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एक मुख्यमंत्री इतना संवेदनहीन कैसे हो सकता है?

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राजस्थान के बारां जिले में दो नाबालिग दलित बहनों के साथ सामूहिक दुष्कर्म मामले में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का काफी असंवेदनशील बयान सामने आये हैं। उन्होंने मामले में सफाई देते हुए आरोपियों का बचाव किया है। अशोक गहलोत के बयान से लगता है कि क्या एक मुख्यमंत्री इतना संवेदनहीन कैसे हो सकता है?

बारां जिले के छबड़ा निवासी दोनों दलित बहनों का गांव के ही चार युवकों ने गत 18 सितंबर को उस समय अपहरण किया, जब वे खेत जा रही थी। 18 से 21 सितंबर तक आरोपी युवक दोनों नाबालिग लड़कियों को कोटा, जयपुर और अजमेर तक ले गए। जहां दोनों के साथ गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया गया। दैनिक भास्कर के अनुसार आरोपियों ने नाबालिग लड़कियों को पुलिस के सामने कुछ बोलने पर जान से मारने की धमकी भी दी। इस दौरान लड़कों के पकड़े जाने के बावजूद उन्हें छोड़ दिया गया। वहीं, लड़कियों को सखी केंद्र भेजा गया।

आजतक के अनुसार दोनों बहनों का आरोप है कि उन्हें सखी केंद्र में भी धमकाया गया था। पीडित लड़कियों के पिता का कहना है कि उनकी बेटियों के साथ गलत हुआ है, लेकिन पुलिस ने आरोपियों को छोड़ दिया।

बारां जिले की एक लड़की सिर्फ 13 साल की है, जबकि दूसरी की उम्र सिर्फ 15 साल है। तीन दिन तक इनके साथ सामूहिक बलात्कार हुआ। आरोपियों ने पकड़े जाने से पहले इन्हें जान से मारने की धमकी दी। परिवारवालों का आरोप है कि पुलिस ने आरोपियों पर कार्रवाई नहीं की और उन्हें छोड़ दिया।

जागरण के अनुसार नाबालिगों के पिता का आरोप है कि पहले तो पुलिस ने दस दिन तक दोनों बेटियों की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज नहीं की और फिर आरोपित खुद घर छोड़ गए। दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज करने के बाद खानापूर्ति की जा रही है।

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