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कोरोना संकट काल में लॉकडाउन के दौरान कृषि वस्तुओं का निर्यात 23 प्रतिशत बढ़ा

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कोरोना संकट काल में लॉकडाउन के दौरान कृषि वस्तुओं के निर्यात में भारी वृद्धि हुई है। इस दौरान मार्च से जून तक के पांच महीने में ही 25 हजार 552 करोड़ रुपये से ज्यादा का कृषि उत्पादों का निर्यात किया गया, जो 2019 की इसी अवधि में हुए 20734.8 करोड़ रूपए के निर्यात की तुलना में 23.24 प्रतिशत अधिक है। आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्‍य पाने के लिए कृषि निर्यात को बढ़ावा दिया जाना आवश्‍यक है। निर्यात बढ़ने से किसानों, उत्पादकों और निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार का लाभ उठाने और अपनी आय बढ़ाने में मदद मिलती है। निर्यात से खेती का रकबा बढ़ाने और कृषि उत्पादन बढ़ाने में मदद मिली है।

आयात पर निर्भरता कम
भारत का कृषि निर्यात 2017-18 में देश के कृषि जीडीपी का जहां 9.4 प्रतिशत था, वहीं 2018-19 में यह 9.9 प्रतिशत हो गया जबकि भारत के कृषि जीडीपी के प्रतिशत के रूप में कृषि आयात 5.7 प्रतिशत से घटकर 4.9 प्रतिशत रह गया। इसके साथ ही देश की कृषि उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम हो गई है। आजादी के बाद से वर्ष 1950-51 में भारत का कृषि निर्यात लगभग 149 करोड़ रुपये था जो 2019-20 में बढ़कर 2.53 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया। कृषि उत्पादन के मामले में शीर्ष पर होने के बावजूद कृषि उत्‍पादों के निर्यात के मामले में देश बड़े कृषि उत्‍पाद निर्यातक देशों की सूची में स्‍थान नहीं पा सका है।

निर्यात को बढ़ावा के लिए व्यापक कार्य योजना
इसको देखते हुए कृषि सहकारिता और किसान कल्‍याण मंत्रालय ने कृषि व्‍यापार को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक कार्य योजना तैयार की है। इसके लिए फसलों के उत्‍पादन और उत्‍पादन पूर्व की स्थितियों से संबधित डेटा की खोज और संकलन का काम शुरु किया गया है। एक समग्र रणनीति विकसित करने के लिए उत्पाद समूहों और फिर विशिष्ट वस्तुओं का उनके उत्‍पादन और निर्यात की स्थितियों तथा मौजूदा चुनौतियों के संदर्भ में विश्लेषण किया गया है और इसके आधार पर हितधारकों के साथ परामर्श के बाद इन क्षेत्रों में आवश्‍यक हस्तक्षेपों की पहचान की गई है। नई कार्ययोजना एक ओर जहां कृषि उत्‍पादों के निर्यात को बढ़ावा देने पर जोर देती है तो वहीं दूसरी ओर ऐसे उत्‍पादों के मूल्‍य संवर्धन पर भी ध्‍यान केन्द्रित करती है।

ब्रांड इंडिया पर जोर
नई निर्यात नीति में मुख्‍य रूप से आरोग्‍य और स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक भोज्‍य पदार्थों, पोषण युक्‍त आहार और इस संदर्भ में ब्रांड इंडिया को बाकायदा एक अभियान के रूप में बढ़ावा देने की तैयारी की गई है और इसके माध्‍यम से भारतीय उत्‍पादों की विदेशी बाजारों में पैठ बनाने की योजना है। इसके लिए विशेष रूप से खाड़ी देशों पर ध्‍यान केन्द्रित किया गया है। वर्तमान में खाड़ी देशों में आयात की जाने वाली वस्‍तुओं में भारत की भागीदारी महज 10-12 प्रतिशत है। एक उत्पाद बाजार मैट्रिक्स को ताकत के उत्पादों की सूची से युक्त किया गया है जिसे नई भौगोलिक और विस्तारित बाजारों की सूची में विस्तारित किया जा सकता है जिन्हें नए उत्पादों के साथ पेश किया जा सकता है।

फल-सब्जियों के निर्यात की असीम संभावनाएं
बागवानी के क्षेत्र में भी भारत में काफी तरक्‍की हो रही है। फलों और सब्जियों के उत्‍पादन के मामले में भारत का विश्‍व में दूसरा स्‍थान है। देश से सालाना 5,638 करोड़ रूपए के 8.23 लाख मिट्रिक टन फलों और 5679 करोड़ रूपए के 31.92लाख मिट्रिक टन सब्जियों का निर्यात होता है। फलों में सबसे ज्‍यादा निर्यात अंगूर का होता है इसके बाद आम, अनार, केला, और संतरे का स्‍थान है। निर्यात की जाने वाली ताजा सब्जियों में प्‍याज, मिली जुली सब्जियां, आलू, टमाटर और हरी मिर्च प्रमुख हैं। हालांकि फलों और सब्जियों के विश्‍व स्‍तर पर होने वाले 208 अरब डॉलर के निर्यात में भारत की हिस्‍सेदारी नहीं के बराबर है। इस स्थिति में सब्जियों के निर्यात की असीम संभावनाएं मौजूद हैं। इसलिए फलों और सब्जियों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी नीति बनाई गई है।

निर्यात संवर्धन मंच का गठन
कृषि सहकारिता और किसान कल्याण विभाग की पहल पर, कृषि निर्यात को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए उत्पाद विशिष्ट निर्यात संवर्धन मंच बनाए गए हैं। आठ कृषि और संबद्ध उत्पादों के लिए निर्यात संवर्धन फोरम (ईपीएफ)। कृषि विभाग और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) केवाणिज्य विभाग के तत्वावधान में अंगूर, आम, केला, प्याज, चावल, पोषण-अनाज, अनार और फूलों की खेती का गठन किया गया है। प्रत्येक निर्यात संवर्धन मंच में संबंधित कृषि उत्‍पादकों के निर्यातकों के साथ साथ ही राज्य और संबंधित विभागों का प्रतिनिधित्व करने वाले आधिकारी सदस्‍य के रूप में शामिल रहेंगे। एपीडा इनमें से प्रत्येक फोरम का अध्यक्ष होगा। फोरम हर दो महीने में कम से कम एक बार बैठक करेगाऔर संबंधित उत्‍पादों के निर्यात से जुड़े मुद्दों पर सुझाव और विशेषज्ञों को बैठक के लिए आमंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठाएगा।

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