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कोरोना संकट में दुनिया की ‘फार्मेसी’ के रूप में उभरा भारत

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यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ही दूरदर्शिता और समर्थ नेतृत्व का प्रताप है कि जिस कोरोना संकट के दौर से अधिकांश देश निकलने के बारे में सोच रहा है, उसी संकट के समय में आज पूरी दुनिया भारत की ओर देख रहा है कि ताकि उसे दवा मिल सक। एक प्रकार से कहे तो पीएम मोदी इस बुरे दौर में भी भारत की साख और मान दोनों बढ़ाया है। उन्होंने देश को दुनिया की फार्मेसी के रूप में उभार दिया है। तभी तो कोरोना वायरस संक्रमण के इस दौर में भारत की डिप्लोमेसी पर टिप्पणी करते हुए डब्ल्यूएचओ की दक्षिण पूर्व एशिया के लिए क्षेत्रीय आपातकाल निदेशक डॉ. रोड्रिको ऑफरीन ने कहा है कि भारत अर्थव्यवस्था और प्रौद्योगिकी के मामले में अपने पड़ोसी देशों से आगे है। भारत सस्ती कीमत पर गुणवत्तापूर्ण दवाइयां उपलब्ध कराने में भी सक्षम है। इसलिए कह सकते हैं कि भारत को हम विश्व में महत्वपूर्ण फार्मेसी के रूप में देखते हैं।

भारत अब निर्णायक चरण में पहुंच गया है

डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि कोरोना महामारी की इस लड़ाई में भारत अब निर्णायक चरण में पहुंच गया है। इस बारे में डब्ल्यूएचओ की दक्षिण पूर्व एशिया के क्षेत्रीय आपातकाल निदेशक डॉ. रोड्रिको ऑफरीन ने विस्तार से बताते हुए कहा कि विश्व मंच पर भारत के इतिहास को देखें तो पाएंगे कि यह देश पहले भी कई महामारियों से लोहा ले चुका है और जंग बी जीत चुका है। उन्होंने बताया है कि विगत में भारत ने पोलियो, स्मॉल पॉक्स जैसी घातक बीमारियों से सफलता पूर्वक मुकाबला किया है।

कोरोना संकट काल में भारत का काम सराहनीय

दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले कोरोना संकट के इस चुनौतीपूर्ण दौर में भारत का काम काफी सराहनीय रहा है। यह प्रशंसा किसी और देश ने नहीं बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य संगठन की दक्षिण पूर्व एशिया के क्षेत्रीय आपातकाल निदेशक डॉ. रोड्रिको ऑफरीन ने कही है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार भारत ने तत्काल प्रभाव से सभी क्षेत्रों में स्वास्थ्य अधिकारियों से लेकर परिवहन और विमानन क्षेत्र तक दूसरे देशों से अपने लोगों को लाने से लेकर सभी विदेशी मामलों में सभी मंत्रालय से लेकर सर्वोच्च नेतृत्व तक ने मिलकर काम किया है वह वाकई में सराहनीय काम हैं।

मानवीय दृष्टिकोण को दी है प्राथमिकता

इसमें तो कोई दो मत नहीं वैश्विक महामारी के इस दौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक अलग ही छवि निखर कर सामने आई है। इस संकट की घड़ी में उनका हर कदम पूरी मानवता को बचाने के प्रति केंद्रित रहा है। तभी तो रोड्रिको ऑफरीन ने भारत के हर कदमों की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि इस दौर में भारत ने हर कदम मानवता को प्राथमिकता देने के आधार पर उठाया है। भारत ने कोरोना प्रभावित देशों में फंसे न केवल अपने छात्रों लोगों को स्वदेश लाने का काम किया है बल्कि दूसरे देशों की उतनी ही तन्मयता से मदद की है। अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह कदम नहीं उठाया होता तो मालदीव जैसे देश अपने छात्रों और नागरिकों को शायद ही बचा पाते। क्योंकि उनके पास न तो अपने लोगों को लाने के लिए न ही चिकित्सा उपकरण लाने के लिए चार्टेड प्लेन की व्यवस्था करने की क्षमता थी। लेकिन मोदी के निर्देश पर न केवल हवाईअड्डों पर फंसे लोगों को निकालने की व्यवस्था की गई बल्कि उनके ठहरने की व्यवस्था करने के लिए तत्काल कदम उठाए गए।

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