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पंजाब में केजरीवाल ने जिसको बहन बोला उसी को दिया धोखा, वादाखिलाफी कर पुलिस से पिटवाया,लोगों ने कहा- ऐसा कोई सगा नहीं, जिसको केजरीवाल ने ठगा नहीं

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जनता की भावनाओं के साथ किस तरह खेलना है, इसके लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से बेहतर खिलाड़ी कोई नहीं हो सकता। केजरीवाल ने स्थायी नौकरी के लिए संघर्ष कर रहे टीचर्स और अन्य कर्मचारियों को स्थायी करने के सपने दिखाकर पंजाब में सरकार तो बना ली, लेकिन जब सपने को सच में बदलने की बारी आई तो उन अस्थायी टीचर्स और कर्मचारियों को तारीख पे तारीख और पुलिस की लाठियां मिल रही हैं। इससे नाराज टीचर्स और कर्मचारी केजरीवाल के चुनाव पूर्व किए गए वादे की याद दिला कर प्रदर्शन कर रहे हैं। इस दौरान पंजाब में केजरीवाल ने जिसको बहन बोला उसी को धोखा देकर पिटवाने का मामला सामने आया है। 

दरअसल सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ पुलिसकर्मियों को एक महिला को पकड़ते और मारपीट करते हुए देखा जा सकता है। साथ ही दावा किया जा रहा है कि वीडियो में जिस महिला के साथ मारपीट हो रही है, वो कोई और नहीं, बल्कि केजरीवाल की मुंहबोली बहन सिप्पी शर्मा हैं, जिसे चुनाव से ठीक पहले केजरीवाल ने बहन कहकर पानी की टंकी से उतारा था। रविवार (31 जुलाई, 2022) को अस्थाई टीचर्स ने संगरूर के सुनाम में मुख्यमंत्री भगवंत मान के आवास के सामने प्रदर्शन किया, क्योंकि एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने मुख्यमंत्री भी आने वाले थे। इस दौरान केजरीवाल की मुंहबोली बहन और पीटीआई टीचर्स यूनियन की सदस्य सिप्पी शर्मा के साथ पुलिस ने मारपीट की। 

सोशल मीडिया पर यह वीडियो वायरल होने के बाद लोगों में काफी आक्रोश देखा जा रहा है। केजरीवाल पर वादाखिलाफी के आरोप लगाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि केजरीवाल ने पंजाब चुनाव से पहले सिप्पी शर्मा नाम की लड़की को बहन बनाया और सत्ता आने के बाद उसी बहन को पुलिस के हाथो पिटवा दिया। बीजेपी नेता तरुण चुग केजरीवाल पर निशाना साधते हुए लिखा, “ऐसा कोई सगा नहीं इसने जिसको ठगा नहीं”।

एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “केजरीवाल की मुंहबोली बहन को भगवंत मान की सरकार ने लाठियों से पिटवाया। चुनाव से पहले केजरीवाल ने जिस सिप्पी शर्मा को अपनी बहन कहा था उसी को सरकार बनने के बाद पंजाब पुलिस द्वारा पीटा जा रहा है।

पंजाब में सरकार बनने के बाद केजरीवाल और राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अस्थायी टीचर्स के मामले में कोई फैसला नहीं लिया। टीचर्स का आरोप है कि भर्ती की उम्र या तो निकल चुकी है या निकलने वाली है। ऐसे में उनके सामने प्रदर्शन के अलावा कोई विकल्प नहीं है। वहीं बीजेपी नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने ट्विट किया, “चुनाव से पहले – बेरोजगारों को नौकरियां देंगे,चुनावों के बाद – बेरोजगारों को डंडे मारेंगे और उन पर केस दाख़िल करेंगे। ये हैं केजरीवाल का दिल्ली मॉडल पंजाब में।”

अस्थायी टीचर्स का आरोप है कि वह पिछले 11 वर्षों से स्थायी होने की प्रतिक्षा कर रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी भी सरकार ने उन पर ध्यान नहीं दिया है। बेरोजगार टीईटी पास शिक्षक संघ के अध्यक्ष दीपक काम्बोज ने कहा कि वे सरकार से 6,635 टीचर्स की भर्ती पूरी करने और 2,364 टीचर्स की भर्ती बहाल करने की मांग कर रहे थे, जिसे अदालत ने रद्द कर दिया। वे यह भी मांग कर रहे थे कि सरकार 5,994 टीचर्स की भर्ती शुरू करे, जिनके लिए पिछले साल नवंबर में विज्ञापन दिया गया था।

गौरतलब है कि पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मोहाली में कुछ टीचर्स पानी की टंकी पर चढ़ गए थे। ये संविदा शिक्षक तत्कालीन चन्नी सरकार से सेवाओं को नियमित करने सहित कई मागों को लेकर दबाव बना रहे थे। जिनसे बातचीत करने अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान पहुंचे थे। इस दौरान केजरीवाल ने सिप्पी शर्मा को कहा था कि वह उन्हें अपना भाई मानती है, तो नीचे आ जाए। केजरीवाल ने पंजाब सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ये सरकार बहरी हो चुकी है और कोई आपकी बात नहीं सुनने वाला।

केजरीवाल ने प्रदर्शनकारी टीचर्स से कहा था, “मैं आपसे गुजारिश करने के लिए आया हूं, मुझे शर्म आ रही है पूरे समाज पर, पूरी व्यवस्था के ऊपर कि हमारे शिक्षकों को आज ऐसे टंकी के ऊपर बैठकर प्रदर्शन करना पड़ रहा है। मैं आपसे विनती करने आया हूं कि आप लोग नीचे आ जाओ, मैं आपसे वादा करता हूं कि हमारी सरकार आने के बाद दिल्ली में जैसे शिक्षकों की सारी परेशानियां दूर हो गईं। वैसे ही पंजाब में भी सारी सुविधाएं दी जाएंगी।”

प्रदर्शनकारी टीचर्स सिप्पी शर्मा ने उस समय कहा था कि उन्हें पढ़ाते हुए 18 साल हो गए और वेतन मात्र 6,000 रुपये ही मिलते हैं। उनकी मांग है कि सरकार उन्हें जल्द स्थायी करें। पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान इन अस्थाई शिक्षकों ने आम आदमी पार्टी का पूरा समर्थन किया था। टीचर्स की उम्मीद थी कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार आने के बाद उनकी मांग पूरी होगी। लेकिन सरकार बनने के बाद उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है। अब धरना-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर है। 

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