चर्चा की। लेकिन ठीक इसके बाद करगिल युद्ध छिड़ने के कारण बात आगे नहीं बढ़ सकी। इससे पहले आजादी के बाद अकाली दल ने 1948 में करतारपुर गुरुद्वारे को भारत में शामिल कराने की मांग रखी थी। इसके बाद 1969 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने गुरु नानक देव की 500वीं जयंती पर करतारपुर को भारत में शामिल कराने के लिए जमीन की अदला-बदली का वादा किया था, लेकिन यहां भी बात नहीं बनी।

राम मंदिर विवाद का शांतिपूर्ण हल

9 नवंबर, 2019 का दिन ऐतिहासिक बन चुका है, क्योंकि इसी दिन 491 साल पुराने अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद का समाधान हो गया। सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की बेंच ने एकमत से रामलला के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ कर दिया। बता दें कि अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद के समाधान के लिए कई प्रयास किए गए, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। मंदिर निर्माण को लेकर मोदी सरकार पर भी काफी दबाव था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वह संविधान के दायरे में इस फैसले का समाधान चाहते हैं। उन्होंने फैसला आने से पहले लोगों से धैर्य और शांति बनाये रखने की अपील की, साथ ही कहा कि सभी लोगों को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पूरा सम्मान करना चाहिए।

अबू धाबी में पहले हिन्दू मंदिर की आधारशिला

देश ही नहीं विदेशों में भी हिन्दू धर्म की प्रतिष्ठा बढ़ रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 11 फरवरी 2018 को यूएई की राजधानी अबू धाबी में पहले हिन्दू मंदिर का शिलान्यास किया। इसके लिए यूएई की सरकार ने 55,000 स्कॉयर मीटर की जमीन उपलब्ध कराई।

आर्थिक सुधार

शत्रु संपत्ति अधिनियम

देशभर में मौजूद हजारों शत्रु संपत्ति से निपटने के लिए और उसके द्वारा धन जुटाने के लिए मोदी सरकार ने तीन हाईलेवल कमेटी बनाई हैं। ये कमेटी देश में मौजूद करीब 9400 शत्रु संपत्ति मामलों का निपटारा करेगी, इससे सरकार को करीब 1 लाख करोड़ रुपए का राजस्व आने का अनुमान है। मोदी सरकार का ये कदम अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में काफी सहायक होगा। गृह मंत्रालय के द्वारा जारी किए गए एक आदेश में कहा गया है कि शत्रु संपत्ति अधिनियम के तहत इस फैसले को लिया गया है, इन कमेटियों की अगुवाई गृह मंत्री अमित शाह करेंगे। इन संपत्तियों में से अधिकतर संपत्तियां उनके द्वारा छोड़ी गई हैं, जिन्होंने पाकिस्तान या चीन की नागरिकता ले ली है।

बेनामी संपत्तियों के खिलाफ उठाए कदम

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भ्रष्टाचारियों, घोटालेबाजों, कर चोरी करने वालों और बेनामी संपत्ति रखने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का सिलसिला जारी है। मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार के सभी स्रोतों पर तो लगाम लगाई ही है, साथ ही पूर्व में भ्रष्टाचार द्वारा अर्जित अकूत दौलत और बेनामी संपत्ति पर भी शिकंजा कसा है। नवंबर 2016 में मोदी सरकार ने बेनामी संपत्ति कानून में संशोधन कर उसे धारदार बनाया और इसी का असर है कि 1 फरवरी, 2019 तक आयकर विभाग ने 6,900 करोड़ रुपये से अधिक की बेनामी संपत्ति जब्त करने में कामयाबी हासिल की। इसमें फरवरी के बाद जब्त बीएसपी प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के भाई आनंद कुमार, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमनाथ के भांजे रतुल पुरी और एआईडीएमके नेता शशिकला की संपत्ति शामिल नहीं है। अगर इन्हें भी जोड़ा जाए तो ये राशि 10 हजार करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच जाएगी।

गौरतलब है कि हाल ही में सरकार ने 1988 के बेनामी ऐक्ट को संशोधित कर बेनामी ट्रांजेक्शन्स ऐक्ट, 2016 पारित कराया है। अब बेनामी संपत्तियों की खोज में लोगों के सहयोग को बढ़ाने के लिए सरकार ने यह इनामी योजना घोषित की है। बेनामी लेनदेन और संपत्तियों को उजागर किए जाने और ऐसी संपत्तियों से मिलने वाली आय के बारे में सूचना देने वाले लोगों को यह इनाम हासिल होगा।

17 साल से अटके जीएसटी को मिली संजीवनी

प्रधानमंत्री मोदी की जीएसटी लागू करने की सटीक योजना और दृढ़ निश्चय का परिणाम रहा कि जीएसटी के रूप में सरकार को मिलने वाले राजस्व में लगातार बढ़ोतरी हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने देश के हित को आगे रखते हुए जीएसटी व्यवस्था को लागू की। जुलाई, 2017 के बाद से जीएसटी तंत्र ने कई नए मुकाम हासिल किए हैं।

पीएम मोदी ने जिस मकसद से जीएसटी को लागू किया था, वो मकसद अब पूरा होता नजर आ रहा है। वित्त वर्ष 2018-19 में जीएसटी का संग्रह बढ़कर 5.18 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह वित्त वर्ष 2017-18 के 2.91 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले बहुत ज्यादा है।

कॉरपोरेट टैक्स में ऐतिहासिक कमी

प्रधानमंत्री मोदी ने कारोबार जगत को बड़ा गिफ्ट दिया, मोदी सरकार की ओर से कॉरपोरेट इनकम टैक्स में कटौती कर दी गई तो वहीं मिनिमम अल्टरनेट टैक्स से भी राहत दी गई है। इसके अलावा निवेशकों को भी बड़ा तोहफा दिया गया। घरेलू कंपनियों पर अब बिना किसी छूट के इनकम टैक्स 22 फीसदी लगेगा, वहीं इसमें सरचार्ज और सेस जोड़ने के बाद कंपनी को 25.17 फीसदी टैक्‍स देना होगा।

मोदी सरकार ने निवेश करने वाली नई घरेलू कंपनियों को भी राहत दी। 1 अक्टूबर 2019 के बाद मैन्युफैक्चरिंग कंपनी स्थापित करने वाले कारोबारियों को 15 फीसदी की दर से इनकम टैक्स देना होगा। इससे पहले नए निवेशकों को 25 फीसदी की दर से टैक्‍स देना होता था।

नागरिकता और अधिकार पर मोदी सरकार 

CAA से अल्पसंख्यक शरणार्थियों को अधिकार

CAA नागरिकता संशोधऩ कानून के अनुसार पाकिस्तान, बांग्लादेश एवं अफगानिस्तान में धार्मिक आधार पर उत्पीड़न के शिकार गैर मुस्लिम शरणार्थियों ((हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों) को भारत की नागरिकता आसानी से दी जा सकेगी। इस विधेयक 2019 के तहत सिटिजनशिप एक्ट 1955 में बदलाव किया गया है। इस बदलाव के बाद अब उन गैर मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता दी जा सकेगी जो बीते एक साल से लेकर छह साल तक भारत में रह रहे हैं।

नागरिकता संशोधन एक्ट 2019 के जरिए अब पाकिस्तान, बांग्लादेश एवं अफगानिस्तान के हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख, पारसी और ईसाई समुदाय के शरणार्थियों को 11 साल के बजाए एक से छह वर्षों में ही भारत की नागरिकता मिल सकेगी। वहीं इस कानून के तहत गैर मुस्लिम शरणार्थी अगर भारत में वैध दस्तावेजों के बगैर भी पाए जाते हैं तो उन्हें ना ही जेल भेजा जाएगा और ना ही उन्हें निर्वासित किया जाएगा।

दिल्ली के 40 लाख लोगों को मिला मालिकाना हक

मोदी सरकार ने पिछले साल दीपावली से पहले 23 अक्टूबर को दिल्ली की अवैध कॉलोनियों में रहने वाले 40 लाख लोगों को बड़ा तोहफा देते हुए उन्हें मालिकाना हक देने का ऐलान किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया था।

इसके साथ ही 30 दिसंबर को एक सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने ऐलान कर बताया कि दिल्ली की 100 से ज्यादा कॉलोनियों में चलने वाली दुकानों को दिल्ली विकास प्राधिकरण नियमित करेगा। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार के इस फैसले से दिल्ली के 50 हजार छोटे-बड़े व्यापारियों को लाभ मिलेगा, जिससे छोटे व्यापारियों पर लटक रही तलवार हटेगी और उन्हें फायदा पहुंचेगा।

जम्मू-कश्मीर के लोगों को धारा 370 से आजादी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार ने जम्मू-कश्मीर में 70 वर्ष पुराने आर्टिकल 370 जैसे नासूर का खत्मा कर इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया है। देश ही नहीं पूरी दुनिया में प्रधानमंत्री मोदी की इस साहस के लिए प्रशंसा की जा रही है। मोदी सरकार ने पूरी दुनिया के सामने साफ कर दिया है कि कश्मीर हमारे लिए ‘मुद्दा’ नहीं है, कश्मीर पर लिया गया हर फैसला भारत का आंतरिक निर्णय है, जिसमें किसी भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं है। श्रीलंका, यूएई, अमेरिका समेत तमाम देशों ने इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी की सराहना की।

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 को हटाने के फैसले को लेकर दुनिया भर की मीडिया ने भी पीएम मोदी के साहस की तारीफ की। मीडिया संस्थानों ने कहा कि अनुच्छेद 370 को हटाकर भाजपा सरकार ने अपना चुनावी वादा पूरा किया और साथ ही संघ का सपना पूरा किया है।

ब्रू-रियांग जनजाति का पुनर्वास

मोदी सरकार ने 16 जनवरी को 22 वर्षों से जारी ब्रू-शरणार्थी संकट को खत्म करने के लिए त्रिपुरा, मिजोरम और ब्रू समुदाय के सदस्यों के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देव, मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरामथांग और अन्‍य लोग इस अवसर पर उपस्थित थे।

समझौते के अनुसार 30 हजार से अधिक ब्रू-शरणार्थियों को त्रिपुरा में बसाया जाएगा। यह ऐतिहासिक समझौता उत्तर पूर्व की प्रगति और क्षेत्र के लोगों के सशक्तीकरण के लिए प्रधान मंत्री मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप है। कार्यभार संभालने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कई नीतिगत कदम उठाए हैं, जिससे इस क्षेत्र के बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी, आर्थिक विकास, पर्यटन और सामाजिक विकास में सुधार हुआ है।

4 दशकों से अटकी नगा संधि हुई संपन्न

नगालैंड शांति समझौते पर मोदी सरकार और नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (NSCN) के बीच 22 साल पुरानी बातचीत खत्म हुई। ये बातचीत एक झंडे, अलग संविधान और नगा आबादी वाले सभी क्षेत्रों के एकीकरण को लेकर हुई।

इन मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच सहमति के साथ चर्चा हुई। परस्पर सहमति के साथ इन मुद्दों को किनारे रखने का फैसला किया गया है।
इस शांति समझौते में कई बाधाएं मानी जा रही थीं, एनएससीएन (आई-एम) ने हाल में अलग झंडे और संविधान की मांग की थी जिसे केंद्र ने खारिज कर दिया था। साथ ही वह शुरू से ही ग्रेटर नगालिम की मांग कर रहा है। उम्मीद की जा रही थी कि इस स्थिति में केंद्र सरकार उसे छोड़ कर दूसरे नगा गुटों के साथ समझौते पर हस्ताक्षर कर सकती है।

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