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21वीं सदी के भारत को शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर, मेट्रो और एयर कनेक्टिविटी से नई गति मिलने वाली है- पीएम मोदी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि बदलते हुए समय और बदलती हुई जरूरतों के मुताबिक अपने शहरों को हमें निरंतर आधुनिक बनाना जरूरी है। देश के शहरों में ट्रांसपोर्ट सिस्टम आधुनिक हो, सीमलेस कनेक्टिविटी हो, यातायात के साधन एक-दूसरे को सपोर्ट करें, ये किया जाना आवश्यक है। इसी सोच के साथ बीते आठ वर्षों से शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर बहुत बड़ा निवेश किया जा रहा है। आठ वर्षों में एक के बाद एक देश के दो दर्जन से ज्यादा शहरों में मेट्रो या तो शुरु हो चुकी है या फिर तेज़ी से काम चल रहा है। आज का भारत स्पीड को तेज विकास की गारंटी मानता है। यही वजह है कि अब देश का रेल नेटवर्क अधिक से अधिक मेड इन इंडिया वंदे भारत ट्रेनों को चलाने के लिए तेजी से तैयार हो रहा है।शहरों को मेट्रो से लेकर एयर कनेक्टिविटी से जोड़ा, उड़ान योजना का मिल रहा लाभ
पीएम मोदी ने अहमदाबाद में शुक्रवार को वंदे भारत एक्सप्रेस और मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के फेस-वन के उद्घाटन के मौके पर कहा कि देश के दर्जनों छोटे शहरों को एयर कनेक्टिविटी से जोड़ा गया है। उड़ान योजना छोटे शहरों में हवाई सुविधा देने में बहुत बड़ी भूमिका निभा रही है। हमारे जो रेलवे स्टेशन्स हुआ करते थे, उनकी क्या स्थिति थी, ये आप भी जानते हैं। आज गांधीनगर रेलवे स्टेशन दुनिया के किसी भी एयरपोर्ट से कम नहीं है। दो दिन पहले ही अहमदाबाद रेलवे स्टेशन को भी आधुनिक बनाने की स्वीकृति दी गई है। 21वीं सदी के भारत को देश के शहरों से नई गति मिलने वाली है।शहर आने वाले पच्चीस साल में विकसित भारत के निर्माण को सुनिश्चित करेंगे
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश के शहरों के विकास पर इतना अधिक फोकस, इतना बड़ा निवेश इसलिए किया जा रहा है क्योंकि ये शहर आने वाले पच्चीस साल में विकसित भारत के निर्माण को सुनिश्चित करेंगे। ये निवेश सिर्फ कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं है। बल्कि दर्जनों शहरों में स्मार्ट सुविधाएं बन रही हैं, मूल सुविधाओं को सुधारा जा रहा है। मुख्य शहर के आसपास के इलाकों, suburbs को विकसित किया जा रहा है। ट्विन सिटी का विकास कैसे होता है, गांधीनगर और अहमदाबाद इसका जीवंत उदाहरण हैं। आने वाले समय में गुजरात में अनेक ट्विन सिटी के विकास का आधार तैयार हो रहा है। इनमें आणन्द-नडीयाद, भरुच-अंकलेश्वर, वापी-वलसाड, सूरत-नवसारी, वडोदरा-हालोल, मोरबी-वांकानेर और मेहसाणा-कड़ी आदि शामिल हैं। ऐसे बहुत सारे ट्विन सिटी, गुजरात की पहचान को और सशक्त करने वाले हैं।

गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान और नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी गतिशील भारत की जरूरत
उन्होंने कहा कि पुराने शहरों में सुधार और उनके विस्तार पर फोकस के साथ-साथ ऐसे नए शहरों का निर्माण भी किया जा रहा है, जो ग्लोबल बिजनेस डिमांड के अनुसार तैयार हो रहे हैं। गिफ्ट सिटी भी इस प्रकार के प्लग एंड प्ले सुविधाओं वाले शहरों का बहुत उत्तम उदाहरण हैं। पीएम मोदी ने कहा कि लंबे समय तक हमारे यहां शहरों को जाम से मुक्त करने, हमारी ट्रेनों की गति बढ़ाने के लिए गंभीर प्रयास नहीं हुए। लेकिन आज का भारत स्पीड को, गति को, ज़रूरी मानता है, तेज़ विकास की गारंटी मानता है। गति को लेकर ये आग्रह आज गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान और नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी में भी दिखता है। साथ ही हमारे रेलवे की गति को बढ़ाने के अभियान में भी स्पष्ट नजर आता है।

अगले साल अगस्त तक देश में 75 वंदे भारत एक्सप्रेस चलाने के लक्ष्य पर हो रहा है काम
पीएम मोदी ने कहा कि आज देश का रेल नेटवर्क ज्यादा से ज्यादा मेड इन इंडिया, वंदे भारत ट्रेन, को चलाने के लिए तेज़ी से तैयार हो रहा है। 180 किलोमीटर प्रतिघंटा तक की रफ्तार पकड़ने वाली ये ट्रेनें भारतीय रेलवे की दशा-दिशा बदलने वाली है। अगले साल अगस्त तक देश 75 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें चलाने के लक्ष्य पर तेज़ी से काम हो रहा है। भारत की वंदे भारत ट्रेन की खूबी ये है कि ये मात्र 52 सेकेंड में 100 किमी प्रति घंटे की गति पकड़ लेती है। हाई स्पीड ट्रेनों की तरह देश में मेट्रो का भी विस्तार हो रहा है। उन्होंने कहा कि मेट्रो स्टेशन हो या वंदे भारत ट्रेन, आज यह जरूरी है कि नई पीढ़ी इनसे जुड़ी अहम बातें प्रत्यक्ष रूप से जानें। इससे जहां उनमें यह विश्वास पैदा होगा कि टेक्नोलॉजी से देश में कितनी प्रगति हो रही है, वहीं उनके अंदर Ownership की भी भावना जगेगी।

नई पीढ़ी अध्ययन करे, ताकि मेट्रो सिर्फ सफर के लिए नहीं, सफलता के लिए भी काम आए
पीएम मोदी ने अपने संबोधन के अंत में नई पीढ़ी से आग्रह करते हुए कहा कि उनको मेट्रो स्टेशनों को देखना चाहिए कि वे किस अत्याधुनिक भारतीय तकनीक से बन रहे हैं और उनमें कितना पैसा खर्च हो रहा है। उन्होंने कहा कि अभी दो-चार दिन में जब मेट्रो शुरू हो जाएगी तो हमारे नौवीं, दसवीं, 12वीं और इंजीनियरिंग के स्टूडेंट्स यहां जाकर के अध्ययन करें कि इतनी गहरी खुदाई करके रेलवे स्टेशन कैसे बने होंगे? कितना खर्च करना पड़ा होगा? ये पैसा किसका है? हम देशवासियों का है। पीएम मोदी ने कहा कि एक बार हम ये शिक्षा दे देंगे कि ये काम कैसे हुआ है, कितना बड़ा है, कितने समय में हुआ है, किस प्रकार की टेक्नोलॉजी लगी है? तो हमारे बच्चों के विकास के काम आएगा। उनको एक विश्वास पैदा होगा कि टेक्नोलॉजी से देश में कैसे प्रगति हो रही है। और उनकी एक Ownership बनेगी। जब आप मेरे देश की नई पीढ़ी को ये बताएंगे कि ये तुम्हारा है। ये तुम्हारे भविष्य के लिए है। जब एक बार हमारे नौजवान को यह एहसास होगा तो वो कभी भी किसी आंदोलन में इस प्रापर्टी पर हाथ लगाने की कोशिश नहीं करेगा। उसे उतना ही दर्द होगा जितना उसके अपनी घर की प्रापर्टी के नुकसान होने पर होता है। इसीलिए मेट्रो सिर्फ सफर के लिए नहीं, सफलता के लिए भी काम आनी चाहिए। इससे पहले गत दिवस पीएम मोदी ने नवरात्रि कार्यक्रम में भाग लेकर माता की आरती भी की।

 

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