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उत्तरकाशी के सिल्क्यारा टनल से सुरक्षित निकले श्रमिक, कांग्रेस और उसके सरपरस्तों की गिद्ध राजनीति की हसरत रह गई अधूरी

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उत्तरकाशी में चल रहा रेस्क्यू ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। सिल्क्यारा सुरंग में पिछले 17 दिनों से फंसे 41 श्रमिकों को सुरक्षित वापस निकाल लिया गया है। इससे देश के 140 करोड़ लोग अब राहत की सांस ले रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, एनडीआरएफ की टीम और ऑपरेशन में लगी अन्य एजेंसियों की लगातार कोशिश से 41 जिंदगियों को बचाया जा सका। इस रेस्क्यू ऑपरेशन पर प्रधानमंत्री मोदी की पैनी नजर थी। वो मुख्यमंत्री धामी से लगातार अपडेट ले रहे थे। श्रमिकों की सुरक्षित निकासी के लिए हरसंभव मदद उपलब्ध करा रहे थे। विदेशों से उपकरण मंगाए गए। अंतरराष्ट्रीय टलन एक्सपर्ट की सेवाएं ली गईं। ऑपरेशन युद्ध स्तर पर चला। श्रमिकों को तुरंत मेडिकल सुविधा प्रदान करने के लिए डॉक्टर, अस्पताल, एंबुलेंस और हेलिकप्टर तक तैयार किया गया था।

देखिए कांग्रेस और उसके सरपरस्तों का शर्मनाक चेहरा

पूरा देश श्रमिकों की सुरक्षित निकासी के लिए प्रार्थना कर रहा था। वहीं कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी नेता, दरबारी पत्रकार और उनके सरपरस्त घड़ियाली आंसू बहा रहे थे। इस मुश्किल और संवेदनशील मामले में भी अपनी निम्न स्तरीय, ओछी और गिद्ध राजनीति से बाज नहीं आ रहे थे। सोशल मीडिया में अपनी नफरत भरी और शर्मनाक ट्वीट्स से बता दिया कि उनकी इस ऑपरेशन में कोई दिलचस्पी नहीं थी। वो आपदा को भी मजाक बनाकर उसमें अपना अवसर तलाश रहे थे। क्रिकेट वर्ल्ड कप के फाइनल में भारत की हार की तरह ऑपरेशन की असफलता की कामना कर रहे थे, ताकि प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधकर गिद्ध राजनीति कर सके।

कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने एक ऐसा ट्वीट किया, जिससे पता चलता है कि वो 17 दिन बाद सोकर उठी हो। नफरत की भावना ने उन्हें इतना अंधा कर दिया है कि उन्हें कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है। उनकी नजर में श्रमिकों की सुरक्षित निकासी के लिए किए जा रहे प्रयास निर्थक थे। सुप्रिया श्रीनेत उन पेशेवर रूदालियों की तरह है, जो मातम के समय सिर्फ विलाप करने लिए बुलाई जाती है। इस मुश्किल ऑपरेशन में भी कांग्रेस की प्रवक्ता विलाप कर रही थी। ऑपरेशन में महीनों लगने की बात कर वह सुरंग में फंसे श्रमिकों के परिजनों और उनके शुभ चिंतकों में दशहत पैदा कर रही थी। 

अब आपको उन विपक्षी नेताओं, दरबारी पत्रकारों और सरपरस्तों का शर्मनाक चेहरा दिखाते हैं, जिसे देखकर हर भारतवासी का माथा शर्म से झूक जाता है। इस संवेदनशील मालमे में भी जिस तरह उन्होंने गिद्ध राजनीति करने की कोशिश की, उसकी अपेक्षा एक जिम्मेदार नागरिक से नहीं की जा सकती…

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