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किसानों की कमाई में चार चांद लगा रहे भारतीय मसाले, मोदी काल में निर्यात 164 प्रतिशत बढ़ा

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देश में अब तक जितनी भी सरकारें आईं उन्होंने उत्पादकता की तो चिंता की लेकिन किसानों के फायदे के बारे में कभी नहीं सोचा गया। पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस सोच को बदला गया और किसानों की आय दोगुनी करने का निश्चय किया गया। उनके नेतृत्व में सरकार किसानों को अन्नदाता की भूमिका से आगे ले जाकर उद्यमी बनाने का प्रयास कर रही है। देश ने पहली बार किसानों की आय की चिंता की है और उसकी आय बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किया जा रहा है। आज पीएम मोदी के विजन के तहत सरकार कृषि व सहकारिता के क्षेत्र में गांव, गरीब, किसान का जीवन आसान बनाना, उनके दुख, उनकी तकलीफ कम करने पर काम कर रही है। इसके लिए फसल बीमा योजना से लेकर तमाम तरह की योजनाएं लागू की गई हैं जिससे किसानों की हर छोटी-छोटी परेशानियों को दूर किया जा सके और उत्पादकता बढ़ाने के साथ ही उनकी आय भी बढ़ाई जा सके। कृषि क्षेत्र में किए गए सुधारों की वजह से आज भारत कई क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाने के साथ ही निर्यात में अव्वल साबित हो रहा है और इससे किसानों में खुशहाली आ रही है। भारतीय मसालों की मांग प्राचीन समय से ही विदेशों में होती रही है लेकिन मोदी सरकार आने के बाद मसालों के उत्पादन पर भी विशेष जोर दिया गया है और इसका निर्यात भी लगातार बढ़ रहा है जिससे किसानों की आमदनी बढ़ी है। मोदी काल में पिछले आठ साल में भारतीय मसालों का निर्यात 164 प्रतिशत बढ़ा है। अप्रैल-जून 2013-14 में भारतीय मसालों का निर्यात 778 करोड़ रुपये हुआ था वह अब अप्रैल-जून 2022-23 में बढ़कर 2,057 करोड़ रुपये हो गया।

भारत ने 2021-22 में 4.1 बिलियन डॉलर के मसालों का निर्यात किया

भारत वैश्विक स्तर पर मसालों का सबसे बड़ा निर्यातक है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) के अनुसार, भारत ने वित्त वर्ष 2021-22 में 4.1 बिलियन डॉलर के मसालों का निर्यात किया। इस हिस्से से, 1.8 बिलियन डॉलर ने मुख्य मसालों – सूखी मिर्च, जीरा और हल्दी का गठन किया, इसके बाद टकसाल उत्पादों, मसाला तेलों और ओलेरेसिन के 1.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का निर्यात किया गया। मिर्च, जीरा और हल्दी के निर्यात में भारत का पहला स्थान है। वित्त वर्ष 2022 में, चीन और अमेरिका ने भारत सबसे ज्यादा मसालों का आयात किए। चीन मिर्च, जीरा और विभिन्न टकसाल उत्पादों का भारत का शीर्ष आयातक है, अमेरिका मुख्य रूप से करी पाउडर और पेस्ट, मसाला तेल और ओलेरोसिन का आयात करता है। इसके अलावा, भारत बांग्लादेश को हल्दी और अदरक का निर्यात करता है और कुछ मुख्य मसाले जैसे छोटी इलायची सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को निर्यात करता है। इन क्षेत्रों में सामूहिक रूप से भारत के मसाला निर्यात बाजार का 50% से अधिक शामिल है।

मोदी काल में मसाला उत्पादन में 60 फीसदी वृद्धि

भारत ने मसाला उत्पादन में बड़ी छलांग लगाई है। देश में मसाला उत्पादन वर्ष 2014-15 के 67.64 लाख टन से बढ़कर वर्ष 2020-21 में रिकॉर्ड 60 फीसदी वृद्धि के साथ करीब 107 लाख टन के स्तर तक पहुंच गया है। यही नहीं भारतीय मसालों की धाक पूरी दुनिया में बढ़ रही है। विदेशी रसोई में भारतीय मसालों की खुशबू का जलवा कायम है। इसकी वजह से एक्सपोर्ट लगभग दोगुना हो गया है। विशेष रूप से कोरोना महामारी काल में मसालों को स्वास्थ्य पूरक के रूप में मान्यता मिलने के कारण मसालों की मांग में जबरदस्त वृद्धि हुई है। इसे हल्दी, अदरक, जीरा, मिर्च आदि मसालों के बढ़ते निर्यात में स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है।

वर्ष 2021 में 16 लाख टन मसाले का निर्यात

सुपारी और मसाला विकास निदेशालय द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘स्पाइस स्टैटिस्टिक्स एट ए ग्लांस 2021’ के अनुसार मिर्च, अदरक, हल्दी, जीरा आदि प्रमुख मसालों के उत्पादन में शानदार वृद्धि हुई है। मसालों के एक्सपोर्ट से 2014-15 में 14,899 करोड़ रुपये मिले थे, अब 2020-21 में यह लगभग दो गुना बढ़कर 29,535 करोड़ रुपये हो गया है।

45.28 लाख हेक्टेयर में फैली मसाला खेती

इस पुस्तक में बताया गया है कि 2014-15 से 2020-21 के दौरान मसालों के प्रोडक्शन में 7.9 फीसदी की वार्षिक वृद्धि दर रही है। यह वृद्धि मसाला फसलों का क्षेत्र 32.24 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 45.28 लाख हेक्टेयर होने की वजह से हुई है। जीरा उत्पादन में 14.8, लहसुन में 14.7, अदरक में 7.5, सौंफ में 6.8, धनिया में 6.2, मैथी में 5.8, लाल मिर्च में 4.2, और हल्दी में 1.3 की महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है। विश्व के मसाला उत्पादन में भारत का महत्वपूर्ण स्थान है। कई तरह की जलवायु के कारण देश में लगभग सभी तरह के मसालों का अच्छा उत्पादन हो रहा है।

मसाला किसानों को 50 फीसदी तक की सब्सिडी

भारत के मसालों की अंतर्राष्ट्रीय बाजार में काफी मांग रहती है, यही कारण है कि अब भारत की सरकार मसालों की खेती के लिये किसानों को हर तरीके से प्रोत्साहन दे रही है। मसालों की खेती में बेहतर उत्पादन हासिल करने के लिये किसानों को 50 फीसदी तक की सब्सिडी दी जा रही है। जिससे मसालों की खेती का खर्च किसानों पर भारी न पड़े और किसान कम लागत में ही अच्छा मुनाफा कमा सकें। क्योंकि उत्पादन बढेगा तो मसाले के निर्यात को भी बढ़ाया जा सकेगा। अब इस योजना से जुड़ने के लिये नये किसानों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। किसान चाहें तो मसालों की खेती करके अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।

इन मसालों के उत्पादन से की जा सकती है कमाई

भारत में उगाये जाने वाले मसाले खाने का ज़ायका तो बढ़ाते ही है, साथ ही ये मानव स्वास्थ्य के लिये भी बहुत जरूरी हैं। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ज्यादातर जीरा, हल्दी, मिर्च, अदरक, लहसुन, सौफ, धनिया और मेथी की मांग होती है। इसलिये किसान निर्यात की क्वालिटी और बाजार मांग के हिसाब इन मसालों को उगा सकते हैं। मसालों की फसल से अच्छा उत्पादन लेने के लिये अच्छी किस्म के बीजों का ही इस्तेमाल करें, जिससे कि उपज अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर खरी उतर सके। साल 2020-21 के दौरान करीब 16 लाख टन मसाले दूसरे देशों में निर्यात किये गये हैं।

मसाला उत्पादक किसानों के लिए सहायता योजनाएं

देश में मसालों के उत्पादन को बढ़ाने और किसानों को मसाले की खेती के प्रति प्रोत्साहित करने के लिये सरकार ने कई योजनायें लागू की हैं तो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से किसानों की मदद करती हैं। इनमें एकीकृत बागवानी विकास मिशन, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, परंपरागत कृषि विकास योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और राष्ट्रीय बागवानी मिशन आदि शामिल हैं। इन योजनाओं से खेती की लागत को कम करने में खास मदद मिलती है। इतना ही नहीं, ये योजनायें मसालों की खेती के साथ-साथ इसके प्रसंस्करण के लिये आर्थिक सहायता देती हैं।

राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत किसानों को 50% तक सब्सिडी

राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत मसालों की जैविक खेती करने वाले किसानों को 50% तक की सब्सिडी और ट्रेनिंग देने का प्रावधान है। वहीं मसालों के स्टोरेज के लिये करीब 4 करोड़ रुपये तक की आर्थिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं। मसालों की खेती और प्रसंस्करण यूनिट लगाने के लिये 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और 40% तक सब्सिडी दी जाती है। प्रसंस्करण से पहले मसालों की छंटाई, ग्रेडिंग और शॉर्टिंग के लिये करीब 50 लाख रुपये तक का खर्च आता है, जिसमें सरकार से 35% सब्सिडी मिल जाती है। अंतर्राष्ट्रीय मानकों के हिसाब से मसालों की पैकेजिंग में 15 लाख रुपये तक का खर्च आता है, जिसमें किसानों को 40% तक सब्सिडी का प्रावधान है। वहीं मसालों की खेती में खर्च को कम करने के लिये भी 40% सब्सिडी सहित अन्य आर्थिक सहायता का प्रावधान है।

ज्यादा उपज देने वाली किस्मों पर जोर

मसालों का एक्सपोर्ट सभी बागवानी फसलों के कुल निर्यात आय का 41 फीसदी योगदान देता है। केवल समुद्री उत्पादों, गैर-बासमती चावल व बासमती चावल के बाद कृषि जिंसों में इसका चौथा स्थान है। देश में मसालों की उपज में शानदार वृद्धि सरकारी कार्यक्रमों, कृषि वैज्ञानिकों एवं किसानों की मेहनत से हुई है। सुपारी और मसाला विकास निदेशालय ने ज्यादा उपज देने वाली किस्मों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

भारत दुनिया का सबसे बड़ा हल्दी उत्पादक देश

वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान देश में कुल 9,38,955 टन हल्दी का उत्पादन हुआ था, जिसमें से दिसंबर 2019 तक 1,01,500 टन का निर्यात हुआ था। पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा हल्दी का उत्पादन भारत में ही होता है, जोकि कुल वैश्विक उत्पादन का करीब 60 से 70 फीसदी है। वित्त वर्ष 2020-21 में हल्दी का निर्यात 15 फीसदी बढ़ने का अनुमान जताया गया था।

हल्दी के निर्यात में 42 प्रतिशत वृद्धि से किसानों को लाभ

हल्दी अपनी प्रतिरक्षा बढ़ाने वाले गुणों की वजह से महामारी के दौर में काफी लोकप्रिय हुई है। इस वजह से उसकी निर्यात मांग भी बढ़ी है। वित्त वर्ष 2020-21 की पहली छमाही के दौरान मात्रा के आधार पर निर्यात में 42 फीसदी की उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। यह मसाला की खेती करने वाले किसानों के लिए बहुत ही कारगार साबित हो रही है। इससे किसानों की आमदनी बढ़ी है और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार देखने को मिल रहा है। कोविड महामारी के दौरान हल्दी और काली मिर्च आदि का उपयोग करके बनाया जाने वाला सुनहरा दूध इम्यूनिटी बढ़ाने (Immunity Booster) के लिए सबसे अधिक खोजे जाने वाले व्यंजनों में शामिल हो गया है।

भारत अदरक का सबसे बड़ा उत्पादक देश

भारत दुनिया में अदरक का सबसे बड़ा उत्पादक है, जो सालाना 1.5 से 2 मिलियन टन के बीच उत्पादन करता है, जो कुल वैश्विक उत्पादन का 40-50% है। अदरक स्वाद बढ़ाने के साथ हीं औषधीय गुणों से भरपूर है। भारत चीन से लगभग दोगुना उत्पादन करता है और हम एक बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद का उत्पादन करते हैं। इसका उपयोग मसालों के रूप में सब्जी, अचार आदि में किया जाता है। कोरोना महामारी के बाद विश्व भर से भारतीय अदरक की मांग लगातार बढ़ी है। भारतीय अदरक की गुणवत्ता चीन के अदरक से अच्छी मानी जाती है। अगर अदरक की खेती को सही तरीके से किया जाए तो भोजन के जायके बढ़ाने के साथ-साथ आपके जेब के जायके बढ़ाने में भी अदरक पूरी तरह सक्षम है।

अदरक का निर्यात

भारतीय अदरक का एक बड़ा हिस्सा एशियाई और अफ्रीकी देशों को निर्यात किया जाता है। इसके साथ ही इंडोनेशिया, बांग्लादेश, वियतनाम, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, मोरक्को, तुर्की और मिस्र भारत से प्रमुख आयातक हैं। इन देशों के अलावा, संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और यूरोपीय बाजारों में काफी अच्छी मात्रा में निर्यात किया जा रहा है। इन क्षेत्रों में जल्द ही निर्यात की मात्रा में सुधार करने की एक बड़ी संभावना है, क्योंकि भारतीय अदरक की गुणवत्ता काफी अच्छी है जिसे लोग पसंद कर रहे हैं।

अदरक से सोंठ भी बनाया जाता है

घरेलू बाजार में ज्यादातर ताजा अदरक का सेवन किया जाता है। उत्पाद का लगभग 10-15% सोंठ में परिवर्तित किया जाता है, जिसका अधिकांश भाग विभिन्न देशों को निर्यात किया जाता है। कोविड -19 महामारी शुरू होने के बाद, दुनिया भर में अदरक की मांग काफी बढ़ गई है। यह अदरक के स्पष्ट स्वास्थ्य लाभों के कारण है, साथ ही इसे एक प्रतिरक्षा बूस्टर माना जाता है। संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और साथ ही यूरोपीय देशों जैसे क्षेत्रों में उनकी खपत में बड़ी वृद्धि हो रही है और गुणवत्ता वाले भारतीय अदरक इन बाजारों में तेजी से अपनी पहुंच बना रहे हैं।

भारत केसर का उत्पादन करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश

अफगानिस्तान और ईरान के बाद भारत केसर उत्पादन और निर्यात के मामले में तीसरा सबसे बड़ा देश है। लाल सोना के नाम से मशहूर केसर की खेती मई में शुरू होती है और अक्टूबर तक फसल पककर तैयार हो जाती है। भारत में लगभग 5,000 हेक्टेयर में इसकी खेती होती है। अफगानिस्तान में तालिबान संकट के बाद भारत से निर्यात होने वाले केसर की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में आसमान छू रही है। जिस केसर की कीमत कुछ समय पहले तक 1.4 लाख रुपए प्रति किलो तक थी, वह अब लगभग दोगुने भाव पर अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बिक रही है।

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