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पंजाब सरकार और आढ़तियों के गठजोड़ में दरार, खत्म होने वाला है किसानों का आंदोलन, जानिए कैसे

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किसानों के आंदोलन के पीछे की ताकतें अब पस्त पड़ने लगी हैं। जिन लोगों ने किसानों को भड़कार अपना स्वार्थ सिद्ध करने की साजिश रची थी, उनके मंसूबो पर मोदी सरकार ने पानी फेर दिया है। अब किसानों का अंदोलन बस चंद दिनों की बात है। जल्दी है दिल्ली की सीमाओं से किसान नेताओं के तंबू उखड़ने वाले हैं।

दरअसल किसानों का आंदोलन मुख्य रूप से हरियाणा और पंजाब में ही सिमटा हुआ था। किसान नेताओं के लाख भड़काने के बाद भी देशभर के किसान इनके साथ नहीं आए। इसकी सबसे बड़ी वजह हैं पंजाब और हरियाणा के आढ़तिया। प्रधानमंत्री मोदी जिन्हें बिचौलिया कहते हैं, ये वही आढ़तिया हैं। पंजाब में किसानों के नाम पर यह आढ़तिया लाखों करोड़ रुपये कमाते हैं और मोदी सरकार के कदमों से इनकी कमाई पर संकट आ गया है।

आपको बता दें कि केंद्र की मोदी सरकार ने 2015-16 में ही देशभर में किसानों से एमएसपी पर फसल खरीदने पर उसका भुगतान सीधे किसानों के खातों में करने का आदेश दिया है। देशभर में एफसीआई ऐसा करने भी लगी है, लेकिन पंजाब और हरियाणा की सरकारें इसे लागू करने में असमर्थता जताती रही। इसकी पीछे इन्हीं आढ़तियों की लॉबी है, जिनका पंजाब सरकार में बोलबाला है। पंजाब में कांग्रेस हो या अकाली दोनों दलों के नेताओं का इन अढ़तियों से गठजोड़ है और ये मिलकर किसानों और सरकार को चूना लगाते हैं। इस बार जब मोदी सरकार ने किसानों का भुगतान डीबीटी से करने पर सख्ती दिखाई तो इन लोगों ने कृषि कानूनों के नाम पर किसानों को भड़का दिया।

बताया जा रहा है कि पंजाब से मंत्रियों का एक समूह केंद्र सरकार से मिलने आया था और किसानों को डीबीटी के जरिए भुगतान पर कुछ और मोहलत मांगी थी। लेकिन केंद्र सरकार ने साफ कह दिया है कि अगर किसानों को डीबीटी के जरिए भुगतान नहीं किया गया तो केंद्र इस बार पंजाब से गेहूं नहीं खरीदेगा। इस समय गेहूं की फसल की खरीदी चल रही है। यानि अगर पंजाब सरकार ने आढ़तियों की मानी तो किसानों की फसल नहीं खरीद पाएगी और किसानों को भी यह खेल समझ में आ गया है। इसलिए अब कहा जा रहा है कि जल्द ही किसानों का आंदोलन खत्म हो सकता है। क्योंकि किसानों को समझ आ गया है कि ये किसान नेता आढ़तियों और पंजाब सरकार के दलाल है, जो उनके कंधे पर बंदूक रख कर अपना उल्लू सीधा करना चाहते हैं।

इस सच्चाई को आप वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह के इस विश्लेषण से भी आसानी से समझ सकते हैं।

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