Home नरेंद्र मोदी विशेष श्रीराम जन्म भूमि मुक्ति आंदोलन से जुड़े लोग कहाँ हैं?

श्रीराम जन्म भूमि मुक्ति आंदोलन से जुड़े लोग कहाँ हैं?

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22 दिसंबर 1949 की रात में बाबरी मस्जिद की बीच वाली गुम्बद में श्री राम लला के प्रकट होने के साथ ही, श्री राम जन्म भूमि की मुक्ति का 77 वां और निर्णायक संघर्ष शुरु हुआ था, जो 05 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों मंदिर के शिलान्यास के साथ पूर्ण होगा। 1528 में बाबर के सेनापति मीर बाकी ने 15 दिनों तक चले युद्ध में असंख्य लोगों का खून बहाने के बाद ही मंदिर को तोप के गोलों से उड़ा सका था, लेकिन श्री राम जन्म भूमि को मुक्त कराने के लिए 1949 तक पांच सौ सालों में 76 बार युद्ध लड़ा गया।
77 वें श्री रामजन्म भूमि मुक्ति आंदोलन के कई नायक और खलनायक रहे हैं। आइए एक नज़र उन लोगों पर डालते हैं जिन्होंने राम मंदिर की मांग को लेकर चले आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाई।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी
श्री राम जन्म भूमि मुक्ति आंदोलन के नायकों में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक ऐसे नायक हैं जो लाल कृष्ण अडवाणी की सोमनाथ से अयोध्या की रथयात्रा के चाणक्य थे और जिन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के पद से श्री राम को जन जन से जोड़ा। यह नियति ही है कि श्रीराम जन्म भूमि मुक्ति आंदोलन को सफल बनाने का संकल्प लेने वाले प्रधानमंत्री मोदी 05 अगस्त 2020 को भूमि पूजन और शिलान्यास के साथ उस संकल्प की सिद्धि करने जा रहे।गोरक्षपीठ और पीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ
उत्तरप्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुगोरक्ष पीठ के पीठाधीश्वर हैं, जो गोरखपुर है। इस गोरक्षपीठ के महंत दिग्विजय नाथ ने वर्ष, 1934 से वर्ष, 1949 तक श्री राम जन्म भूमि के लिए लड़ाई लड़ी। 1949 में रामलला प्रकट होने और वहां पूजा-अर्चना में प्रमुख भूमिका थी। इसके बाद महंत अवैद्यनाथ ने राम मंदिर आंदोलन का दायित्व संभाला और 1984 में देश के सभी पंथों के धर्माचार्यों के साथ ‘श्रीराम जन्मभूमि मुक्त‍ि यज्ञ समिति’ का गठन किया । 22 सितंबर 1989 को अवैद्यनाथ की अध्यक्षता में दिल्ली में विराट हिंदू सम्मेलन हुआ , जिसमें 9 नवंबर, 1989 को अयोध्या में जन्मभूमि पर शि‍लान्यास कार्यक्रम घोषि‍त किया गया था। इसके बाद से गोरखपुर का गोरखनाथ मंदिर राम जन्मभूमि आंदोलन का प्रमुख केंद्र बना, आज उसी गोरक्षपीठ के मंहत योगी आदित्यनाथ उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री हैं।लालकृष्ण आडवाणी
श्री राम जन्म भूमि मुक्ति आंदोलन के नायकों में अग्रड़ी नायक लाल कृष्ण आडवाणी रहे, जिन्होंने 1990 में सोमनाथ से अयोध्या तक रथयात्रा शुरू की थी। हालांकि बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने समस्तीपुर ज़िले में अडवाणी को गिरफ्तार कर लिया। लेकिन इस रथयात्रा से उमड़े हजारों कार सेवकों का जत्था श्री राम मंदिर के निर्माण के लिए अयोध्या पहुंचा लेकिन उत्तर प्रदेश के तत्तकालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने श्री राम जन्म भूमि से दो किमी पहले 30 अकटूबर 1990 को कार सेवकों पर गोलियां चलवा दीं।
लालकृष्ण आडवाणी ने 1992 में एक बार फिर अयोध्या में कारसेवा के लिए पहुंचे और 06 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद का तीनों गुबंद कारसेवकों की भारी भीड़ के कारण गिर पड़ा।लालू प्रसाद यादव
वोट बैंक की राजनीति के कारण 1990 के दशक में श्री राम जन्म भूमि आंदोलन का पुरजोर विरोध बिहार के तत्तकालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने किया। लालू यादव, इस आंदोलन के प्रमुख खलनायकों में से एक हैं। लालू प्रसाद यादव ने लालकृष्ण अडवाणी की रथयात्रा पूरी न होने दी।आज, वही लालू प्रसाद यादव भ्रष्टाचार के मामले में जेल की सलाखों के पीछे हैं और अडवाणी 05 अगस्त को श्री राम जन्म भूमि मंदिर के भूमि पूजन में शामिल होने जा रहे हैं।मुलायम सिंह यादव
1990 के दशक में मंडल की राजनीति से निकले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव, श्री राम जन्म भूमि आंदोलन के प्रमुख खलनायक हैं। सिर्फ अपने वोट बैंक को पुख्ता करने के लिए 30 अकटूबर और 2 नवंबर के बीच अयोध्या में कार सेवकों पर गोली चलवालने का आदेश मुलायम सिंह यादव ने दिया था। जिस सत्ता के लिए मुलायम ने रामभक्तों पर गोलियां चलवायी थीं आज वह स्वंय राजनीतिक वनवास में हैं। राज्य में उनकी पार्टी हाशिए पर है।मुरली मनोहर जोशी
श्री राम जन्म भूमि आंदोलन को राजनीतिक बल और समर्थन देने वाले भाजपा के दिग्गज नेता अटल, अडवाणी और जोशी कि तिकड़ी थी। 1992 में श्री राम जन्म भूमि पर कारसेवा के समय मुरली मनोहर जोशी आडवाणी के बाद बीजेपी के दूसरे बड़े नेता थे। इस कार सेवा के दौरान 06 दिसंबर 1992 को कारसेवकों की भीड़ के कारण तीनों गुबंद गिर गया। आज वह बीजेपी के मार्गदर्शक मंडल में हैंकल्याण सिंह
जब अयोध्या में कारसेवा का अभियान 1992 में चल रहा था तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ही थे। मुलायम सिंह यादव के विपरित कल्याण सिंह ने कारसेवकों को कार सेवा करने से नहीं रोका, जिससे कारसेवकों की भीड़ बढ़ गई और बाबरी मस्जिद के तीन गुबंद गिर पड़े। श्री राम जन्म भूमि मुक्ति आंदोलन के 77 वें संघर्ष का यह महत्वपूर्ण पड़ाव था। कल्याण सिंह, कुछ महीनों पहले तक राजस्थान के राज्यपाल थे।उमा भारती
श्री राम जन्म भूमि मुक्ति आंदोलन में प्रमुख महिला चेहरे के तौर पर उनकी पहचान बन कर उभरी। 06 दिसंबर 1992 को कारसेवा के कार्यक्रम में उमा भारती की प्रमुख भूमिका थी। वह कई बार लोकसभा की सदस्य बनीं और अटल बिहारी वाजपेयी व नरेंद्र मोदी के सरकार में मंत्री बनीं। 2019 के आम चुनावों के बाद से उन्होंने अपने आपको सक्रिय राजनीति से दूर कर लिया है, आज काल वह समाजसेवा के कार्यों मे जुटी हैं।आंदोलन से जुड़े अन्य प्रमुख नामों में प्रवीण तोगड़िया,विष्णु हरि डालमिया,परमहंस राम चन्द्र दास जी महाराज,गोपाल सिंह विशारद,ठाकुर गुरूदत्त सिंह के साथ लाखों रामभक्त नायक हैं।

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