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विश्व भारती यूनिवर्सिटी जमीन पर नोबेल विजेता अमर्त्य सेन का कब्जा! मिला 15 दिन में खाली करने का नोटिस

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विश्व भारती विश्वविद्यालय- शांतिनिकेतन की जमीन पर अवैध कब्जा! सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करने वाले का जो नाम सामने आ रहा है वो नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन का है। विश्व भारती यूनिवर्सिटी ने वामपंथी बुद्धिजीवी अमर्त्य सेन को जमीन पर से कब्जा खाली करने को कहा है। विश्व भारती ने अमर्त्य सेन को 15 दिनों के भीतर जमीन खाली करने का नोटिस दिया है। ये नोटिस 19 अप्रैल को भेजा गया है। 15 दिन के समय के हिसाब से उन्हें 6 मई तक जमीन खाली करनी है।

नवभारत टाइम्स के अनुसार नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में कहा गया है कि एक सदी पुराने केंद्रीय संस्थान को अतिक्रमणों पर नियंत्रण पाने और मंत्रालय को रिपोर्ट जमा करने की तत्काल जरूरत है। अमर्त्य सेन को जारी नोटिस में कहा गया अगर तय समय-सीमा तक जमीन खाली न हुई तो उन्हें जबरन हटाया जाएगा। दुनिया भर में मशहूर शांतिनिकेतन की ओर से जारी नोटिस में यह भी कहा गया है कि अनुसूचित परिसर के उत्तर-पश्चिमी कोने में 50 फुट लंबी और 111 फुट चौड़ी 13 डेसिमल भूमि उनसे वापस ली जाए।

इसके पहले विश्व भारती विश्वविद्यालय ने पश्चिम बंगाल सरकार को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि इसके दर्जनों भूखंडों को निजी पार्टियों के पक्ष में गलत तरीके से नामांतरित किया गया है। 24 दिसंबर, 2020 को टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के अनुसार विश्वविद्यालय द्वारा तैयार की गई अवैध कब्जे वाले लोगों की सूची में प्रोफेसर अमर्त्य सेन का भी नाम शामिल है। विश्वविद्यालय ने आरोप लगाया कि सरकार के रिकॉर्ड ऑफ राइट (आरओआर) में स्वामित्व की गलत रिकॉर्डिंग के कारण, विश्वविद्यालय की जमीन को अवैध रूप से नामांतरित  कर दिया गया और निजी पार्टियों ने रेस्तरां, स्कूल और अन्य व्यवसायों को इस जमीन पर शुरू कर दिया।

अमर्त्य सेन के मामले में विश्वविद्यालय का कहना कि विश्व भारती द्वारा उनके दिवंगत पिता को कानूनी तौर पर पट्टे पर दी गई 125 डेसिमल जमीन के अलावा, उन्होंने अलग से 13 डेसिमल जमीन पर कब्जा कर लिया है। इस मामले पर सेन ने कहा कि विश्व भारती भूमि की जिस जमीन पर हमारा घर स्थित है, वह एक लंबी अवधि के पट्टे पर है, जो अभी समाप्त होने वाला नहीं है।

सोशल मीडिया पर लोग विश्व भारती के भूखंडों पर अमर्त्य सेन के अवैध कब्जे के बारे में चर्चा कर रहे हैं…

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