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सोशल मीडिया वायरल : जानिए भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद ने इतिहास को कैसे भ्रष्ट किया

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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इन दिनों एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें देश में कांग्रेस सरकार के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की कथित कारगुजारियों के बारे में बताया गया है। इस पोस्ट में बताया गया है कि भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद ने इतिहास को किस तरह भ्रष्ट किया और कैसे एक मुस्लिम परस्त इतिहास देश के सामने परोसा गया।

आप भी पढ़िए कि इस वायरल पोस्ट में क्या-क्या खुलासे किए गए हैं।

01.भारत का इतिहास सिंधु घाटी सभ्यता से शुरू नहीं होता बल्कि सरयू तट से शुरू होता है जहां महर्षि मनु को अपने मनुष्य होने का ज्ञान हुआ और मानव सभ्यता विकसित हुई।

02. रामायण और महाभारत हिन्दुओं के धर्मग्रंथ हो सकते हैं, मगर शैक्षिक रूप से ये भारत का इतिहास है, जिन्हें पाठ्यक्रम में शामिल नहीं किया गया।

03. सिंध को अरबों ने जीता अवश्य था, मगर बप्पा रावल ने उन्हें मार-मार कर भगाया भी था, मगर सिर्फ अरबों की विजय पढ़ाई जाती है और बप्पा रावल को कहानी किस्सों के भरोसे छोड़ दिया जाता है।

04. व्यवस्था के अनुसार सम्राट पोरस ने सिकन्दर को रोका यह पढ़ाना आवश्यक नहीं था, लेकिन अलाउद्दीन खिलजी ने मंगोलों को रोका ये बात याद से लिखी गयी।

05. बाबर से औरंगजेब तक हर बादशाह के लिए अलग अध्याय है, जबकि मुगलों के इतिहास से हिंदुस्तान के वर्तमान को ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता।

06. मुगलों का 1707 तक का तो इतिहास बता दिया, मगर बड़ी ही चतुराई से उसके बाद सीधे 1757 का प्लासी युद्ध लिखकर अंग्रेजों को ले आए। इतनी जल्दी क्या थी जनाब, जरा 1737 में पेशवा बाजीराव द्वारा मुगलों की धुलाई भी पढ़ा देते।

07. 1757 में मुगल सल्तनत का मराठा साम्राज्य में विलय हो गया था, मगर जबरदस्ती उसका अंत 1857 मे पढ़ाया जाता है। 1757 से 1803 के बीच मुगल मराठा साम्राज्य के अधीन रहे और 1803 से 1857 अंग्रेजो के। 1757 के बाद कोई मुगल सल्तनत नहीं थी।

08. पानीपत में मराठों की हार हुई ठीक है, मगर ये उनका अंतिम युद्ध नहीं था। वे दोबारा खड़े हुए और अंग्रेजो को भी धो दिया, ये कब पढ़ाओगे? सिर्फ पानीपत पढ़ा दिया ताकि संदेश यह जाए कि हिन्दुओं ने हर युद्ध हारा है, जबकि युद्ध के बाद महादजी सिंधिया ने अफगानों को जमकर कूटा था।

09. जितने कागज बलबन, फिरोजशाह तुगलक और बहलोल लोदी पर लिखने में बर्बाद किए, उन कागजों पर महादजी सिंधिया, नाना फडणवीस और तुकोजी होल्कर का वर्णन होना चाहिए था।

10. भारत ब्रिटेन का गुलाम नहीं उपनिवेश था।

11. भारत 200 नही 129 वर्ष ब्रिटेन की कॉलोनी रहा, (1818 में मराठा साम्राज्य के पतन से 1947 में कांग्रेस शासन तक)

12. आंग्ल मराठा युद्ध 1857 की क्रांति से भी बड़े थे, इसलिए उनका विवरण पहले होना चाहिए मगर गायब है, क्योंकि बखान टीपू सुल्तान का करना था।

13. 1947 में 2 राष्ट्रों का उदय नहीं हुआ बल्कि एक ही का हुआ, हिंदुस्तान सदियों से उदित है और हमेशा रहेगा। ज्यादा सेक्युलर हो तो दूसरे आतंकी राष्ट्र की चिंता करो, नक्शे पर कुछ ही दिन का मेहमान है।

14. 1962 में भारत चीन से पराजित हुआ, मगर 1967 में चीन को हराया भी, वो कौन पढ़ाएगा?

15. सामाजिक विज्ञान में एक पाठ आता है भारत और आतंकवाद, उसमें बड़े-बड़े उदाहरण बताए जाते हैं, मगर उनके पीछे का इस्लामिक कारण नहीं पढ़ाया जाता।

इस वायरल पोस्ट में यह भी लिखा है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था बहुत ही रूढ़ हो चुकी है। अतः आवश्यकता है ऐसे लोगों को जोड़ने की जो शिक्षा मंत्रालयों में कार्यरत हों, कार्यरत होने से ज्यादा वे भारतीय शिक्षा को लेकर सजग और तत्पर हों।

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