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राजस्थान में यह कैसा महिला सशक्तिकरण? रद्दी की टोकरी में केंद्र की हिदायतें, पुलिस में बिहार से आधी भी नहीं हैं महिलाएं

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महिला सशक्तिकरण के नाम पर राजस्थान सरकार अपनी बीन तो खूब बजाती है, लेकिन हकीकत यह है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के अधीन आने वाले गृह मंत्रालय में ही महिला सशक्तिकरण की धज्जियां उड़ रही हैं। इतना ही नहीं केंद्रीय गृह मंत्रालय नौ साल में पांच बार चिट्ठी भेजकर राज्य सरकार को चेता चुका है। फिर भी सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। पुलिस बल में महिलाओं को सशक्त करने के नाम पर कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

मोदी सरकार सेना के लिए गंभीर, गहलोत पुलिस के लिए भी नहीं
दरअसल, सेना में महिला सशक्तिकरण की नीयत से लैंगिक समानता का मुद्दा उठता रहा हे। मोदी सरकार के कार्यकाल में कई कदम उठाए भी गए हैं। लेकिन राजस्थान पुलिस बलों में जेंडर सुधार की हालत बेहद खस्ता है। राजस्थान पुलिस में महिलाओं का प्रतिनिधित्व महिला सशक्तिकरण के दावों को खोखला साबित कर रहा है। राज्य में 33 फीसदी के मुकाबले महिला पुलिस का आंकड़ा अब तक 9.8 फीसदी ही है।

महिला पुलिस में बिहार पहले और हिमाचल दूसरे नंबर पर
पुलिस नफरी में महिला पुलिसकर्मियों की बात करें तो बिहार इसमें अव्वल है। वहां महिला पुलिसकर्मी कुल नफरी का 25.3 प्रतिशत हैं। यह राजस्थान की तुलना में दोगुना से भी ज्यादा है। महिला पुलिसकर्मियों के मामले में बिहार के बाद दूसरे स्थान पर हिमाचल प्रदेश है, जहां पर महिला पुलिसकर्मियों की संख्या 19.15 फीसदी है।

केंद्र ने भेजी नौ साल में पांच बार एडवाइजरी
हैरानी की बात है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय महिला पुलिस के प्रतिनिधित्व को बढ़ाकर कुल नफरी का 33 फीसदी करने के लिए पिछले 9 वर्ष में 5 बार एडवाइजरी जारी कर चुका है, लेकिन लगता है कि राज्य सरकार हर बार एडवाइजरी को रद्दी की टोकरी के हवाले कर देती है। वह इसे लेकर कतई गंभीर नजर नहीं आती। पुलिस थानों को जेंडर-सेंसेटिव बनाने के लिए केंद्र सरकार लगभग एक दशक से प्रयासरत है। पुलिस में महिला पुलिसकर्मियों का प्रतिनिधित्व 33 प्रतिशत तक करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।

केवल 9.8 फीसदी, उनमें भी लेडी कांस्टेबल ज्यादा
राजस्थान पुलिस की बात करें तो प्रदेश में 2020 के आंकड़ों के अनुसार कुल नफरी में 9339 महिला पुलिसकर्मी हैं। इनमें से 8394 कांस्टेबल और 439 हैड कांस्टेबल हैं। शेष महिला पुलिसकर्मी बड़े पदों पर हें। केंद्र सरकार द्वारा दिए लक्ष्य को पूरा करने के लिए राजस्थान में पुलिस में महिलाओं की भर्ती के लिए विशेष रूप से कोई अभियान भी नहीं चलाया गया।

थानों में नहीं होता बराबरी का व्यवहार
पुलिस व्यवस्था पर करीब दो साल पहले कराए गए एक सर्वे में 22 फीसदी महिला पुलिसकर्मियों से हुई बातचीत में सामने आया कि ज्यादातर इनको इनहाउस कामों जैसे रजिस्टर संधारण, फाइलें संभालने और डेटा खोजने के काम में लगाया जाता है। करीब 50 फीसदी महिला पुलिसकर्मियों का मानना है कि उनके साथ बराबरी का व्यवहार नहीं होता है। इस सर्वे में हर चार में से एक महिला पुलिसकर्मी ने कहा कि थाने में यौन प्रताड़ना के मामलों की जांच करने वाली समिति ही नहीं है।

धीरे-धीरे बढ़ रही है महिलओं की संख्या
महिला पुलिसकर्मियों की कम संख्या पर आला अधिकारियों की माने तो हालात पहले से सुधरे हैं। पहले तो महिलाएं पुलिस में आती ही नहीं थीं। अब आने लगी हैं। पुलिस की भर्तियों में महिलाओं को आरक्षण देने के नियमों का पालन किया जाता है। इसी से धीरे-धीरे पुलिस महकमे मे महिला पुलिसकर्मियों की भागीदारी बढ़कर दस प्रतिशत के करीब जा पहुंची है।

 

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