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विजय माल्या को झटका, ब्रिटिश हाईकोर्ट ने खारिज की सुप्रीम कोर्ट जाने की अर्जी

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शराब कारोबारी विजय माल्य को एक बड़ा झटका लगा है। ब्रिटिश हाई कोर्ट ने भगोड़े माल्या की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने सुप्रीम कोर्ट में प्रत्यर्पन केस में अर्जी देने का आवेदन दिया था। अब हाई कोर्ट की ओर से एक समय सीमा तय की जाएगी, जिसमें माल्या के प्रत्यर्पण की पूरी प्रकिया को संपन्न किया जाएगा। इससे पहले सोमवार को इंग्लैंड और वेल्स की हाई कोर्ट ने भारत में उनके प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील को खारिज कर दिया था।

बॉम्बे हाई कोर्ट से भी लगा था झटका
इसके पहले पिछले साल माल्या को बॉम्बे हाई कोर्ट से भी बड़ा झटका लगा था। बॉम्बे हाई कोर्ट ने विजय माल्या की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उसने सरकारी एजेंसियों द्वारा उसकी संपत्ति को जब्त करने की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की थी। माल्या भारतीय बैंकों के साथ 9,000 करोड़ रुपये के बकाए में धोखाधड़ी और मनी लांड्रिंग करने के आरोप में वांछित है।

विजय माल्या जैसे लोगों को शिकंजे में कसने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की मेहनत रंग लाती दिख रही है। सरकार की कोशिशें एक नजर में –

विजय माल्या के प्रत्यर्पण को मंजूरी
मोदी सरकार के प्रयासों का ही नतीजा है कि ब्रिटेन ने भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या के प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी चुकी है। फिलहाल वह प्रत्यर्पण की कार्यवाही का सामना कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की अगुआई में केंद्र सरकार माल्या के फरार होने के बाद से ही उसे भारत लाने की कोशिश में लगी थी। मोदी सरकार ने माल्या को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत माल्या पर कार्रवाई की और कोर्ट ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया। भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून-2018 के तहत माल्या पहला अपराधी है जिसे भगोड़ा घोषित किया गया।

माल्या के खिलाफ 2014 में शुरू हुई सीबीआई जांच
2014 में सीबीआई ने बैंक लोन में गड़बड़ी की जांच शुरू की और चार्जशीट दाखिल की। जांच की कार्रवाई आगे बढ़ी तो विजय माल्या देश से फरार हो गए और ब्रिटेन के लंदन में जा छिपे। इसके बाद पीएम मोदी की पहल पर माल्या का पासपोर्ट रद्द कर दिया गया। सरकार की ओर से ब्रिटेन को प्रत्यर्पण के लिए अनुरोध पत्र सौंपा गया। अक्टूबर, 2017 में पहली बार माल्या को लंदन में गिरफ्तार हुए। तभी साफ हो गया था कि मोदी सरकार इस भगोड़े को छोड़ने वाली नहीं है। माल्या के खिलाफ आर्थिक गबन के कई मामले चल रहे हैं। कुछ मामलों में अदालत के निर्देश पर माल्या की कंपनियों के स्वामित्व वाली परिसंपत्तियां जब्त की गई हैं।

विजय माल्या की संपत्ति को अटैच करने का आदेश
08 मई, 2018 को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने फ़ॉरेन एक्सचेंज रेग्युलेशन ऐक्ट (FERA) उल्लंघन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में विजय माल्या की संपत्तियों को अटैच करने का आदेश दिया। गौरतलब है कि 9,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में भारत के ‘भगोड़े’ हैं और मार्च 2016 से लंदन में रह रहे हैं। स्कॉटलैंड यार्ड के प्रत्यर्पण वॉरंट पर गिरफ्तारी के बाद से वह जमानत पर हैं।

सरकार की पहल पर माल्या को लंदन की कोर्ट से मिला झटका
ब्रिटेन और भारत में विजय माल्‍या पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। इनमें से एक मामले में विजय माल्या की याचिका को लंदन की एक कोर्ट ने खारिज कर दिया। गौरतलब है कि भारत के 13 बैंकों के समूह ने माल्या से 1.55 अरब डॉलर से अधिक की वसूली के लिए यहां एक मामला दर्ज कराया था। अदालत के इस आदेश से 10, 000 करोड़ रुपये से अधिक राशि वसूले जाने का रास्ता साफ हो गया।

विजय माल्या की पीठ पर कांग्रेस नेताओं का ‘हाथ’
गौरतलब है कि विजय माल्या की पीठ पर कांग्रेस के शीर्ष नेताओं हाथ था, इसलिए वे एक के बाद एक घोटाला करने में सफल होते चले गए। 2008 से जारी घोटाले पर जब मोदी सरकार ने शिकंजा कस दिया तो माल्या लंदन भाग गए, लेकिन केंद्र की मोदी सरकार की सख्ती के चलते वे वहां भी चैन से नहीं रह पा रहे हैं।

भ्रष्टाचार पर सख्ती के लिए बनाए गए कई कानून
मोदी सरकार ने हर बार यह साबित किया है कि भ्रष्टाचार के मामले में कोई कितना भी बड़ा क्यों ना हो बख्शा नहीं जाएगा। सरकार हर स्तर पर देश के आर्थिक अपराधियों को कानून के दायरे में लाने की कोशिश कर रही है और इसके लिए कई सख्त कानून भी बनाए हैं, आइये डालते हैं एक नजर-

*फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स ऑर्डिनेंस
*राष्ट्रीय वित्तीय सूचना प्राधिकरण को मंजूरी
*संपत्ति गुणवत्ता की समीक्षा
*इंसोल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड
*अनरेग्युलेटेड डिपॉजिट स्कीम पर रोक विधेयक
*पीएसबी पुनर्पूंजीकरण
*एफआरडीआई विधेयक
*बेनामी लेनदेन (निषेध) अधिनियम

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