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मोदी सरकार को बदनाम करने की अंतर्राष्ट्रीय साजिश का खुलासा: ग्रेटा ने गलती से शेयर कर दिया सीक्रेट डॉक्यूमेंट

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किसान आंदोलन के जरिए मोदी सरकार को बदनाम करने की अंतर्राष्ट्रीय साजिश का खुलासा हुआ है। दिल्ली बॉर्डर के पास जारी किसान आंदोलन के समर्थन में अमेरिकी पॉप सिंगर रिहाना, पॉर्न स्टार मिया खलीफा के साथ कई अन्य अंतर्राष्ट्रीय हस्तियों के ट्वीट के बाद दुनियाभर में इस मुद्दे पर चर्चा हो रही है। लेकिन 3 फरवरी को एनवायरमेंट एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग की एक गलती ने भारत को बदनाम करने की अंतर्राष्ट्रीय साजिश की पोल खोल कर रख दी।

ग्रेटा थनबर्ग ने किसान आंदोलन के समर्थन में एक ट्वीट किया, लेकिन कुछ देर बाद ही उन्होंने डिलीट भी कर दिया। जिसकी सोशल मीडिया पर जमकर चर्चा हो रही है। इस ट्वीट में गूगल डॉक्स की एक फाइल शेयर की गई थी। इस फाइल में भारत में चल रहे किसान आंदोलन के समर्थन में सोशल मीडिया कैंपेन का शेड्यूल शेयर किया गया था। इतना ही नहीं इस फाइल को शेयर करते हुए ग्रेटा थनबर्ग ने टूलकिट शब्द का इस्तेमाल किया था।

ट्वीट में गूगल डॉक्स शेयर करते हुए ग्रेटा ने लिखा कि जो मदद करना चाहते हैं यह टूलकिट उनके लिए है। इस डॉक्स में मोदी सरकार पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव बनाने की कार्ययोजना का पूरा विवरण था। हालांकि यह डॉक्स ग्रेटा ने गलती से ट्वीट होने पर उसे डिलीट भी कर दिया, लेकिन तब तक कई लोग इस डॉक्स को डाउनलोड कर चुके थे। 

आप भी देखिए गूगल डॉक्स-

डॉक्स से यह भी पता चलता है कि यह अभियान 25 जनवरी से पहले से चल रहा है। ग्रेटा के डॉक्स फाइल में खासतौर पर जो बातें लिखी गई थीं, उसमें कुछ इस तरह से है-

* प्रदर्शन स्थल पर जाकर आंदोलन में शामिल होने के लिए पहुंचे। एकजुटता प्रदर्शन करने वाली तस्वीरें ई मेल करें।

* डिजिटल स्ट्राइक- #AskIndiaWhy हैशटैग के साथ फोटो/वीडियो मैसेज 26 जनवरी तक या उससे पहले ट्विटर पर पोस्ट कर दिए जाएं। इसमें प्रमुख लोगों को टैग किया जाय।

* 4-5 फरवरी को ट्विटर पर तूफान लाने की योजना- किसान आंदोलन से जुड़ी तस्वीरें, वीडियो मैसेज हैशटैग के साथ 5 फरवरी तक शेयर कर दिए जाएं।

* स्थानीय प्रतिनिधियों से संपर्क कर भारतीय सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की कोशिश करें।

* दूतावासों, स्थानीय सरकारी दफ्तरों के साथ अडानी और अंबानी की कंपनियों के बाहर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएं।

किसान आंदोलन को लेकर अचानक विदेशी हस्तियों के ट्वीट्स ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। एक पोस्ट के लिए करोड़ों रुपये लेने वाले ये सेलेब्स आखिर किसान आंदोलन से जुड़ा ट्वीट क्यों कर रहे हैं जबकि इनका खेती-किसानी से कोई लेना-देना ही नहीं है और ना ही नए कृषि कानून से उनके ऊपर कोई फर्क पड़ने वाला है। ग्रेटा के इस डॉक्स ने इसका खुलासा कर दिया है। बिना पैसे के ये कुछ नहीं करते और इसमें भारत को अस्थिर करने वाले तत्वों की गहरी साजिश है। इस पर्दाफाश ने ये भी साफ कर दिया है कि यह विरोध राजनीति से प्रेरित है और आंदोलन को समर्थन दे रहे लोगों का किसानों से कोई लेना-देना नहीं है। प्रदर्शनकारी सिर्फ अंतर्राष्ट्रीय साजिश का मोहरा बने हुए हैं।

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