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‘किसान आंदोलन’ के नाम पर गांव-गांव कोरोना पहुंचाने वाले किसानों की नई करतूत, अब इस प्रदर्शन में जुटे हजारों किसान

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कोरोना महामारी की दूसरी जानलेवा लहर के बीच किसानों का गैरजिम्मेदार रवैया जारी है। दिल्ली की सीमाओं पर पिछले छह महीने से अधिक समय से डेरा जमाए किसानों ने कोरोना संकट के दौरान करियर का काम किया और पंजाब, हरियाणा, यूपी, उत्तराखंड समेत कई राज्यों में गांव-गांव तक कोरोना पहुंचाया। लेकिन यह किसान इतने पर भी शांत नहीं हुआ हैं। अब इन किसानों ने पंजाब में एक नया आंदोलन शुरू कर दिया है। 28 मई से तीन दिनों तक चलने वाले इस आंदोलन में हजारों की संख्या में किसान पंजाब में लॉकडाउन की अवधि बढ़ाने का विरोध कर रहे हैं। इनका आरोप है कि पंजाब की कांग्रेस सरकार कोरोना प्रबंधन में पूरी तरह से विफल रही है।

भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) की पंजाब यूनिट ने कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार द्वारा कोरोना वायरस से निपटने में असफल रहने के विरोध में इस तीन दिवसीय विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया है। पटियाला में हजारों की संख्या में किसान इस आंदोलन में जुटे हुए हैं। राज्य के बाकी हिस्सों में भी किसान कोरोना प्रोटोकाल की धज्जिया उड़ाकर भीड़ में जमा हैं। इन किसानों ने आरोप लगाया है कि राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने में पूरी तरह से विफल रही है। इसी कारण राज्य में कोरोना केस बढ़े हैं।

कोरोना महामारी के बीच किसानों का यह रवैया बर्दाश्त के काबिल नहीं है। आपको बता दें कि राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) के महामारी विज्ञानियों ने किसानों के विरोध प्रदर्शनों को पंजाब और दिल्ली में कोरोना के नए वैरिएंट के फैलने के लिए जिम्मेदार ठहराया है। एनसीडीसी के निदेशक डॉ सुरजीत सिंह के मुताबिक, “पंजाब ने B.1.1.7 कोरोना वैरिएंट के मामलों के बढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

जाहिर है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली पंजाब की कांग्रेस सरकार ने कोरोना से लड़ने की बजाय शुरुआत में किसानों के विरोध को अपना समर्थन दिया था, लेकिन कोरोना के केस बढ़े तो इन्हीं प्रदर्शनकारी किसानों ने अब इसी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राज्य में बीते कुछ हफ्तों के दौरान कोरोना के साथ ही ब्लैक फंगस के मामले भी तेजी से बढ़े हैं।

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