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कोर्ट से सीरो सर्वे की रिपोर्ट छिपाने पर दिल्ली सरकार को लगी फटकार, टेस्टिंग कैपेसिटी बर्बाद करने पर उठे सवाल

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कोरोना गाइडलाइंस से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने सीरो सर्वे की रिपोर्ट को कोर्ट से छिपाने और मीडिया में पहले रखने पर दिल्ली की केजरीवाल सरकार को कड़ी फटकार लगाई। रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने केजरीवाल सरकार से सवाल किया कि वह अपनी टेस्टिंग कैपेसिटी को क्यों बर्बाद कर रही है?

दिल्ली सरकार का पक्ष रखते हुए अडिशनल सॉलिसिटर जनरल संजय जैन ने कोर्ट को बताया कि दिल्ली सरकार ने सीरो सर्विलांस की रिपोर्ट मीडिया को नहीं दी। उन्होंने दिल्ली सरकार का बचाव करते हुए कहा कि ऐसा नहीं माना जाना चाहिए कि दिल्ली सरकार की आरटीपीसीआर टेस्ट करने की इच्छा नहीं है। सरकार अपनी क्षमता के हिसाब से ज्यादा से जयादा टेस्ट करवा रही है। 

हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि सरकार तीसरी सीरो सर्वे रिपोर्ट को पहले कोर्ट के सामने रखेगी। इसके बाद ही रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाएगा। लेकिन मीडिया में तीसरे सीरो सर्वे की रिपोर्ट से जुड़ी खबरें आने के बाद कोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया और सरकार से नाराजगी जतायी। दिल्ली में 1 से 7 सितंबर तक तीसरा सीरो सर्वे किया गया था। इसमें प्रत्येक वार्ड से 17 हजार से ज्यादा नमूने लिए गए थे। इससे पहले सीरो सर्वे में 23 प्रतिशत और दूसरे सीरो सर्वे में 29 प्रतिशत लोगों में कोरोना एंटीबॉडी पाई गई थी।

दिल्‍ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्‍येंद्र जैन ने कहा था कि सरकार ने हर महीने सीरो सर्विलांस कराने का फैसला किया है। हर महीने एक से पांच तारीख के बीच, चुनिंदा इलाकों में रैंडमली लोगों का ऐंटीबॉडी टेस्‍ट किया जाएगा। इससे दिल्‍ली में कोरोना के प्रसार को समझने में आसानी होगी।

बता दें कि संक्रामक बीमारियों के संक्रमण को मॉनिटर करने के लिए सीरो सर्वे कराए जाते हैं। इन्हें एंटीबॉडी सर्वे भी कहते हैं। इसमें किसी भी संक्रामक बीमारी के खिलाफ शरीर में पैदा हुए एंटीबॉडी का पता लगाया जाता है। कोरोनावायरस या SARS-CoV-2 जैसे वायरस से संक्रमित मामलों में ठीक होने वाले मरीजों में एंटीबॉडी बन जाती है, जो वायरस के खिलाफ शरीर को प्रतिरोधक क्षमता देती है।

 

 

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