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हिन्दू और सिख विरोधी केजरीवाल, मंदिरों के पुजारियों और गुरुद्वारा के ग्रंथियों की अनदेखी, इमामों पर लुटाये 28 करोड़ 66 लाख रुपये

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल चुनाव के दौरान वोट मांगने के लिए हिन्दू, मुस्लिम, सिख और अन्य अल्पसंख्यकों के पास जाते हैं। लेकिन सरकार बनते ही उन्हें सिर्फ मुस्लिम ही दिखाई देते हैं। केजरीवाल मुस्लिम तुष्टिकरण में इतने अंधे हो चुके हैं कि दिल्ली के मस्जिदों के इमामों पर खुलेआम पैसे लूटा रहे हैं, वहीं मंदिरों के पुजारी और गुरुद्वारा के ग्रंथी नजर नहीं आ रहे हैं। आरटीआई से मिली जानकारी ने केजरीवाल के हिन्दू और सिख विरोधी चेहरे को उजागर कर दिया है।

दरअसल सोशल मीडिया पर आरटीआई की तरफ से अगस्त 2021 में जारी एक पेपर वायरल हो रहा है, जिसमें 2015-16 से लेकर 2020-21 तक दिल्ली के मस्जिदों के मौलवियों और मुअज़्ज़िनों पर किए गए खर्च का विवरण दिया गया है। इस पेपर को शेयर करते हुए बीजेपी के सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने ट्वीट किया, “RTI का खुलासा – दिल्ली के इमामों के मसीहा केजरीवाल ने 2015-16 में 3 करोड़ 18 लाख रुपये इमामों को दिए, और यही रक़म 2019-20 में 9 करोड़ 24 लाख हो गई। अब तक कुल 28 करोड़ 66 लाख रुपये ‘जनाब’ केजरीवाल इमामों पर लूटा चुके हैं। मंदिरों के पुजारीयों और गुरद्वारा के ग्रंथियों को जीरो (0) यानि कुछ नहीं मिला है।”

MLMANDOWARA नाम के एक ट्विटर यूजर ने केजरीवाल के इस धार्मिक भेदभाव पर लिखा, “केजरीवाल के अब्बा की माल जो ठहरा इसलिए बांट रहे हैं खैरात, वोट बैंक के लिए तुष्टिकरण करने के लिए साम्प्रदायिक विष घौल रहा हैं। इमामों को पैसा लूटा रहा हैं, लेकिन गरीब हिन्दू और सिख पुजारियों व ग्रंथियों के लिए कुछ भी नही हैं। आखिर धर्मनिरपेक्ष देश मे यह धार्मिक भेदभाव कहीं क्यों ?”

प्रीति कुमारी नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “दिल्ली में मौलाना, मौलवियों को तनखाह देनेवाला दिल्ली के मंदिरो की बिजली कटवा देने वाला, अयोध्या में मंदिर की जगह अस्पताल बनाने की मांग करने वाला, रोहिग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों को बिरयानी खिलाने वाला,मौलाना केजरीवाल हिन्दू विरोधी है।”

ट्विटर हैंडल @shishuSN से किए एक ट्वीट में केजरीवाल पर निशाना साधते हुए लिखा गया, “केवल नारेबाजी से भारत नंबर वन बन जायेगा ? दिल्ली में रोहिंग्याओं को फ्लैट देंगे और विस्थापित हिन्दुओं को पानी, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं तक नहीं देंगे। मुस्लिम मौलवियों की बिना किसी काम के वेतन देंगे और शिक्षकों की भर्ती तक नहीं करेंगे, इस तरह से भारत को एक करेंगे ?”

ट्विटर यूजर अल्पेश मनसुख ने गुजरात के लोगों को केजरीवाल की असलियत से परिचित कराने की कोशिश की है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “यह है आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल की असलियत, यह कहता है देश का विकास करेगा। सबको साथ लेकर विकास और प्रगति होती तुष्टीकरण की राजनीति से नहीं … देख लो गुजरात।”

गौरतलब है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के सरगर्मियों के बीच जनवरी में अरविन्द केजरीवाल ने मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए बड़ा खेल खेला था। उन्होंने दिल्ली के मस्ज़िदों के इमामों के वेतन को 10,000 रुपये से बढ़ा कर 18,000 रुपये करने का ऐलान किया था। यही नहीं, मस्जिदों में अज़ान पढ़ने वाले मुअज़्ज़िनों के वेतन में भी बढ़ोतरी कर इसे 9,000 से बढ़ाकर 16,000 कर दिया था। 

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