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किसानों के मुद्दे पर हो-हल्ला मचा रही कांग्रेस के हाथ किसानों के खून से रंगे हैं

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किसानों पर अत्याचार करने में कांग्रेस का कोई सानी नहीं है। यह 1998 की बात है, जब मध्य प्रदेश में कांग्रेस के कार्यकाल में मुलताई हत्याकांड को अंजाम दिया गया था, जिसमें पुलिस फायरिंग में 22 किसान मारे गए थे। फायरिंग का आदेश तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने ही दिया था।

मुलताई गोली कांड

बैतूल जिले की मुलताई तहसील में 1998 में ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से खराब हुए गेहूं की फसलों पर किसान 5000 रुपए प्रति एकड़ की दर से मुआवजा मांग रहे थे। यहां तीन साल से लगातार न तो कांग्रेस के एजेंडे में मुआवजा दिए जाने की बात थी और न ही दिग्विजय सिंह सरकार ने किसानों की मांग पर कोई गौर किया। इस वजह से प्रदेश में मुलताई ब्लॉक के लगभग 2500 किसानों ने मिलकर आंदोलन की चेतावनी दी।

कांग्रेस सरकार की नीति 

लगभग हफ्तेभर से चल रहे इस आंदोलन को लेकर कांग्रेस सरकार ने कोई गंभीरता नहीं बरती। किसानों ने 12 जनवरी 1998 को तहसील मुख्यालय घेरने की चेतावनी दी तो भारी पुलिस बल लगा दिया गया। आसपास के गांवों से किसानों को मुलताई नहीं पहुंचने देने के लिए रास्ते ब्लॉक कर दिए तो विवाद भड़क गया। पथराव शुरू होते ही पुलिस ने फायरिंग शुरू की।

मुलताई में मौतें

मुलताई थाने के रिकॉर्ड अनुसार इस घटना में 22 किसानों की मौत हुई और 150-200 घायल हो गए।

सरकार का गफलतभरा बयान : मुलताई गोलीकांड में भी पहले सरकार यह कहकर मुकर गई थी कि पुलिस ने गोली नहीं चलाई है। बाद में स्वीकारना पड़ा कि पुलिस फायरिंग हुई थी और आंदोलन में मौजूद किसानों की मौत हुई थी।

उमा भारती ने कहा था जलियांवाला कांड

प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने घटना के बाद इसे जलियांवाला बाग कहते हुए तत्कालीन कलेक्टर और एसपी पर केस दर्ज करने की मांग की थी।

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