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बीबीसी के खिलाफ लंदन की सड़कों पर उतरे लोग, फाइजर की जानलेवा वैक्सीन के मामले में झूठ बोलने का लगाया आरोप, भारत के विपक्षी दलों ने की थी वैक्सीन की वकालत

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ब्रिटेन की मीडिया कंपनी बीबीसी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की छवि खराब करने के लिए 22 साल पुराने मामले में एक विवादित डॉक्यूमेंट्री बनाया, लेकिन फाइजर कंपनी की घटिया कोरोना वैक्सीन से मरते लोग नजर नहीं आए। फाइजर की वैक्सीन कोविड-19 से लड़ने में नाकाम साबित हुई है। यह वैक्सीन लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। इस घातक वैक्सीन के खिलाफ लोग सड़क पर उतर कर प्रदर्शन कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि वैक्सीन को लेकर मीडिया खासकर बीबीसी ने बार-बार झूठ बोला। लोगों में बीबीसी के खिलाफ काफी आक्रोश देखा जा रहा है। वहीं भारत में विपक्षी दलों ने इस फाइजर की कोरोना वैक्सीन के इस्तेमाल को लेकर मोदी सरकार पर दबाव बनाया था।

लंदन की सड़क पर बीबीसी के खिलाफ प्रदर्शन 

बीबीसी के प्रोपेगैंडा और फेक न्यूज को लोकर ब्रिटेन के लोगों में भी नाराजगी है। बीबीसी एक एजेंडे के तहत प्रोपेगेंडा का माध्यम बन चुका है। यही वजह है कि लोग लंदन की सड़क पर उतरकर उसके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। 21 जनवरी, 2023 को लंदन के पोर्टलैंड प्लेस स्थित बीबीसी ब्रॉडकास्टिंग हाउस के सामने लोगों ने ‘Truth Be Told protest’ किया। इसमें प्रदर्शनकारियों ने “बीबीसी शेम ऑन यू”, “बीबीसी लाइज, लाइज,लाइज” यानि झूठ, झूठ, झूठ और “टेक डाउन बीबीसी” की आवाज बुलंद की। हालांकि यह प्रदर्शन प्रधानमंत्री मोदी की विवादित डॉक्यूमेंट्री को लेकर नहीं था, लेकिन इस प्रदर्शन ने बीबीसी की विश्वसनीयता पर एकबार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। लोगों ने कहा कि फाइजर की कोरोना वैक्सीन को लेकर बार-बार झूठ बोला गया। वैक्सीन को 100 प्रतिशत कारगर बताया गया। वे झूठ से तंग आ चुके हैं और सच्चाई के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।

फाइजर वैक्सीन से मृत्यु और बीबीसी के झूठ से फूटा गुस्सा

दरअसल यह प्रदर्शन फाइजर के एक वैक्सीन के खिलाफ हो रहा है। वैक्सीन से लोगों के बीमार होने और कोई लोगों की मृत्यु होने से ब्रिटेन की जनता में काफी आक्रोश देखा जा रहा है। लोग फाइजर कंपनी से इसकी जिम्मेदारी लेने और पीड़ितों को मुआवाजा देने की मांग कर रहे हैं। अब लोग बीबीसे से भी सवाल कर रहे हैं कि वो इस मामले में मौन क्यों है ? लोग सवाल पूछ रहे हैं कि मीडिया कहाँ है? ब्रिटेन में लोग वैक्सीन से मर रहे हैं, लेकिन यह बीबीसी को दिखाई नहीं दे रहा है। लोग बीबीसी पर सच्चाई छुपाने और पीड़ितों के साथ अन्याय करने का आरोप लगा रहे हैं। ब्रिटेन की जनता वैक्सीन से मारे गए गए लोगों की तस्वीर लेकर सड़क पर मार्च निकाल रही है और बीबीसी से सच्चाई बताने और पीड़ितों को न्याय दिलाने की बात कर रही है।

टीकाकरण से सुरक्षा के बारे में जनता से बोला गया झूठ

ब्रिटेन के उत्तर पश्चिम लीसेस्टरशायर के सांसद एंड्रयू ब्रिजेन ने दावा किया कि कोविड -19 वैक्सीन से हुए नुकसान को लेकर रैली निकाली जा रही है। उन्होंने कहा कि इससे “सच्चाई की जीत होगी”। ब्रिजेन ने शनिवार (21 जनवरी) को लंदन में Truth Be Told protest के दौरान आरोप लगाया कि टीकाकरण से सुरक्षा के बारे में जनता से झूठ बोला गया था। ऐसे दावे किए गए थे, जिनकी विरोधियों ने लगातार आलोचना की थी। सांसद ब्रिजेन ने कहा कि वह “झूठ से तंग आ चुके हैं” और सच्चाई के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।

फाइजर की वैक्सीन से पीड़ितों को मुआवजा की मांग

अब ब्रिटने में फाइजर की वैक्सीन से पीड़ित लोगों को मुआवाजे की मांग हो रही है। भारतीय मूल के डॉक्टर असीम मलहोत्रा का कहना है कि जुर्माना इतना बड़ा होना चाहिए कि दवा कंपनियों को दिवालिया होने का जोखिम हो और वरिष्ठ अधिकारियों को जेल जाना चाहिए। अगर उन्हें पता था कि इससे नुकसान होने वाला है। वहीं कई लोगोंं ने डॉक्टर मलहोत्रा का समर्थन किया है। लोगों का कहना है कि फाइजर को वैक्सीन से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। सभी को यह स्वीकार करना चाहिए कि वैक्सीन से नुकसान हुआ है। लोगों को इससे क्षति पहुंची है। यहां तक कि उनकी मृत्यु भी हुई है। अब इसके लिए लिए स्टैंड लेने का समय आ गया है।

पीएम मोदी की दूरदर्शिता, फाइजर की जानलेवा वैक्सीन से बचे देशवासी

जहां ब्रिटेन में फाइजर की जानलेवा वैक्सीन के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर गए हैं, वहीं भारत के विपक्षी दलों ने फाइजर की वैक्सीन को लेकर मोदी सरकार पर दबाव डाला था। यहां तक कि उन्होंने फाइजर को भारत में अनुमति दिलाने के लिए स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सीन और कोविशील्ड के खिलाफ प्रोपेगैंडा किया था। स्वदेशी वैक्सीन के असर को लेकर देश की जनता में भ्रम फैलाने की कोशिश की थी। आज जब ब्रिटने में इस वैक्सीन के खिलाफ आवाजें उठ रही हैं तो ये नेता अपनी जुबान बंद किए हुए हैं। अगर फाइजर की वैक्सीन को भारत में अनुमति मिल जाती तो भारत के लोगों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ता। प्रधानमंत्री मोदी ने दूरदर्शिता का परिचय देते हुए स्वदेशी वैक्सीन को प्राथमिकता दी और अपने देश के लोगों को बचा लिया। 

आइए एक नजर उन विपक्षी नेताओं और पत्रकारों पर डालते हैं, जिन्होंने फाइजर की इस जानलेवा वैक्सीन की वकालत की थी…

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