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किसान आंदोलन पर अकाल तख्त के जत्थेदार हरप्रीत सिंह का बड़ा दावा: पीएम मोदी ने नाकाम की हिन्दुओं-सिखों को लड़ाने की साजिश

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कृषि कानूनों पर सिखों की सुप्रीम संस्था श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह का दावा है कि सिखों को सरकार और हिंदुओं से लड़ाने की साजिश रची गई थी, लेकिन पीएम मोदी ने इस मंसूबे को नाकाम कर दिया। हरप्रीत सिंह के मुताबिक किसान आंदोलन को सिख वर्सेज भारत सरकार और सिख वर्सेज हिंदू का विवाद बनाने की साजिश रची गई थी। अगर ये मंसूबे कामयाब हो जाते तो देश को बड़ा नुकसान होता। लेकिन मोदी सरकार ने साजिश को भांप कर कृषि कानूनों को लागू करने का फैसला वापस ले लिया, जिससे ये विवाद खत्म हो गया है और देश एक बड़ी विपदा से बच गया। जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा है कि 

  • श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व पर कृषि कानूनों को वापस लेना 
  • श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर को खोला जाना

मोदी सरकार के इन दोनो फैसलों का सिख समुदाय ने स्वागत किया है। जिससे हिंदुओं और सिखों के बीच भाईचारा और मजबूत होगा।

जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा है कि 

  • आंदोलन में शामिल हो गई थी कुछ मानवता विरोधी शक्तियां
  • किसान आंदोलन की आड़ में स्वार्थ को सिद्ध करने की कोशिश 
  • देश में भाइचारक सांझ को तोड़ने की कोशिश हो रही थी
  • राजनीतिक उद्देश्य को पूरा करने की हो रही थी कोशिश 
  • अलग अलग समुदायों में नफरत पैदा करने की कोशिश

लेकिन मोदी सरकार ने देश विरोधी ताकतों की इस साजिश को भांप लिया। देश हित में तीनों कृषि कानूनों को खत्न करने का फैसला लिया गया ताकि देश में लोगों के बीच भाईचारा बना रहे और देश में शांति कायम रहे।

देश विरोधी ताकतों ने रची थी बड़ी साजिश 

जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह का दावा है कि इस आंदोलन में कई ऐसे गुट शामिल हो गए थे । जो सिख सोच, निशान, फलसफे, इतिहास और भावनाओं को दरकिनार कर रहे थे। किसानों के आंदोलन को हिंदुओं और सिखों की लड़ाई बनाने की कोशिश हो रही थी। सरकार के साथ भी संघर्ष को भड़काने की हर कोशिश की जा रही थी। लेकिन मोदी सरकार ने देश के लोगों और सिखों को नुकसान पहुंचाने वाली साजिश को नाकाम कर दिया। 

किसानों के आंदोलन में शामिल देशविरोधी ताकतों की करतूत 

किसानों का आंदोलन के नाम पर इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली घटनाएं बार बार सामने आईं। आंदोलन का बहाना बना कर बर्बबरता की सारी हदें पार की गईं। कहीं बेरहमी से हाथ-पांव काट कर किसी की जान ली गई, तो कहीं लाठियों से पीट-पीट कर कत्ल की वारदात को अंजाम दिया गया, आंदोलन के नाम पर हैवानियत की गई, सिंधु बॉर्ड पर पेड़ से लटकी किसान की लाश मिली। पीड़ित गुरप्रीत सिंह पंजाब के फतेहगढ़ का रहने वाला था ।

सिंघु बार्डर पर दलित किसान के साथ हैवानियत

किसानों को हक दिलाने की आड़ में हिंसा का जो खेल सारे देश में खेला जा रहा है। उसने देश के गरीब अन्नदाता का सिर शर्म से झुक गया है और किसान आंदोलन की आड़ में हिंसा का खेल खेल रहे गुंड़ों की हकीकत सामने आ गई है।

दिल्ली-हरियाणा के सिंघु बार्डर पर 15 अक्तूबर की सुबह पंजाब के तरनतारन निवासी दलित युवक लखबीर सिंह की बेरहमी से हत्या से किसान के नाम पर हो रहा तमाशा पूरी तरह से बेनकाब हो गया । दलित युवक लखबीर सिंह के पहले हाथ काटे गए, फिर टांग.0 तलवार से पेट, पीठ और टांगों पर हमले किए जाते रहे, कभी पैर बांधकर उल्टा लटकाया तो कभी हाथ बांधकर सीधा, ऐसा खौफनाक मंजर कि मौत भी सिहर उठे, मौत के इस मंजर किसी का भी दिल दहल जाए, लेकिन बेरहमी करने वालों को न तो दया आई और न ही किसी को अपनी करनी पर पछतावा हुआ। शुक्रवार रात भर लखबीर सिंह के अंग काटने-गोदने का सिलसिला जारी रहा । सुबह बैरिकेड पर लटकी लाश और चारो ओर बिखरे अंग को देश सारा देश सिहर उठा।

सिंघु बॉर्डर पर घोड़े और हथियारों से लोगों को डराने की कोशिश

सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन के लिए अभी भी करीब 225 निहंग सिख मौजूद हैं. धरना प्रदर्शन में निहंग सिख पारंपरिक हथियारों के साथ मौजूद हैं. ये हथियारों के साथ धरनास्थल पर पहरा देते नजर आते हैं। लेकिन अब नकी करतूत ने इंसानियत के साथ देश के असली अन्नदाता को भी शर्मसार कर दिया है । इधर सिंघु बार्डर पर दलित की हत्या का मामला देश की सबसे बड़ी अदालत में पहुंच चुका है । सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर सिंघु बॉर्डर को जल्द खाली कराने की मांग की गई है। किसानों के आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई मसलों पर सुनाई हो रही है , सुप्रीम कोर्ट ट्रेनें रोकने , हाइवे बंद कर रहे हैं जैसे हरकतों पर पहले ही फटकार लगा चुका है। लेकिन किसानों के हक के नाम पर हिंसा और खूनखराबे का धंधा लंबे वक्त से जारी है। 

लखीमपुर हिंसा, यूपी- 3 अक्टूबर, 2021

लखीमपुर खीरी बवाल में कुल आठ लोगों की मौत हुई है। इस हिंसा की दौरान भी किसानों की दरिंदगी के वीडियों और तस्वीरों ने लोगों को सहमा दिया। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने लाठियों से पीट-पीट कर हत्या की।

हमले के बाद बुरी तरह से घायल लोगों को कैमरे पर गुनाह कबूल करने के लिए मजबूर किया गया। इतना ही नहीं गाड़ियों में तोड़फोड़ और आगजनी भी हुई। लखीमपुर खीरी में तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे फर्जी किसानों ने कानून को अपने हाथ में लेने में कोई कसर नहीं छोड़ी। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को काले झंडे दिखाने के लिए जमा हुए किसानों से पहले पुलिस और बीजेपी कार्यकर्ताओं की झड़प हुई। इसके बाद फर्जी किसानों ने जमकर तांडव किया।

भारत बंद फेल होने पर बवाल 27 सितंबर, 2021

भारत बंद फेल होने पर बौखलाए प्रदर्शनकारियों ने आम लोगों पर जम कर कहर बरपाया। आम लोगों ने जब किसानों की आड़ में गुंडागर्गजी को नकार दिया तब उनपर कहर बरपाए गए, सड़कों को जाम किया गया, गाड़ियों को रोका गया और जम कर बवाल मचा, यहां तक की अस्पताल जा रहे मरीज के वाहनों को भी निकलने नहीं दिया गया। एक जगह पिता के शोकसभा में जाने के लिए रोती महिला को भी आगे नहीं जाने दिया गया। बंद समर्थकों ने तो एक जगह डीसीपी के ऊपर ही गाड़ी चढ़ाने की कोशिश की।

 राजस्थान में भी आंदोलन के नाम पर गुंडागर्दी  30 जुलाई, 2021

राजस्थान के श्रीगंगानगर में बीजेपी नेता कैलाश मेघवाल पर हमला किया गया, उनके कपड़े  फाड़े कपड़े। गहलोत सरकार के खिलाफ हुए बीजेपी के जिला स्तरीय प्रदर्शन में शामिल होने आए बीजेपी अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कैलाश मेघवाल पहुंचे थे, लेकिन वहां उन्हें किसानों के नाम पर बवाल कर रहे लोगों ने घेर लिया और उनके कपड़े फाड़ दिए गए अचानक हुई इस घटना से अफरा-तफरी फैल गई।

दिल्ली पुलिस के 2 अधिकारियों पर  हमला  12 जून , 2021 

दिल्ली सीमा पर जारी तथाकथित ‘किसान’ आंदोलन में फर्जी किसानों, असामाजिक तत्वों और गुंडों का जमावड़ा है। इसलिए यह आंदोलन अपने नए-नए कारनामों से हमेशा चर्चा में रहते हैं । दिल्ली में उपद्रव से लेकर महिलाओं से दुष्कर्म तक के मामले समाने आते रहे हैं। सिंघु बॉर्डर पर दिल्ली पुलिस के दो आधिकारी भी बवालियों का निशाना बने। दोनों पुलिसकर्मियों को गंभीर चोटें लगीं । 

दिल्ली-हरियाणा बार्डर पर शख्स को जिंदा जलाने का आरोप

17 जून, 2021

दिल्ली से सटे हरियाणा के बहादुरगढ़ में किसान आंदोलन में शामिल लोगों ने जून महीने में एक व्यक्ति को जिंदा जला दिया था। आग लगने के बाद पीड़ित मुकेश को बहादुरगढ़ के सामान्य अस्पताल लाया गया था, जहां पर 90 फीसद झुलसे हुए मुकेश ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था

पश्चिम बंगाल की युवती से दुष्कर्म अप्रैल, 2021

तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली-हरियाणा और यूपी के बार्डर पर चल रहे आंदोलन में शामिल होने के लिए बंगाल से आई युवती के साथ टीकरी बार्डर पर सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया था। इस मामले पर संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने सफाई भी दी थी।

गणतंत्र दिवस पर जमकर उपद्रव 26 जनवरी, 2021

26 जनवरी के मौके पर नए कृषि कानून के विरोध में आंदोलन कर रहे किसानों ने दिल्ली में जमकर उपद्रव मचाया। किसानों ने पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स को तोड़ दिया। आईटीओ और लालकिले का पास भी किसानों ने जमकर उत्पात मचाया। सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो वायरल हुए, जो दुनिया भर में भारत की बदनामी का सबब बने। 

महिला पत्रकारों के साथ बदसलूकी 7 जनवरी, 2021

7 जनवरी को ट्रैक्टर मार्च के दौरान किसानों की भीड़ ने महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी की। ट्रैक्टर मार्च कवर करने गईं महिला पत्रकार के साथ भीड़ ने छेड़छाड़ करने की भी कोशिश की। महिला पत्रकार ने इस बारे में एक वीडियो के साथ ट्वीट करते हुए लिखा, ‘आंदोलन नहीं गुंडागर्दी हो रही है, पूरा देश देख ले #TractorMarch में गए मैं और कैमरापर्सन को विरोध के नाम पर मारने और #molest करने की कोशिश कर रही थी ये 500 लोगों की भीड़, किसी तरह ज़िंदा बचे, जवाब दीजिए क्या ये किसान हैं।’

आंदोलन की आड़ में गुंडों की मौज November 26, 2020 

किसान आंदोलन के नाम पर गुंडे शुरू से ही तोड़फोड़ और बवाल में शामिल थे,  आंदोलन  पर गुंडों का कब्जा काफी पहले हो चुका था।  पटियाला और अंबाला सीमा पर  आंदोलन की आड़ में उग्र प्रदर्शन किया गया। किसानों के नाम पर आंदोलन में शामिल गुंडों ने रास्ता रोकने के लिए लगाई गईं बैरिकेडिंग को उखाड़ दिया और जम कर तोड़फोड़ मचाई। 

किसान आंदोलन में कब क्या हुआ

  • 24 से 26 नवंबर 2020 के बीच दिल्ली के गाजीपुर, सिंघु, टिकरी और शाहजहांपुर बॉर्डर पर किसानों का धरना। 
  • 26 जनवरी 2021 को दिल्ली में ट्रैक्टर परेड निकाली। इस दौरान कई जगह पर हिंसा हुई। लालकिले पर धार्मिक झंडा फहराया गया। 
  • 28 जनवरी को गाजीपुर बॉर्डर पर भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत के आंसू निकले जिसके बाद माहौल बदलता चला गया। 
  • 29 जनवरी को टिकैत के आंसू निकलने पर मुजफ्फरनगर के जीआईसी ग्राउंड में पंचायत बुलाई गई। 
  • 22 जुलाई से 9 अगस्त तक दिल्ली में जंतर-मंतर पर किसान संसद चली। 
  • 26-27 अगस्त को सिंघु बॉर्डर पर अखिल भारतीय किसान-मजदूर सम्मेलन हुआ। 
  • 28 अगस्त को करनाल में सीएम मनोहर लाल खट्टर का विरोध कर रहे किसानों पर लाठीचार्ज ।
  • 5 सितंबर को मुजफ्फरनगर में संयुक्त किसान मोर्चा ने महापंचायत की। दावा किया कि इसमें 10 लाख से ज्यादा किसान आए। 
  • 9 जुलाई को शामली से ट्रैक्टर रैली निकली, जो सिंघु बॉर्डर पहुंची।
  • 24 जुलाई को बिजनौर से ट्रैक्टर रैली शुरू होकर गाजीपुर बॉर्डर पहुंची। इन रैलियों में करीब 10 से ज्यादा जिलों के किसान शामिल हुए।
  • 27 सितंबर को संयुक्त किसान मोर्चा ने कृषि कानूनों के खिलाफ भारत बंद करने का ऐलान किया

कई दौर की बातचीत का से भी नहीं निकला हल

  • 4 अक्तूबर 2020 : किसानों की बैठक लेने आए केंद्रीय कृषि सचिव संजय अग्रवाल का बहिष्कार। किसान बोले- हम कृषि मंत्री से बात करने आए थे।
  • 13 नवंबर : कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर व रेलमंत्री पीयूष गोयल ने किसानों संग बैठक की। बैठक बेनतीजा रही।
  • 01 दिसंबर : सरकार ने विशेषज्ञों की कमेटी बनाकर बिल परखने का सुझाव दिया। किसानों ने इसे अस्वीकारा।
  • 03 दिसंबर : सरकार ने भरोसा दिया कि एमएसपी जारी रहेगा, लेकिन किसान तीनों कानूनों को रद्द करने पर अड़े रहे।
  • 05 दिसंबर : किसानों ने सरकार से कहा कि वह कृषि बिल रद्द करने पर अपना जवाब हां या ना में दें।
  • 08 दिसंबर : गृहमंत्री अमित शाह ने किसानों संग बैठक की। सरकार द्वारा भेजे गए 22 पेज के प्रस्ताव को किसानों ने खारिज कर दिया।
  • 30 दिसंबर : बिजली संशोधन अधिनियम-2020 को निरस्त करने और पराली के नाम पर एक करोड़ के जुर्माने का नियम निरस्त करने पर सरकार ने सहमति जताई।
  • 04 जनवरी 2021 : ‘ताली दोनों हाथ से बजती है’… कृषि मंत्री के इस बयान के साथ बैठक समाप्त हुई और 8 जनवरी को पुन: चर्चा करने का फैसला हुआ।
  • 08 जनवरी : किसान बिल रद्द करने पर अड़े रहे। कृषि मंत्री ने बिल रद करने के अलावा कोई अन्य सुझाव मांगा।
  • 15 जनवरी : कई घंटे तक सरकार और किसानों की बैठक चली, लेकिन बेनतीजा रही।
  • 20 जनवरी : सरकार ने दो साल तक बिल निलंबित रखने और कानूनों पर विचार करने को संयुक्त समिति बनाने का प्रस्ताव रखा।
  • 22 जनवरी : किसानों ने सरकार के संयुक्त समिति बनाने के प्रस्ताव को खारिज किया।
  • 26 जनवरी : दिल्ली में लालकिले और ट्रैक्टर परेड में हिंसा होने के बाद से केंद्र सरकार ने किसानों से फिर कोई बातचीत नहीं की।

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